सत्य निकेतन हादसे के बाद बड़ा एक्शन, CM रेखा गुप्ता बोलीं- दोषियों को नहीं बख्शेंगे

Cm Rekha Gupta Aur Satya Niketan Building Collapsed Image
सत्य निकेतन हादसे में मुख्यमंत्री ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया

नई दिल्ली: दिल्ली में 6 सितंबर को हुए हादसा को लेकर लोगों के अंदर और खासकर छात्रों के अंदर एक डर का माहौल बन चुका है। सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत गिरने के हादसे छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर और इमारत की जर्जर स्थिति पर लगातार सवाल खड़ी किया जा रहे हैं।

इस हादसे के बाद जो छात्र पहले से ही PG में रह रहे हैं। उनके अंदर काफी बड़ा डर का माहौल बन चुका है और वो हर समय इसी बात को लेकर चिंता में बैठे हुए हैं कि जो हादसा इस PG में रह रहे छात्रों के साथ हुआ है कहीं इनके साथ भी घटित ना हो जाए और इसीलिए छात्र लगातार अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जाता रहे हैं।

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत गिरने के हादसे ने छात्र सुरक्षा और पुरानी इमारतों की हालत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ताज़ा अपडेट के अनुसार, इस हादसे में 7 लोगों की मौत हुई है और कई लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। राहत एवं बचाव अभियान में दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस और NDRF की टीमें लगी रहीं।

क्या हुआ था 6 सितंबर के दिन ?

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके (मोतीबाग के पास) में 6 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे एक पांच मंजिला इमारत ढह गई। यह इमारत मुख्य रूप से छात्रों के लिए पीजी (Paying Guest Accommodation) के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। इस हादसे के बाद करीब 27 28 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया जिसके बाद से इस बिल्डिंग के मलवे से करीब 12 लोगों को बाहर निकल गया जिसमें करीब 7 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 5 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इस मृतक में 7 लोगों में से 5 छात्र थे। अगर कुछ मीडिया रिपोर्ट और स्थानीय लोगों की माने तो यह घटना अचानक नहीं हुई बल्कि यह 40 वर्ष पुरानी बिल्डिंग पहले से ही जर्जर स्थिति में थी। लेकिन इसके बावजूद भी इसके ऊपर अवैध तरीके से कार्य करवाया जा रहा था। इस बिल्डिंग में पहले ही बारिश के कारण बेसमेंट में पानी भरा हुआ था और हादसे से 1 घंटे पहले ही काम रोकने की चेतावनी भी दी गई लेकिन इसके बावजूद भी कार्य को रोक नहीं गया। जिसका नतीजा पांच मंजिला बिल्डिंग धस गई और कई लोगों को अपने साथ मौत के घाट उतार दी

हरिराम गुप्ता (बंसल) जो इस बिल्डिंग के मालिक हैं उनको पहले से ही इस बिल्डिंग की स्थिति के बारे में पता था। उनको पता था की बिल्डिंग काफी पुरानी हो चुकी है और यह जर्जर स्थिति में है। लेकिन इसके बावजूद भी यह बिल्डिंग पर अवैध तरीके से कार्य करवा रहे थे। चेतावनी मिलने के बाद भी इन्होंने कार्य को नहीं रुकवाया लेकिन जब लापरवाही हद से ज्यादा हुई और बिल्डिंग धस गई जिसके बाद हरिराम गुप्ता फरार हो गए

बिल्डिंग धसने के बाद इन्होंने यह तक नहीं देखा कि इस बिल्डिंग में ढहने की वजह से कितने छात्रों की जान गई और कितने लोग अभी भी मलवे में दबे हुए हैं। इन्होंने तो अपनी जान बचाते हुए मौका मिलने पर तुरंत वहां से फरार हो गए इसके बाद दिल्ली पुलिस इनको ढूंढना प्रारंभ कर दी

हरिराम गुप्ता को किया गया गिरफ्तार

बिल्डिंग ढहने के बाद बिल्डिंग के मालिक हरिराम गुप्ता जो दिल्ली से फरार होकर राजस्थान के तरफ चल दिए इसके बाद दिल्ली पुलिस ने इनको खोजना प्रारंभ कर दी। लगातार घंटे तलाश करने के बाद और कई जगह हरिराम को ढूंढने के बाद अंततः दिल्ली पुलिस ने इनको राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया

हरिराम के गिरफ्तारी के साथ-साथ दिल्ली पुलिस इसके साथ ही उसकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश बंसल को भी गिरफ्तार किया गया है। साथ में सरकार ने भी कड़ी कार्रवाई करते हुए 5 अधिकारियों को उनके पद से निलंबित कर दिया है।

हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का एक्शन

दिल्ली सत्य निकेतन हादसे पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 अधिकारियों पर एक्शन लेते हुए उनको सस्पेंड कर दिया।

5 अधिकारी हुए सस्पेंड

  • MCD के डिप्टी कमिश्नर
  • एग्जीक्यूटिव इंजीनियर
  • सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर
  • अस्सिटेंट इंजीनियर
  • जूनियर इंजीनियर

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए साफ कहा कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने राहत और बचाव कार्यों की निगरानी की और इमारत मालिक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पूरे हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही सत्य निकेतन और आसपास के अन्य छात्र पीजी (PG) इमारतों की सुरक्षा और नियमों की जांच (Structural Audit) शुरू कर दी गई है ताकि आगे ऐसे हादसों को रोका जा सके।

