Reservation Hatao Andolan: जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन, जानिए क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें

जंतर-मंतर पर Reservation Hatao Andolan के दौरान प्रदर्शन करते स्वर्ण समाज के लोग
Reservation Hatao Andolan: जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन, जानिए क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर मंतर पर नीत आंदोलन के बाद अब आरक्षण को लेकर एक नया आंदोलन शुरू हो चुका है रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन के नाम से 21 अगस्त को भारी संख्या में लोगों ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया जिसमें देश के अलग-अलग राज्य से लोग प्रदर्शन करते हुए दिखाई दिए

आरक्षण को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों का सरकार से मांग है कि आरक्षण के नाम पर स्वर्ण समाज को सरकार दबाना बंद करें और स्वर्ण समाज के साथ हो रहे नरसंहार को खत्म करें सरकार एक विशेष समुदाय को आरक्षण की दल में ढल कर स्वर्ण समाज की गला दबाने की कार्य कर रही है।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र में बैठे सरकार केवल स्वर्ण समाज को ही हमेशा दबाने की कोशिश करती है, इनको लगता है कि स्वर्ण समाज कई दशकों से लोगों पर दुर्व्यवहार करता आया है। न्यूनतम कास्ट के लोगों के साथ हमेशा उनको दबाने का और उनको हर प्रकार से वंचित रहने का कार्य करता आया है ऐसे में सरकार उन विशेष समुदाय को आरक्षण की ढाल में ढाल कर स्वर्ण समाज की गला घोट रही है।

जंतर-मंतर पर क्यों जुटे प्रदर्शनकारी?

Reservation Hatao Andolan के समर्थकों का मुख्य तर्क है कि सरकारी योजनाओं और अवसरों में सहायता का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए आर्थिक स्थिति को भी प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान ‘आरक्षण गरीब को मिले, जाति को नहीं’ जैसे नारे लगाए गए।

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है, कि आरक्षण उसी को मिलना चाहिए जो आर्थिक रूप से कमजोर हो फिर वह चाहे व्यक्ति किसी भी समाज का क्यों ना हो उसमें यह सरकार को कभी नहीं देखना चाहिए कि अगर यह स्वर्ण समाज का है तो इसको आरक्षण नहीं मिलेगा और यह न्यूनतम वर्ग से आता है तो इसको आरक्षण मिलेगा

लोगों का कहना है कि आरक्षण के नाम पर जिस प्रकार से स्वर्ण समाज के बच्चों का सरकार गला दबाती है और उनको ही अपनी शिक्षा से वंचित रखती है तो सरकार को वहां पर उन छात्रों की दिक्कतें क्यों नहीं दिखाई देती क्यों नहीं सरकार दिखती है कि स्वर्ण समाज में भी लोग गरीबी स्तर पर हैं उनके अंदर भी काबिलियत है लेकिन वह केवल आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से कुछ कर नहीं पाए उनको नौकरियां नहीं मिल पाती

छात्रों के साथ हो रहा नरसंहार

प्रदर्शन में लोगों ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि सरकार यह क्यों नहीं दिखती की जो छात्र 90% अंक प्राप्त करके दूसरे स्कूल और कॉलेज में दाखिला नहीं ले पता क्योंकि उसके मार्कशीट पर केवल और केवल जनरल कैटेगरी का मोहर लगा होता है जबकि वहीं 40% अंक प्राप्त करके भी एक दूसरे समाज का छात्र उसे कॉलेज और स्कूल में दाखिला ले लेता है जहां पर पहुंचने के लिए जनरल वाले को 90% पर भी एंट्री नहीं मिलती

क्यों नहीं सरकार स्वर्ण समाज के छात्रों की काबिलियत को देखती है जिसको हमेशा से यह बोलकर दबाते हुए आया गया है कि तुम्हारे दादा, परदादा ने इन न्यूनतम कास्ट के लोगों पर काफी अत्याचार किया है और इनको हर प्रकार से हर सुविधा से वंचित रखा है।

