The Ashirvad के द्वारा प्रस्तुत:
नई दिल्ली: पहलगाम अटैक के बाद से आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए ऑपरेशन सिंदूर जो चलाया गया था वह अब तक का भारत के इतिहास में एक अनोखा सैया अभियान था जिसमें बिना किसी को भनक लगे हुए भारत के वीर सैनिकों ने जिसमें वायु सेवा की अहम भूमिका थी बिना किसी को पता लगे दुश्मनों के 100 से अधिक ठिकानों को रातों-रात ध्वस्त कर दिया और कई आतंकवादियों को मार कर देर कर दिया
यह ऑपरेशन उन मांओं को समर्पित किया गया जीन माता और बहनों का सिंदूर मिटा दिया गया ऑपरेशन सिंदूर न केवल एक आतंकी हमला कारों को जवाब देना था बल्कि उनको यह भी बताना था कि भारत के वीर अपनी मां बहन और अपने देशवासियों की रक्षा करने के लिए अपने जान की कुर्बानी तक देने के लिए तनिक क्षण भी नहीं सोचते हैं।
हालांकि अब एक साल बाद जब सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह सैनिकों के नाम आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक किए और उन्हें राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के रोल ऑफ ऑनर में शामिल किया, तो पूरे देश में एक नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई। और अब लोग भारत की रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर आरोप लगाते हुए कह रहे हैं कि राजनाथ सिंह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संसद में खड़े होकर इन्होंने अपने भाषणों में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर को सफलता पूर्वक अंजाम देने के बाद भी हमारे सैनिक पूरी तरह सुरक्षित हैं
और मुझे यह बताते हुए बहुत ही गर्व हो रहा है कि हमारे सैनिक दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिए हैं और सुरक्षित अपने वतन वापस आए हैं ऑपरेशन सिंदूर को सफल बनाने में हमारे सैनिकों ने अपनी पूरी वीरता और पराक्रम का झलक प्रकट किया है इसमें हमारे एक भी सैनिक को कोई भी क्षति नहीं हुई है और ना ही हमारे किसी सैनिक को किसी भी प्रकार से कोई भी छूने की दुस्साहस किया है।
हालांकि 1 साल बाद जब उन 6 सैनिकों के नाम सामने लाया गया तब इसको लेकर राजनीतिक चर्चा काफी तेज हो गई है और अब पूरे लोगों का और राजनेताओं का सरकार से और खासकर भारत की रक्षा मंत्री से एक ही सवाल है कि जब एक साल पहले ऑपरेशन सिंदूर में साफ तौर पर संसद में खड़े होकर राजनाथ सिंह अपने ऊंचे स्वर में प्रशंसा करते हुए कहे थे कि हमारे एक भी सैनिकों को कोई भी क्षति नहीं हुई है और हमारे पूरे सैनिक सही सलामत ऑपरेशन सिंदूर को सफल बनाने में कामयाब हुए हैं
तू अचानक लगभग 13 महीने बाद उन 6 सैनिकों का नाम क्यों बताया जा रहा है जो ऑपरेशन सिंदूर में वीरगति को प्राप्त हो गए ऑपरेशन सिंदूर के समय जब इन सैनिकों की जान चली गई तब उसे समय हमारे देश की सरकार और रक्षा मंत्री इस बात को क्यों छुपा कर रखें उन्होंने क्यों इस समय जनता से नहीं बताया कि ऑपरेशन सिंदूर को सफल बनाने के लिए और दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने में हमारे 6 सैनिक हंसते-हंसते मौत को गले लगा लिए हैं।
आखिर क्या है विवाद का कारण?
