नई दिल्ली: 4 अक्टूबर को दिल्ली और मुंबई में फिर से एक बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है कॉकरोच जनता पार्टी और विपक्ष के द्वारा भाजपा और इलेक्शन कमीशन के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। विरुद्ध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य है चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेना
मतदाता सूची में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। ज्ञानेश कुमार के ऊपर मतदान सूची से नाम काटना और मनमानी तरीके से नाम जोड़ने का आरोप लगाया गया है। साथ में भाजपा को कई राज्यों में चुनाव गड़बड़ी कर के जीतने का भी आरोप है और इन्हीं कर्म से पूरा विपक्ष प्रदर्शन कर रहा है ताकि चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लिया जा सके
विरोध प्रदर्शन का क्या है पूरा मामला?
दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों से बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। साथ में विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि कई जगहों पर ज्ञानेश कुमार भाजपा को चुनाव जीतने के लिए चुनाव में गड़बड़ी कर रहे हैं।
विपक्ष के द्वारा लगाए गए इस आरोप के बाद दिल्ली और मुंबई में विरोध प्रदर्शन का हड़कंप देखने को मिला है। जहां पर कॉकरोच जनता पार्टी के साथ पूरा विपक्ष दल इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर ज्ञानेश कुमार की इस्तीफा का मांग कर रहा है। और ज्ञानेश कुमार के अगुवाई में जहां-जहां पर भी चुनाव हुए हैं वहां पर दोबारा चुनाव कराने का भी मांग किया जा रहा है।
विपक्षी नेता राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के ऊपर निशाना साधते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार भाजपा के कठपुतली हैं और भाजपा को चुनाव जीतने के लिए मतदान सूची में छेड़छाड़ कर रहे हैं मनमानी तरीके से नाम काटकर अपने हिसाब से नाम जोड़ने का बेहतरीन काम ज्ञानेश कुमार ने किया है।
ज्ञानेश कुमार भाजपा को न केवल चुनाव जीता रहे हैं बल्कि चुनाव के साथ-साथ भारत के संविधान और डेमोक्रेसी का भी मजाक बना रहे हैं चुनाव आयोग के काम होता है निष्पक्ष तरीके से चुनाव करना लेकिन ज्ञानेश कुमार इन सारी बातों को भूलकर केवल भाजपा को जिताने में लगे हैं।
ज्ञानेश कुमार का चाहिए इस्तीफा
The Indian Express का जब से रिपोर्ट पब्लिक हुआ है जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्त डॉ सुखबीर सिंह संधू और दूसरे चुनाव आयुक्त डॉ विवेक जोशी इन दोनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 14 बार पत्र लिखा जिसमें उन्होंने उनके द्वारा किए जा रहे चुनाव में गड़बड़ी को लेकर विरोध करना था।
The Indian Express: के रिपोर्ट में बताया कि एक दिन में इन दोनों चुनाव आयुक्त ने चार-चार बार पत्र लिखकर किए जा रहे मतदान सूची में गड़बड़ी का विरोध किया। और इस रिपोर्ट को पब्लिक होने के बाद पूरे भारत में हड़कंप मच गया विपक्ष जो पहले से ही भाजपा पर वोट चोरी का निशान साथ रहा था उसको यह मौका मिल गया कि भाजपा ज्ञानेश कुमार के कंधे पर बंदूक रखकर कैसे निशाना साध रही है।
इस रिपोर्ट को पब्लिक होते ही विपक्ष और कुछ राजनीतिक पार्टियों मिलकर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेने का विरोध प्रदर्शन जारी कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन में लगातार भाजपा पर निशाना सदा गया और ज्ञानेश कुमार के ऊपर बोर्ड चोरी और मतदान सूची में घपलबाजी करने का आरोप लगाया गया
और इसी वजह से ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेने के लिए दिल्ली और मुंबई जैसे बड़ी शहरों में विरोध प्रदर्शन निकाला गया जहां पर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेना और साथ में उनकी अगुवाई में किए गए चुनाव को फिर से दोबारा करने का भी मांग किया गया। हालांकि इसी बीच ज्ञानेश कुमार के ऊपर लगाए गए कुछ तथ्य गलत साबित होता हुआ भी दिख
ज्ञानेश कुमार ने 15 मार्च 2024 को भारत के चुनाव आयुक्त (Election Commissioner) के रूप में कार्यभार संभाला था। इसके बाद, उन्होंने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) का पदभार ग्रहण किया। हालांकि दिल्ली में इलेक्शन उनके पद ग्रहण करने से पहले हो चुका था ऐसे में दिल्ली के चुनाव में घपला बाजी का इल्जाम भाजपा और ज्ञानेश कुमार पर लगाना यह पहले ही खारिज हो गया।
दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्य प्रदेश विपक्षी दलों द्वारा इन राज्यों में भी ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान कराए गए चुनावों पर सवाल उठाए गए हैं और इन्हें रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की मांग की गई है। हालांकि इन राज्यों में ज्ञानेश कुमार के पद ग्रहण करने से पहले ही चुनाव हो चुका था ऐसे में इनके ऊपर इन राज्यों में चुनाव का घपला बाजी का आरोप लगाना के पहले ही खारिज हो चुका है।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष समीक्षा की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलत या अपात्र प्रविष्टियों को हटाना बताया गया है।