जंतर मंतर पर इकट्ठा हुई भीड़

दिल्ली के जंतर मंतर पर आरक्षण में सुधार लाना और आरक्षण में बदलाव के साथ-साथ स्वर्ण समाज का भी दिक्कतों को सुनने के लिए जंतर मंतर पर भारी संख्या में लोगों ने अपनी उपस्थिति जताते हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया जहां पर यह आंदोलन काफी शांतिपूर्ण और बिना किसी गाली गलौज और बिना किसी और भद्रता का प्रचार करते हुए चुपचाप किया जा रहा था।

इस आंदोलन में हजारों की संख्या में लोग अलग-अलग राज्यों से हिस्सा लिए और सभी लोगों का बस एक ही सवाल सरकार से था कि आरक्षण में बदलाव लाया जाए और स्वर्ण समाज के साथ हो रहे नरसंहार को सरकार समझे और स्वर्ण समाज के बच्चों को भी उतना ही हक प्रदान करें जितना की एक विशेष कास्ट के लोगों को दिया जाता है।

आंदोलनकारियों ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि सरकार को क्यों स्वर्ण समाज के छात्रों का दिक्कत दिखाई नहीं देता क्यों सरकार को लगता है कि अभी भी स्वर्ण समाज बिछड़े आती बिछड़े समाज के ऊपर नरसंहार कर रही है सरकार को क्यों ऐसा लगता है कि न्यूनतम कास्ट के लोगों के साथ आज भी उतना ही अत्याचार किया जा रहा है जितना की इन लोगों के द्वारा स्वर्ण समाज के ऊपर आरोप लगाया जाता है।

आंदोलन कर रहे लोगों ने सरकार से अपनी बात रखते हुए कुछ मंगू का डिमांड किया जिसको लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिला है।

क्या है प्रदर्शनकारियों का मांग ?

आंदोलन कर रहे लोगों का केंद्र में बैठे सरकार से आरक्षण को लेकर कई प्रकार से सवाल किया जा रहा है आंदोलन कर रहे लोगों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि

  • सरकार स्वर्ण समाज को हमेशा से दबाने की कोशिश करती आई है।
  • केंद्र में बैठे सरकार को लगता है कि स्वर्ण समाज न्यूनतम कैटिगरी के लोगों के साथ अत्याचार करती रही है।
  • सरकार एक विशेष समुदाय को खुश करने के लिए और अपना राज्य सत्ता चलाने के लिए स्वर्ण समाज के नाम पर गंदा राजनीति करती है।
  • भाजपा जो हमेशा निष्पक्ष और पारदर्शी पार्टी बनने का ढूंढ करती है वहीं भाजपा जब आरक्षण की बात आती है तो उसको स्वर्ण समाज में ही खामियां दिखाई देती है।

प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने सरकार से आरक्षण को लेकर कुछ विशेष मांग की जिसमें उन्होंने आरक्षण को हमेशा के लिए खत्म करने की वजह कुछ बातों का सुधार करने को कहा

  • प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आरक्षण उसी को मिलना चाहिए जो आर्थिक रूप से कमजोर है जिसके पास किसी भी प्रकार का कोई संसाधन नहीं है।
  • सरकार आरक्षण को खत्म नहीं कर सकती लेकिन उसमें बदलाव जरूर ला सकती है जिससे स्वर्ण समाज को भी बराबर का हक मिल सके
  • आरक्षण में स्वर्ण समाज के लोगों को भी उतना ही हक मिलना चाहिए जितना की एक विशेष समुदाय के लोगों को मिलता है।
  • सरकार का दोहरा चरित्र केवल न्यूनतम कास्ट के लोगों के साथ ही रहता है और स्वर्ण समाज हमेशा से इनको उग्र और लोगों पर अत्याचार करता हुआ ही दिखता है।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने केंद्र सरकार से बात करते हुए और सवाल करते हुए कहा कि अगर सरकार को लगता है कि आरक्षण देने से एक विशेष समुदाय को स्वर्ण समाज से सुरक्षा मिल सकती है तो सरकार को आरक्षण हर जगह पर देनी होगी