विधायक अनिल शर्मा पर लगे आप

भाजपा के विधायक अनिल शर्मा के ऊपर बड़ी आरोपी का निशान सदा गया हादसे के बाद लोगों ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अनिल शर्मा चुनावी हलफनामा में अपने दो बिल्डिंग को दर्शाया था। जो कि अभी PG के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। और यह दोनों बिल्डिंग हादसे वाले बिल्डिंग से करीब 350 मीटर दूरी पर है।

ऐसे में अनिल शर्मा की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने बिल्डिंग के साथ-साथ उसे एरिया की बिल्डिंग की भी स्थिति की जांच किए होते। लेकिन उन्होंने अपने जिम्मेदारी से मुकरते हुए ना तो उन जर्जर बिल्डिंगों की सुद ली और ना ही इसकी वर्तमान स्थिति की जांच की

मीडिया ने अनिल शर्मा से सवाल करते हुए कहा कि जब वह खुद इस एरिया के अंदर कई जगहों पर PG चलते हैं। तो उनका यह दायित्व बनता है कि वह इन सारे बिल्डिंगों की जर्जर स्थिति की निगरानी करते और सरकार को रिपोर्ट करते लेकिन अनिल शर्मा ने ऐसा कुछ नहीं किया ऐसे में इस हादसे के एक जिम्मेदार अनिल शर्मा को भी ठहराया जा रहा है।

विपक्ष ने भी उठाए सवाल ?

विपक्ष नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि

हर बार BJP सरकार का वही शर्मनाक पैटर्न – हादसों से पहले रोकथाम नहीं, उनके बाद बयानबाज़ी होती है, कुछ छोटे अफ़सरों पर ज़िम्मेदारी मढ़ दी जाती है, और असली गुनहगार जवाबदेही मुक्त रहते हैं।

सत्य निकेतन में छात्रों से भरी इमारत का गिरना कोई अकेली त्रासदी नहीं है। पिछले 4 महीनों में सैदुलाजाब में ऐसी त्रासदी में 6 लोगों की मौत हुई, हौज़ रानी में आग ने 22 जानें ले लीं। हर बार जिंदगियां, सपने और अरमान मलबे में दबते हैं – और हर बार कार्रवाई गायब रहती है। और जवाबदेही मांगने पर प्रधानमंत्री खुद आपको “दिमागी नक्सल, नाराज़ फूफा” जैसे अपमानजनक तमगे दे देते हैं -मकसद, सवाल पूछने वालों को शर्मिंदा करो, बदनाम करो और चुप करा दो।

12 साल में ये सरकार दुनिया भर की बातें कर के आपको गोल-गोल घुमाती रही, लेकिन मुद्दे की बात नहीं की। दिल्ली में “ट्रिपल इंजन” सरकार है, तो अब किस बात से लाचार है लाचारी है नीयत की – क्योंकि जहां नीयत नहीं होती, वहां जवाबदेही भी नहीं होती। ( राहुल गांधी के एक्स हेडल से )

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का वायरल बयान

लगभग 2 महीने पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का दिया गया बयान जो अभी काफी तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें मुख्यमंत्री रेखा ने दिल्ली के सभी कोचिंग सेंटर को चेतावनी देते हुए कहा था कि

दिल्ली में जितने भी कोचिंग सेंटर चल रहे हैं चाहे 900 या 1000, नंबर से मतलब नहीं है। उन सभी के पास एक महीने का टाइम है। जितने भी कोचिंग सेंटर हैं जिनके पास फायर ऑडिट नहीं है, जिनके पास सेफ्टी इक्विपमेंट नहीं है, जिनके पास बिल्डिंग में सेफ्टी और सिक्योरिटी के बेसिक मेजर्स नहीं है। वह सारे कोचिंग सील कर दिए जाएंगे यदि वो नियमों का पालन नहीं करते हैं तो

मुख्यमंत्री ने कहा था कि हाई कोर्ट की कमेटी के फंडिंग के अनुसार हम एक कानून लाने वाले हैं। ताकि दिल्ली के हर एक कोचिंग सेंटर पर पढ़ रहे लाखों बच्चों के जिंदगियों को सेफ किया जा सके और किसी भी तरह की उनका कोई भी परेशानी ना हो

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा था कि हमें मतलब है तो छात्रों और बच्चों की जान, उनकी सेफ्टी और सिक्योरिटी से

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यह बयान अब सत्य निकेतन वाले हादसे के बाद काफी तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें लोग मुख्यमंत्री पर सवाल करते हुए कह रहे हैं कि जो महीनो पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने बयान के माध्यम से कोचिंग इंस्टिट्यूट को चेतावनी दी थी क्या उसे पर कोई कार्रवाई हुई है और क्या जो बच्चे इस घटना में अपना जान गवा दिए हैं उसे पर सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती

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अंततः

सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर पुरानी इमारतों, PG और छात्रों के रहने वाले भवनों की नियमित स्ट्रक्चरल जांच कौन सुनिश्चित करेगा? अब देखना होगा कि CM रेखा गुप्ता सरकार की नई सेफ्टी पॉलिसी और स्ट्रक्चरल ऑडिट से दिल्ली के छात्रों और आम लोगों की सुरक्षा व्यवस्था में कितना बदलाव आता है।

कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्यों ने भी मुख्यमंत्री से सवाल करते हुए कहा है कि जितने भी छात्र इस दुर्घटना में अपना जान गवाई हैं उनके परिवार वालों को मुआवजे के तौर पर 1-1 करोड रुपए दिया जाए और साथ में जितने भी लोग अस्पताल में भारती हैं जिनकी स्थिति अभी नाजुक बनी हुई है उनको 20-20 लख रुपए का मौजूदा दिया जाए

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