SIR पर राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, चुनाव आयोग से मांगा जवाब

SIR मामले में राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की तस्वीर
SIR पर राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, चुनाव आयोग से मांगा जवाब

नई दिल्ली: मतदान सूची में गहन पुनरीक्षण को लेकर एक बार फिर से देश में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षीय नेताओं के याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। याचिका में विपक्ष के द्वारा मतदान सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाने का कारण माना गया है।

विपक्ष नेता राहुल गांधी ने दावा किया है कि लगभग 13 करोड़ नाम मतदान सूची से हटाए गए हैं। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने की। अदालत ने याचिका को SIR से संबंधित पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ने का निर्देश दिया। अब इस मामले में चुनाव आयोग का जवाब और अदालत की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।

SIR क्या है? और इसपे इतना विवाद क्यों?

SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। हिंदी में इसे मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कहा जाता है।

इस प्रक्रिया का मूल्य उद्देश्य है मतदान सूची को अपडेट करना और इसमें उन नाम को हटाना जिन नाम के व्यक्ति की या तो मृत्यु हो चुकी है या बिना किसी कारण से दो-दो नाम इस व्यक्ति के चल रहे हैं या फिर जिस व्यक्ति का नाम मतदान सूची में वह भारत का निवासी ही नहीं है।

चुनाव आयोग के द्वारा किए जा रहे इस अपडेट में उन लोगों के नाम काटने की ज्यादा आशंका है जो पहले से ही दूसरे देश से आकर भारत में रह रहे हैं और गैर कानूनी तरीके से मतदान करते हैं उन लोगों का नाम मतदान सूची से हटाने की प्रक्रिया चल रही है यहां तक कि वह नाम भी काटे जाएंगे जिस नाम का व्यक्ति मौजूदा स्थिति में है ही नहीं

हालांकि इसी मतदान सूची के नाम अपडेट को लेकर फिर से एक बार राजनीतिक चर्चा तेज हो चुकी है विपक्ष का यह दावा है कि इस अपडेट के दौरान उसे व्यक्ति का भी नाम मतदान सूची से हटाया जा रहा है जिसका इन सारे कामों से कोई संबंध नहीं है वह भारत का रहने वाला है और वह अपने मूल अधिकारों पर मतदान करता है ऐसे में उसका नाम भी मतदान सूची से काटा जा रहा है।

विपक्ष नेता राहुल गांधी ने तो यह तक दावा कर दिया कि अभी तक SIR के आड़ में लगभग 13 करोड़ से अधिक नाम प्रभावित हो चुके हैं। और चुनाव आयोग इस पर चुप्पी साधे बैठी है। जवाब मांगने पर कोई भी जवाब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार या चुनाव आयोग की तरफ से नहीं मिल रहा

इस विवाद का मुख्य सवाल यह है कि मतदाता सूची में सुधार करते समय किसी पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो और पूरी प्रक्रिया निर्धारित कानूनी नियमों के अनुसार चले।

विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की?

राहुल गांधी और अन्य विपक्ष नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मतदान सूची से हो रहे नाम प्रभावित और पुनरीक्षण से जुड़े चुनाव आयोग के कुछ फैसलों की न्यायिक जांच की मांग की है। उनकी याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांग उठाई गए

  • राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मतदान सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को पारदर्शी रखा जाए
  • जिन मतदाताओं का नाम हटाया जा रहा है उसका कारण और बुधवार सूची को पारदर्शी और सार्वजनिक दिखाने के लिए विचार किया जाए
  • जिस मतदाता का नाम हटाया जा रहा है उससे पहले उसको सूचित करना और उसकी बात रखने का एक मौका दिया जाए
  • SIR से जुड़े फैसलों और उनकी प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज अदालत के सामने रखे जाएं।
  • मतदाता सूची में बदलाव की जांच के लिए स्वतंत्र ऑडिट या समिति गठित करने पर विचार किया जाए।

यह सारी मांगे विपक्ष नेता और राहुल गांधी के तरफ से सुप्रीम कोर्ट में रखा गया है हालांकि इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है और इस पर अभी तक कोई भी संतुष्टीत मोहर नहीं लगाया है जिससे यह कहा जा सके की सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को स्वीकार कर लिया है।

15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

15 अक्टूबर को SIR पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखवीर सिंह संधू और विवेक जोशी से इस पर जवाब मांगा है। अदालत ने मामले को SIR से संबंधित अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ने का फैसला भी किया।

सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को विपक्ष नेताओं के द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाले जाने पर और अदालत पर दबाव बनाने पर, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका पर दबाव नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने एक याचिकाकर्ता के आचरण पर अगली सुनवाई में स्पष्टीकरण मांगने की बात भी कही। 

महत्वपूर्ण बात: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त से जवाब मांगा है इसका मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट विपक्ष के द्वारा लगाए गए सारे आरोपों को स्वीकार करता है और उनके आरोपों पर मोहर लगता है। यह स्पष्ट होना बहुत ही जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा अभी तक इन आरोपों पर मोहर नहीं लगा है और ना ही सुप्रीम कोर्ट के द्वारा यह कहा गया है कि यह सारे आप सिद्ध साबित होते हैं। 

नोटिस का अर्थ है कि अदालत ने संबंधित पक्षों से मामले में जवाब मांगा है। आरोपों की सत्यता और कानूनी सवालों पर आगे की सुनवाई में विचार किया जाएगा।

क्या SIR प्रक्रिया पर रोक लगेगी?

याचिका कर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से SIR पर राहत की मांग की है हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में SIR को बंद कर दिया जाएगा और विपक्ष के द्वारा लगाए गए आरोपी को सिद्ध साबित करके उनकी सारी बातें मान ली जाएगी।

अभी तक SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है जिससे यह साबित हो सके कि विपक्ष के द्वारा लगाए गए सारे आरोप सही थे और SIR के आड़ में भाजपा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपनी मनमानी कर रहे थे।

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अंततः

राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की SIR संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले को SIR से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ने का भी निर्देश दिया है।

हालांकि अभी तक सुप्रीम कोर्ट की तरफ से इन सारे आरोपों पर मोहर नहीं लगा है जिससे यह साबित हो सके कि विपक्ष के द्वारा लगाए गए यह आरोप सही थे और सत्ताधारी अपनी मनमानी कर रहे थे सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को सुनने की बात कही है।

फिलहाल इसे विपक्ष के आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। मामले में आगे की सुनवाई, चुनाव आयोग का जवाब और अदालत के आगामी आदेश महत्वपूर्ण होंगे।

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