दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले बड़ा एक्शन, अभिजीत दीपके हिरासत में

दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले पुलिस द्वारा अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने और कनॉट प्लेस में भारी सुरक्षा की तस्वीर
दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले बड़ा एक्शन। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में लिया।

नई दिल्ली: दिल्ली में आंदोलन से इतनी परेशानी हो रही है कि कॉकरोच जनता पार्टी के द्वारा आयोजित “लहरा दो तिरंगा” आंदोलन जिसको दिल्ली के कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आयोजित किया जाने था। जिसके लिए दिल्ली पुलिस पहले ही कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपक को नोटिस भेज कर इस कार्यक्रम में शामिल न होने के लिए कहा था।

आंदोलन को लेकर क्या है पूरा मामला?

कॉकरोच जनता पार्टी के द्वारा कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च का आह्वान किया गया था। इस आंदोलन का मुख्य वजह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और कॉकरोच जनता पार्टी के कुछ नेताओं को पुलिस हिरासत से छुड़ाने के लिए इस आंदोलन का आयोजन किया गया था जिसको दिल्ली पुलिस के द्वारा पहले ही नोटिस भेज कर रोकने की बात जारी की गई थी।

दिल्ली पुलिस का कहना था कि कनॉट प्लेस प्रदर्शन के लिए अधिसूचित स्थान नहीं है और इलाके में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए गए हैं। पुलिस ने कानून-व्यवस्था और आम लोगों, कारोबारियों तथा यात्रियों की परेशानी का हवाला देते हुए मार्च नहीं निकालने की चेतावनी दी थी।

कनॉट प्लेस में भारी सुरक्षा

आंदोलन को ध्यान में रखते हुए कनॉट प्लेस और आसपास के एरिया में भारी सुरक्षा बल तनाव किया गया था। पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल के साथ बैरिकेड करके पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया और शुक्रवार और शनिवार को सेंट्रल पार्क को बंद करने का भी फैसला लिया गया।

दिल्ली पुलिस के डीसीपी नेहा यादव ने भी लोगों से अपील करते इस तिरंगा मार्च में शामिल न होने के लिए अपील किया सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए और आम आदमी के दिक्कतों को इस आंदोलन से प्रभावित होते हुए देखकर डीपी नेहा यादव ने कहा कि लोग अपने घर पर ही रहे और इस तिरंगा मार्च में शामिल न हो।

नेहा यादव ने यह भी कहा कि बीएस के द्वारा 163 का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

अभिजीत दीपके हिरासत में

कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार को दिल्ली पुलिस तिरंगा मार्च में शामिल होने से पहले कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपक को भी हिरासत में ले लिया। रिपोर्ट के मुताबिक अभिजीत दीपक को पहले ही दिल्ली पुलिस के कुछ टीम अभिजीत दीपक के आवास पर जाकर इनको नोटिस दिया था और इनको तिरंगा मार्च में शामिल न होने के लिए कहा गया था।

इसके अलावा छात्र संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस कार्रवाई के दौरान अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।

सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला

इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कारोबारियों ने शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने कहा कि सेंट्रल पार्क और कनॉट प्लेस बंद होने से उनके कारोबार पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है और इनको काफी बड़ा नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि अगर अदालत को बाद में लगता है कि कारोबारियों को गैरकानूनी या अनुपातहीन तरीके से नुकसान हुआ है, तो मुआवजे के लिए संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल किया जा सकता है। मामले को अक्टूबर के अंत में सुनने की बात कही गई है।

धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार आंदोलन को लेकर प्रतिक्रिया दी

पुर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देशहित, व्यवस्था को ठीक करने के दावे और छात्रों के हितों के नाम पर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन का असली चरित्र अब किसी से छिपा नहीं है। खुले तौर पर “Regime Change” और बांग्लादेश से प्रेरणा लेने की बात करना स्पष्ट करता है कि यह छात्रों की आड़ में केवल देश में अराजकता फैलाने और राजनीतिक व्यवस्था को अस्थिर करने की सोची-समझी साजिश है।

मगर, विदेशी ताकतों के दम पर सत्ता का सपना देखने वाले ये देश विरोधी लोग समझ लें कि भारत में सत्ता परिवर्तन केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया से तय होता है। इसलिए, भारत की जनता इस अलोकतांत्रिक सोच को कभी स्वीकार नहीं करेगी।

हार का शतक लगा चुके नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बार-बार जनता के जनादेश को अपमानित करते हैं। चुनावी प्रक्रिया से मनचाहा परिणाम न मिलने पर लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने की INCIndia की कोशिश और राजनीतिक स्वार्थ के लिए आए दिन जनता को परेशान करना इनका हमेशा से उद्देश्य रहा है। यह उसी लोकतंत्र विरोधी कांग्रेसी मानसिकता को दिखाता है जिसमें देशवासियों के अधिकारों को कुचल दिया गया था।

हाथ में संविधान लेकर घूमने वाले संविधान विरोधी राहुल गांधी को जनता बार-बार नकार चुकी है। फिर भी सत्ता की लालसा में अपनी जिद में जनादेश का अपमान और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर लोकतंत्र की मर्यादाओं को तार-तार किया जा रहा है। राहुल गांधी जी, लोकतंत्र के प्रति आपका यह नफरती रवैया बेहद शर्मनाक है (पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का ट्वीट )

https://x.com/dpradhanbjp/status/2111011509170319668
धर्मेंद्र प्रधान ट्वीट
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अंततः

फिलहाल दिल्ली में हो रहे आंदोलन कारोबारी की चिंता और पुलिस कार्रवाई तीनों ही चर्चा का विषय बना हुआ है हालांकि सारे लोगों की नजर अक्टूबर महीने के अंतिम तक आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिक हुई है।

एक तरफ प्रदर्शनकारी अपने विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बता रहे हैं, वहीं प्रशासन का जोर कानून-व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा पर है।

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