बिहार: बिहार में महिला सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में नाबालिक बच्चियों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी का कई वीडियो और खबर सामने आई है। जमुई में नाबालिक छात्रा के साथ हुई बदसलूकी के के बाद समस्तीपुर से भी नाबालिक के साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है।
ऐसे में अब बिहार सरकार और उनके महिलाओं के प्रति सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल खड़ी किया जा रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जो अपने बयान में आए दिन कहा करते हैं कि बिहार में यदि कोई महिलाओं को और नाबालिक बच्चियों को छूने का या उनके साथ बदसलूकी की करने का कोशिश करता है तो उसका अंजाम बहुत ही बुरा होगा
इसके पहले सम्राट चौधरी ने एक और बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि आप रात का खाना अपने घर से खाकर बाहर निकलिए और गांव घूम कर आइए अगर आपको कहीं भी अस्हेज महसूस होता है। या आपको कहीं भी किसी भी प्रकार से छेड़छाड़ या आपके साथ बदसलूकी किया जाता है तो मैं सम्राट चौधरी अगले सुबह मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दूंगा।
अब जमुई नाबालिक छात्र के साथ हुई बदसलूकी के बाद मुख्यमंत्री Samrat Chaudhary का यह बयान काफी तेजी से सोशल मीडिया पर फैलने लगा। अभी इस पर मुख्यमंत्री का कोई बयान या कोई सफाई आता उससे पहले ही समस्तीपुर में एक और ऐसी ही नाबालिक बच्ची के साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी का खबर सामने आया। इसके बाद पूरे राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और सरकार की ओर से महिलाओं को लेकर किए गए वादों पर लोगों ने सवाल करना शुरू कर दिया।
समस्तीपुर की घटना पर सरकार से सवाल
जमुई की घटना 19 सितंबर 2026 की बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, दो नाबालिग छात्र-छात्रा को रास्ते में कुछ युवकों ने रोका था। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और POCSO सहित संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बाकी आरोपियों की तलाश जारी रहने की बात कही है।
लेकिन इसके बाद समस्तीपुर के कर्पूरी ग्राम इलाके से एक दूसरा मामला सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक, एक लड़की को कुछ युवकों ने कथित तौर पर रोका और उसके साथ बदसलूकी की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।
लेकिन इसके बावजूद बिहार में सबसे बड़ा सवाल यही लोगों के द्वारा उठाए जा रहा है कि लगातार ऐसी घटना सामने आने के बाद सरकार महिलाओं की सुरक्षा और बच्चियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जो डंके की चोट पर कभी यह कहा करते थे कि हमारे रहते हुए कोई भी आरोपी किसी भी महिला और बच्ची के ऊपर आंख उठाकर भी नहीं देख सकता। तो ऐसे में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के रहते हुए ऐसी लगातार दो घटनाएं सामने कैसे आ गई।
बिहार सरकार की प्रतिक्रिया
इन दोनों घटना के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का और बिहार के कई राजनेता का बयान सामने आया मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बच्चियों की और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक भीड़ को संबोधित करते हुए काहे की जितने भी अपराधी हैं उनको में साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि तुम हमारे पुलिसकर्मियों को चैलेंज क्यों करते हो अगर तुम हमारे पुलिसकर्मियों को चलेंगे करोगे तो 24 घंटे के भीतर उसका जवाब तुमको दे दिया जाएगा
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मैं अपराधी उससे साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि तुम भी आराम से जीने की कोशिश करो और सुधारने की कोशिश करो वरना गलती करोगे तो मैं अपने पुलिसकर्मियों को पूरी इजाजत दे रखी है कि उसका जवाब तुमको वही दे दिया जाएगा क्योंकि महिलाओं की सुरक्षा और बच्चियों के साथ बदसलूकी करने वाले को हमारी सरकार बकसने का कार्य नहीं करेगी
हालांकि इसी बीच जदयू के एक विधायक ने अपने बयान में यह कहा कि यह घटना जो जमुई में हुई है वह छिटपुट घटना है। इससे पहले 2005 से पहले जो सरकार थी उसमें इससे भी बड़ी घटनाएं होती थी जिनके सामने यह घटना कुछ भी नहीं है। इस बयान के बाद लोगों के अंदर काफी आक्रोश भर गया लोगों ने यह सवाल करना शुरू कर दिया कि 2005 से पहले जो सरकार थी उसमें क्या हुआ और क्या नहीं हुआ उसको देखने की बजाय अगर सरकार महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान दें तो भविष्य में ऐसी घटना देखने को नहीं मिलेगी
समस्तीपुर और जमुई घटना के बाद सरकार को क्या कदम उठाना चाहिए ?
समस्तीपुर और जमुई में हुए नाबालिक बच्चियों के साथ छेड़छाड़ और बदसलू की का जो घटना सामने आया है उसे साफ पता चलता है कि बिहार सरकार इस मामले में कहीं ना कहीं चूक कर रही है जिससे महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा दिन पर दिन नाजुक होता जा रहा है।
ऐसे में सरकार को केवल भाषणों के द्वारा सुरक्षा का बात करने की बजाय उसे जमीनी स्तर पर दिखाना और उसकी शक्ति से पेश करना अति आवश्यक है। बिहार सरकार महिला सुरक्षा को लेकर और भी कड़े और नए कानून की व्यवस्था और मजबूती से इसको जमीनी स्तर पर लाने की प्रयास में जुट जाना चाहिए।
महिला सुरक्षा सिर्फ घटना होने के बाद कार्रवाई करने का विषय नहीं है। इसमें अपराध को रोकना, संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मौजूदगी, शिकायत पर तेजी से कार्रवाई, पीड़ित को सहायता और आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई इन सभी पहलुओं की भूमिका होती है।
केंद्र सरकार भी महिला सुरक्षा और संरक्षण के लिए Mission Shakti जैसी योजनाएं चला रही है। हालांकि कानून-व्यवस्था और पुलिस मुख्य रूप से राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।
इसलिए बिहार में महिला सुरक्षा को लेकर अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि उपलब्ध हेल्पलाइन और पुलिस व्यवस्था का इस्तेमाल कितनी तेजी से होता है और शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई कितनी प्रभावी रहती है।
अंततः
जमुई और समस्तीपुर के घटना के बाद बिहार सरकार के पास अब महिला सुरक्षा को लेकर नई चुनौती उत्पन्न हो गया है। ऐसे में सरकार को मंचों से बड़े-बड़े भाषण देने की बजाय इन घटना पर शक्ति से पेश आने की जरूरत है। और महिला सुरक्षा को लेकर और जागरूक होने की जरूरत है।
केंद्र और राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर कई बड़े और अहम कदम उठाए जाते हैं लेकिन यह कदम जमीनी स्तर पर कितना उपयोगी होता है वह देखना राज्य सरकार का जिम्मेदारी है ऐसे में राज्य सरकार किया कर्तव्य बनता है कि वह महिला सुरक्षा को लेकर और भी ज्यादा और पहले से मजबूती से कार्य करें साथ में घटना के तुरंत बाद निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करते हुए दोषियों को सजा देने की काम में जुट जाएं।
नोट: इस खबर में नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर नहीं की गई है। मामले की जांच जारी होने की स्थिति में आगे की जानकारी पुलिस और आधिकारिक स्रोतों के आधार पर ही अपडेट की जानी चाहिए।
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