विपक्ष और कुछ प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी बदलाव की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
दूसरी तरफ चुनाव आयोग और सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को मतदाता सूची को बेहतर बनाने के लिए जरूरी बता रहे हैं।
मुंबई में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे साथ आए
मुंबई में हो रहे ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जिसमें उनके इस्तीफा की मांग किया जा रहा है, इस आंदोलन को और मजबूत करने के लिए राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का भी पूरा समर्थन देखने को मिला उन्होंने भीड़ में स्टेज को संभालते हुए भाजपा और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा का मांग किया
इस प्रदर्शन को ‘विराट गर्जना मोर्चा’ नाम दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्ति जताई। खास बात यह रही कि मार्च में पार्टी के झंडों के बजाय राष्ट्रीय ध्वज को प्राथमिकता दी गई।
राज ठाकरे ने मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी रखी। वहीं उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
विपक्ष ने आगे के प्रदर्शन का भी ऐलान किया
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का आंदोलन अब केवल दिल्ली और मुंबई तक सीमित नहीं रहने वाला है। विपक्षी दलों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। राहुल गांधी ने ऐलान किया कि अलग-अलग जगह पर चल रहे इस आंदोलन को एक जुट होकर एक साथ में आवाज उठाने की जरूरत है। जिसके लिए उन्होंने एक वेबसाइट का भी आयोजन बनाया है।
रिपोर्टों के मुताबिक INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर भी संयुक्त प्रदर्शन की योजना बनाई है। इसके अलावा विपक्षी सांसदों के चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च करने की भी योजना सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई
CEC ज्ञानेश कुमार और SIR से जुड़े विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं पहुंची हैं। 5 अक्टूबर को इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई होने की रिपोर्ट सामने आई है।याचिकाकर्ताओं की ओर से चुनाव आयोग की कुछ प्रक्रियाओं और फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई के बाद यह साफ होगा कि अदालत इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाती है।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन अब धीरे-धीरे एक बड़ा प्रदर्शन का रूप ले रहा है। जहां पर केवल ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा का बात नहीं हो रहा बल्कि प्रधानमंत्री, गृह मंत्री के इस्तीफा को लेकर भी कई जगहों पर टिप्पणियां की गई
हो सकता है बड़ी कार्रवाई
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी और विपक्ष नेताओं ने ऐलान किया कि अगर भाजपा इस विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस के द्वारा लाठी चार्ज कर आती है तो हम ज्ञानेश कुमार से पहले प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा का ऐलान करेंगे क्योंकि 25 जुलाई को इन्होंने दिल्ली में छात्रों के ऊपर लाठी चार्ज करवा कर यह दिखा दिया कि सरकार सवाल और इस्तीफा से कितना डरती है।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपक ने गृह मंत्री अमित शाह पर टिप्पणी करते हुए कहा हम मोटा भाई से कहना चाहते हैं, कि आप दोबारा लाठी चार्ज करवाने के बारे में सोचना भी मत क्योंकि आपने पहले ही दिल्ली में एक बार यह गलती कर चुके हैं ऐसे में अगर दोबारा यह गलती दोहराने की कोशिश करते हैं तो हम सीधे आपका इस्तीफा का मांग करेंगे
अंततः
ज्ञानेश कुमार के ऊपर जब से मतदान सूची से मनमानी करके नाम काटना और अपने मनमानी तरीके से नाम जोड़ने का आरोप लगा है तब से उनके खिलाफ मुंबई और दिल्ली में बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है।
हलक इस विरोध प्रदर्शन के बीच इलेक्शन कमीशन ने इस बात पर सफाई देते हुए कहा कि तीनों इलेक्शन कमिशन की सहमति से ही हर कार्य किया जा रहा है ऐसे में ज्ञानेश कुमार के ऊपर जो आरोप लगाया गया है वह बिल्कुल ही गलत है इस पर ना तो दोनों इलेक्शन कमीशन ने कभी आपत्ति जताई थी और ना ही ऐसा कोई आरोप लगाया था।
हालांकि अब देखना यह है कि ज्ञानेश कुमार के ऊपर लगाए गए आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से क्या बात निकाल कर सामने आता है यह आरोप सही साबित होंगे या गलत साबित होंगे यह तो सुप्रीम कोर्ट के फैसला आने के बाद ही स्पष्ट होगा
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