दिल्ली: भारत की राजनीतिक इतिहास में 17 अप्रैल 2026 बहुत ही खास दिन बन गया है लेकिन यह खास दिन किसके लिए बन गया वह तो एक सस्पेंस बनाता फिर रहा है।
2014 से सत्ता में आने वाली भारतीय जनता पार्टी 12 साल में पहली बार बुरी तरह से हारी है। नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली एनडीए ( NDA ) सरकार को लोकसभा के अंदर पहली बार किसी बिल को पास करने के चक्कर में सीधी और बड़ी हार मिली है। मोदी सरकार संविधान 131 संशोधन प्रस्ताव 2026 को पास करने में विफल रही जिसके चलते इसके साथ दो और बिल जो मुख्य बिल की श्रेणी थी उसको भी वापस सरकार को लेना पड़ गया।
इस बिल का मुख्य उद्देश्य
- इस बिल का मुख्य उद्देश्य था लोकसभा और राज्यसभा में 33% सिट महिलाओं के लिए आरक्षित करना यानी ऐसा समझो कि हर 3 सीट में से 1 सीट महिला उम्मीदवार के लिए
- इस बिल से हर वर्ग की महिलाओं को लाभ मिलेगा
- इस बिल से महिलाओं की संख्या बढ़ाना मुख्य उद्देश्य है।
- अभी संसद में महिलाओं की संख्या काफी कम है महिलाओं को पुरुषों के बराबर राजनीति में अवसर देना इस बिल का मुख्य उद्देश्य है।
- महिलाओं को Decision Making में उनकी भागीदारी बढ़ाना
मतलब एक शब्द में बोला जाए तो इस बिल का उद्देश्य है महिलाओं को राजनीति में बढ़ावा देना 33% हिस्सादारी देकर उनको बराबरी का अधिकार दिलाना।
क्यों पास नहीं हुआ बिल ?
यह एक संविधान संशोधन बिल होने के कारण इसे पास करने के लिए लोकसभा में दो तिहाई विशेष बहुमत की आवश्यकता थी। लेकिन विपक्ष ने पूरा गेम चेंज कर दिया वोटिंग के समय 528 सांसद मौजूद थे। और बिल पास करने के लिए 352 सांसदों की वोटो की जरूरत थी। लेकिन बिल के पक्ष में केवल 298 वोट पड़े क्योंकि बाकी का कांड विपक्ष (INDIA गठबंधन) कर दिया विपक्ष एक जुट रहा और विरोध में 230 वोट पड़े।
और जहां बिल पास करने के लिए 352 वोटो की जरूरत थी वहां 298 वोट मिलने के कारण 54 वोट से मोदी सरकार पीछे हो गई और इस बिल पर पानी फिर गया और 14 साल के मोदी सरकार अपने कार्यकाल में पहली बार किसी बिल को पास नहीं कर पाई और यह बिल निचे गिर गया।
विपक्ष क्यों पास नहीं होने दिया इस बिल को ?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्ष दलों ने इस बिल का जमकर विरोध किया इनका बोलना है कि इस बिल से उन राज्यों को खासकर (दक्षिण और पूर्वोत्तर) को प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया है। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार इस बिल को लागू करके अपने आप को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
ताकि जहां बीजेपी की सरकार है वहां लोकसभा सिटों को बढ़कर सत्ता पर एकाधिकार जमाया जा सके। विपक्ष का बोलना था कि महिला आरक्षण बिल पास हो लेकिन परिसीमन (Delimitation ) का शर्तों के बिना तुरंत लागू किया जाए।
सरकार बाकी का दो बिल भी वापस ले लिया
131 वां संशोधन बिल संसद में नहीं पास हुआ और धड़ल्ले से गिर गया और इसी कारण से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिफ ने इससे जुड़े दो और बिल को भी वापस खिसका दिया। यह बिल परिसीमन प्रस्ताव 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) प्रस्ताव 2026 को भी वापस ले लिया गया।
सरकार को बोलना है कि यह तीनों बिल एक दूसरे से जुड़े थे इसलिए केवल अकेले एक बिल का कोई तर्क नहीं है।
अंततः
विपक्ष का दावा था कि इस बिल के साथ अन्य दो प्रस्ताव को भी मोदी सरकार पास करा कर अपना दायित्व को और मजबूत करना चाहती थी। इसलिए राहुल गांधी और अन्य विपक्ष ने दावा किया कि केवल महिला आरक्षण बिल को अकेले पास करने में उनका कोई आपत्ति नहीं है।
— समाप्त — (The Ashirvad)