जंतर-मंतर सी लोगों को पुलिस हिरासत में लिया गया

जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पुलिस ने पहले तो अनुमति नहीं दी लेकिन बाद में जब अनुमति दिया भी तो दिल्ली पुलिस का कहना था कि रामलीला मैदान में अधिकतम से अधिकतम 500 लोग जाकर इस आंदोलन में हिस्सा ले सकते हैं और वह भी चंद्र घंटे के लिए जिसके बाद से फिर से इनको अपने घर वापस जाना पड़ेगा

लेकिन भारी संख्या में लोगों ने पहले ही जंतर मंतर की तरफ अपनी चढ़ाई जारी करते हुए कहा कि हमें ना तो किसी के साथ गाली गलोज करना है, और नहीं किसी के साथ किसी भी प्रकार का मारपीट करना है हमें बस शांतिपूर्वक सरकार से कुछ सवालों का जवाब मांगना है जो कि हम स्वर्ण सामाज के साथ हमेशा से अत्याचार के रूप में पेश किया गया है।

प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस आंदोलन कर रहे लोगों के ऊपर अपना व्यवहार प्रकट करते हुए लाठी चार्ज करना शुरू कर दिया कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आंदोलनकारी के ऊपर न केवल लाठी चार्ज किया गया बल्कि उनको पुलिस हिरासत में लेकर आंदोलन स्थान से दूर भी ले जाया गया

कुछ रिपोर्ट के अनुसार लगभग 50 लोगों को पुलिस ने अपने हिरासत में लिया और कई लोगों को जबरन प्रदर्शन से उठाकर बस में बैठ कर आंदोलन वाले जगह से कोई दूर ले जाकर छोड़ दिया

UGC नियमों को लेकर भी नाराजगी

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में सिर्फ आरक्षण का मुद्दा ही नहीं बल्कि विश्वविद्यालयों से जुड़े कुछ UGC नियमों को लेकर भी नाराजगी की बात सामने आई। Live Hindustan की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के बीच 2026 के UGC के समानता संबंधी नियमों को लेकर भी सवाल उठाए गए।

प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने आशंका जताई कि कुछ प्रावधानों का गलत इस्तेमाल हो सकता है और इन्हें वापस लेने की मांग की। हालांकि, इन नियमों और उनके प्रभाव को लेकर अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग राय है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और संबंधित संस्थानों की जानकारी देखना जरूरी है।

आरक्षण पर बहस क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत में आरक्षण को लेकर लंबे समय से अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं। एक पक्ष का मानना है कि सामाजिक और ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करने के लिए आरक्षण जरूरी है। वहीं दूसरा पक्ष आर्थिक स्थिति और समान अवसर को आरक्षण नीति में अधिक महत्व देने की मांग करता रहा है।

इसी वजह से आरक्षण का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक, शैक्षणिक और संवैधानिक विषय भी है। इस पर चर्चा करते समय किसी भी समुदाय के खिलाफ अपमानजनक भाषा या भेदभाव से बचना जरूरी है। एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग विचार रखने वाले लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है। साथ ही प्रदर्शनकारियों और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा बनी रहे।

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अंततः

जंतर मंतर पर आंदोलन कर रहे लोगों का सरकार से मांग है कि आरक्षण को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता लेकिन इसमें बदलाव जरूर लाया जा सकता है जहां पर किसी के धर्म और जाति को देखकर आरक्षण ना मिले बल्कि आरक्षण उन लोगों को दिया जाए जो इसके हकदार हैं। आरक्षण उन लोगों को मिलना चाहिए जिनके पास कोई संसाधन नहीं है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या फिर जो अपंग है।

आरक्षण उनको नहीं मिलना चाहिए जो न्यूनतम कास्ट में होकर भी राजशाही का जिंदगी जीते हैं लेकिन आरक्षण के दम पर हर वह काम कर लेते हैं जो एक गरीब स्वर्ण समाज का बच्चा नहीं कर पता है। शिक्षा का नीति बदलने चाहिए लेकिन किसी विशेष समुदाय के आधार पर नहीं बल्कि उसे आधार पर जहां पर शिक्षा का अधिकार बराबर का हो

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