राहुल गांधी का हमला और भाजपा की 12 साल का मेहनत बर्बाद! एक बिल के चक्कर में इतना बवाल

दिल्ली: सारे लोगों को यही लग रहा है की पूरी कांग्रेस और पूरा विपक्ष जो मोदी Government के खिलाफ है, वह महिला आरक्षण बिल को..

प्रधानमंत्री मोदी देश को संबोधित करते हुए

दिल्ली: सारे लोगों को यही लग रहा है की पूरी कांग्रेस और पूरा विपक्ष जो मोदी Government के खिलाफ है, वह महिला आरक्षण बिल को पास नहीं होने दे रहे हैं। यहां तक की सरकार ने राहुल गांधी और पूरे कांग्रेस को महिला विरोधी घोषित कर दिए। सरकार और पूरे भाजपा के नेता सदन में, मीडिया के सामने और हर जगह कांग्रेस और विपक्ष को महिला विरोधी घोषित करने में लग गए।

क्या विपक्ष जानबूझकर पास नहीं होने दिया बिल?

अभी तक आपके कानों तक जितनी भी बातें पहुंची है उसमें आपको यह लग रहा होगा कि मोदी जी भारतीय राजनीति में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए एक बिल लाए जिसमें महिलाओं को 33% का आरक्षण दिया गया लेकिन पूरे विपक्ष ने इसको पास होने से रोक दिया।

यहां तक की विपक्ष को तो महिला विरोधी भी घोषित कर दिया गया। सबको लगने लगा कि कांग्रेस या फिर जितने भी विपक्ष हैं वह नहीं चाहते हैं कि महिलाओं को बराबर का भागीदारी भारत की राजनीति में मिले और महिला खुलकर अपनी और अपने साथ के लोगों की बात सदन में रख सके।

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हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ विपक्ष जीस बिल को लेकर सदन में हल्ला मचाई और जीस बिल को पास होने से रोका वह बिल तो अलग ही था। विपक्ष ने कभी यह नहीं दावा किया कि वह महिला आरक्षण बिल को पास नहीं होने देना चाहते बल्कि वह तो खुद सामने से बोलते रह गए कि आप महिला आरक्षण बिल को पास करें लेकिन इसके साथ अन्य जो दो बिल अटैच किए गए हैं उसको हटा दिया जाए।

अन्य दो बिल कौन से थे ?

जिस महिला आरक्षण बिल को लेकर इतना हल्ला मच रहा है उसके साथ में दो और बिलों को मोदी सरकार ने इसके साथ ही पास करने की कोशिश में थी जिस वजह से महिला आरक्षण वाला बिल भी पास नहीं हो पाया और नीचे गिर गया। हालांकि जितने भी कांग्रेस और विपक्ष है वह अपनी बातों से यह स्पष्ट करना चाह रहे थे कि वह महिला आरक्षण बिल के विरोध में नहीं है।

बल्कि उसके साथ अन्य दो जो बिल मोदी सरकार इसमें जोड़ी है उसको हटा दिया जाए तो महिला आरक्षण वाला बिल पास हो सकता है। महिला आरक्षण बिल जिसमें भारत की राजनीति में महिलाओं को 33% का आरक्षण दिया जा रहा था। महिला आरक्षण अधिनियम 2023 यह मूल कानून है जो लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण सुनिश्चित करता है जिसे 2023 में लागू किया गया था। लेकिन इसके साथ जो दो अन्य बिल था वह

  • संविधान 131 वां संशोधन विधेयक 2026 यह बिल आरक्षण को परिसीमन से जोड़ता है ताकि लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 850 किया जा सके और उसी के आधार पर महिलाओं के लिए 33% सिट (227+) आरक्षित की जाए
  • परिसीमन आयोग से जुड़े कानून में संशोधन यह नया परिसीमन शुरू करने के लिए लाया गया था ताकि 2029 तक सीटों का पुनर्गठन पूरा हो सके।

सरकार इस बिल के जरिए बिना मौजूदा सीटों को कम किए परिसीमन के माध्यम से आरक्षण लागू करना चाहती थी। लेकिन विपक्ष द्वारा इस पर विरोध दर्ज करने के कारण यह पास नहीं हो सका।

महिलाओं के आरक्षण में बाधा

प्रधानमंत्री मोदी देश को संबोधित करते हुए काहे की हम लोग महिलाओं को भारत की राजनीति में 33% का भागीदारी देने का प्रस्ताव सदन में पेश किए लेकिन उसको विपक्ष के द्वारा नीचे गिरा दिया गया और वह बिल पास नहीं हो सका। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की बहने और माताएं विपक्ष को इस बिल को ना पास करने की वजह से माफ नहीं करेगी।

हालांकि इस बिल को लेकर विपक्ष जश्न मना रहा है। विपक्ष का दावा है कि वह 12 साल के भाजपा सरकार के कार्यकाल में पहली बार संविधान का जीत हुआ है राहुल गांधी का कहना है कि मोदी कार्यकाल में पहली बार संविधान जीता है और भाजपा की हार हुई है बीजेपी सरकार जो नियम को अपने दम पर पास कराना चाहती थी उसको हम लोगों ने पास नहीं होने दिया।

कितने वोट से बीजेपी हारी

इस बिल को पास करने के समय सदन में 528 सांसद मौजूद थे। और बिल पास करने के लिए 352 सांसदों की वोटो की जरूरत थी लेकिन बिल के पक्ष में केवल 298 वोट पड़े क्योंकि बाकी का वोट इंडिया गठबंधन एक जुट रहा और उसके विरोध में 230 पड़ गए।

और जहां बिल पास करने के लिए 352 वोटो की जरूरत थी वहां 258 वोट मिलने के कारण 54 वोट से मोदी सरकार पीछे हो गई और इस बिल पर पानी फिर गया और 12 साल के मोदी सरकार अपने कार्यकाल में पहली बार किसी बिल को पास नहीं कर पाई और हार गई।

अंततः

राहुल गांधी के साथ पूरे कांग्रेस नेता और जितने भी भाजपा के विपक्ष है उन सब का कहना था कि महिला आरक्षण बिल पास करने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन उसके साथ इस दो बिल को पास नहीं होने दिया जाएगा क्योंकि विपक्ष को ऐसा लगता था कि मोदी सरकार 2029 में खुद को मजबूत करने के लिए एक नई रणनीति गढ रही है।

हालांकि मोदी सरकार सदन में यह बोली की यह तीनों बिल एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। और इसलिए महिला आरक्षण को पास करने के लिए इन दोनों बिलों को भी पास करना पड़ेगा वरना यह दोनों बिल के बिना महिला आरक्षण बिल व्यर्थ है।

          — समाप्त —     (The Ashirvad)

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