ऑपरेशन सिंदूर के 13 महीने बाद जब उनसे सैनिकों के नाम उजागर किए गए जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने जान गवा दिए हैं तब पूरे सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि आखिर राजनाथ सिंह ऑपरेशन सिंदूर के समय संसद में खड़े होकर यह बात क्यों बोले थे कि हमारे एक भी सैनिक ऑपरेशन सिंदूर में अपना जान नहीं गवाई हैं और मुझे गर्व हो रहा है यह कहते हुए कि हमारे वीर बहादुर सैनिक ऑपरेशन सिंदूर को सफल बनाने में कामयाब हुए हैं।
ऐसे में 13 महीने बाद राजनाथ सिंह और भारत सरकार उन 6 सैनिकों के नाम क्यों अब जाकर बता रही है जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने जान गवा दिए हैं। आखिर इतने दिन छुपा कर उन सैनिकों के नाम क्यों रखा गया, इसके पीछे सरकार की क्या राजनीति थी इसका जवाब हमें सरकार से चाहिए सरकार बताएं कि आखिर क्या वजह थी कि इतने दिन उन सैनिकों के नाम पूरे भारत की जनता से छुपा कर रखा गया।
वही विपक्ष ने राजनाथ सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि संसद में ऊंचे सैनिकों के तस्वीर क्यों उजागर नहीं किए गए जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में अपने जान गवा दिए विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर में गवाई हुए सैनिकों के जान पर सरकार से कहा कि इस पर हमें स्पष्टीकरण चाहिए कि आखिर इतने दिन तक इन सैनिकों के नाम क्यों छुपा कर रखा गया आखिर सरकार के पास क्या वजह थी कि उन सैनिकों के नाम नहीं बताए गए
सरकार ने स्पष्ट किया?
विवाद बढ़ने के बाद रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि रक्षा मंत्री के भाषण को संदर्भ से काटकर पेश किया गया है, सरकार ने अपनी बातों को स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने कभी ऐसा नहीं कहा कि पूरी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी सैनिकों को कोई भी क्षति नहीं हुई बल्कि उन्होंने तो केवल वायु सेवा के पराक्रम को और उनके ताकत को पूरे लोगों के सामने प्रस्तुत किया
मंत्रालय ने यह भी कहा कि ऑपरेशन के बाद सैन्य अधिकारियों ने प्रेस ब्रीफिंग में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी थी और उनकी शहादत कभी छिपाई नहीं गई। बल्कि राजनाथ सिंह ने केवल उन पायलटो के बारे में बताया था जिनके बारे में अफवाह फैलाई जा रहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन पायलटो के साथ इतनी बड़ी दुर्घटना हो गई हालांकि सरकार ने उन सैनिकों को पहले ही लोगों के सामने उजागर कर दिया था जो इस ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए
राजनाथ सिंह अपने पद से इस्तीफा दें
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राजनाथ सिंह के द्वारा कहे गए कथित बयान को लेकर अब पुरे सोशल मीडिया पर हलचल मच चुकी है यहां तक की विपक्ष नेताओं ने भी राजनाथ सिंह पर सैनिकों के नाम छुपाना और झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा है कि राजनाथ सिंह को अपने पद से इस्तीफा देना होगा क्योंकि उन्होंने उन 6 सैनिकों के नाम औपचारिक रूप से उजागर नहीं किया उन्होंने उन वीर सैनिकों के नाम छुपा कर रखा जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए
विपक्ष का कहना है कि सरकार जानबूझकर उन सैनिकों के नाम सब लोगों से छुपा कर रखा ताकि वह ऑपरेशन सिंदूर को सबके नजर में सफल बना सके और दिखा सके कि हमारे बिना एक भी सैनिक की जान जाए बगैर हमने दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दे दिया है हालांकि अगर अब जाकर सरकार उन सैनिकों के नाम उजागर की है तो यह उन सैनिकों के अपमान है जिन्होंने अपना जान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान गवा दिए
अंततः
ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीदों के नाम सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि उसके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। हालांकि इसी बीच लोगों ने भी अपनी नाराजगी सरकार से जताते हुए कहा है कि यह उन वीर सैनिकों का अपमान है जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को सफल बनाने के लिए अपने जान की बाजी लगा दी है।
लोगों का और विपक्ष का कहना है कि सरकार को इस समय स्पष्ट कर देना चाहिए था कि कितने सैनिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी जान गवा दिए और कितने सैनिकों को क्षति पहुंची हालांकि सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया और सबके नाम छुपा कर रखा, जो की सरकार की कमजोरी को दर्शाता है। विपक्ष का कहना है कि इस पर सरकार को स्पष्टीकरण देना होगा और इसके पीछे की वजह पूरे लोगों से बतानी होगी।
DISCLAIMER: यह पोस्ट सार्वजनिक रूप से आदर्श गए न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार तैयार किया गया है और सरकार के कथित बयान पर इस पूरे पोस्ट को लिखा गया है जिसमें सरकार का जवाब विपक्ष का जवाब और सोशल मीडिया पर चल रहे बवाल को लेकर है इसमें जितने भी शब्दों का प्रयोग किया गया है वह पूरे सम्मान और स्पष्ट के साथ दर्शाया गया है इससे किसी को भी कोई भी क्षति पहुंचाना और उनके भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मकसद नहीं है।
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