पश्चिम बंगाल उपचुनाव: पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम में होने वाला उपचुनाव लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। नंदीग्राम में हो रहे उपचुनाव में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनको देखकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। ममता बनर्जी जो नंदीग्राम में वापसी करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है वहीं दूसरी ओर इनके समर्थन देने के कुछ घंटे बाद ही मिलन प्रधान को पुलिस ने हिरासत में भी ले लिया है।
नंदीग्राम में उपचुनाव को लेकर अभी काफी गर्म माहौल है। नंदीग्राम से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी जीत हासिल किए थे। हालांकि इन्होंने नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर सीट से भी जीता था। ऐसे में इनको किसी एक सीट को छोड़कर एक सीट पर कायम होना पड़ा जिस वजह से सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट को छोड़कर भवानीपुर सीट से कमान संभाल
ऐसे में अब नंदीग्राम का सीट खाली है जिस वजह से उपचुनाव करने का प्रस्ताव आ चुका है। जिसके बाद कई पार्टी अपने-अपने उम्मीदवार को नंदीग्राम सीट से खड़ा कर दिया है हालांकि इसमें कांग्रेस के उम्मीदवार को लेकर काफी ज्यादा चर्चा चल रही है।
नंदीग्राम उपचुनाव क्यों है चर्चा में?
नंदीग्राम सीट 2026 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने जीती थी। उन्होंने नंदीग्राम के साथ भबानीपुर सीट से भी चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़कर भबानीपुर सीट को बरकरार रखा। इसी वजह से नंदीग्राम विधानसभा सीट खाली हुई और यहां उपचुनाव की जरूरत पड़ी।
नंदीग्राम बंगाल की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण सीट रही है। 2007 के भूमि अधिग्रहण आंदोलन ने इस इलाके को राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा में ला दिया था। इसके बाद नंदीग्राम ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी की राजनीति से भी लगातार जुड़ा रहा है।
चुनावी मैदान में पहले कौन-कौन था?
- उपचुनाव की शुरुआत में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने संचिता प्रधान डे को नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाया था।
- कांग्रेस ने मिलन प्रधान को मैदान में उतारा।
- इसके अलावा CPI ने शांतिगोपाल गिरी को नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाया है।
- बीजेपी ने हसीरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया। हसीरानी रथ, सुवेंदु अधिकारी के दिवंगत सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मां हैं।
- दूसरे TMC गुट ने मोहम्मद एतेशामुल हक को उम्मीदवार बनाया।
चुनाव से पहले TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर विवाद
नंदीग्राम उपचुनाव से पहले टीएमसी के अंदर चल रहे राजनीतिक मतभेद ने पहले ही इस उप चुनाव में खलबली मचा दी थी। टीएमसी के अंदर 2026 विधानसभा चुनाव के बाद दो दल बन गया और दोनों ही दल ने एक दूसरे दलों को फर्जी और खुद को असली टीएमसी बताने लगा
हालांकि जब तक उपचुनाव में यह क्लियर नहीं हो जाता की कौन सी पार्टी असली टीएमसी है तो ऐसे में यह नंदीग्राम से चुनाव कैसे लड़ सकते थे। इसी विवाद पर चुनाव आयोग ने दोनों ही दलों को साफ तौर पर कह दिया कि दोनों ही दल All India Trinamool Congress का नाम और पारंपरिक जो चुनाव चिन्ह है वह उपयोग में नहीं लेंगे दोनों ही दलों को नाम और चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने पर चुनाव आयोग ने रोक लगा दिया
और दोनों ही दलों को नंदीग्राम उपचुनाव के लिए अलग नाम और अलग चुनाव चिन्ह लेने के लिए कहा गया जिसके बाद यह लोग अपने उम्मीदवार को इस उपचुनाव में खड़ा कर सकते हैं। और इसी के बाद नंदीग्राम उपचुनाव में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला
ममता गुट की उम्मीदवार ने नाम वापस लिया
18 सितंबर को ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नंदीग्राम उपचुनाव से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। ममता की उम्मीदवार ने नाम वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि वह कांग्रेस की उम्मीदवार को समर्थन देंगी। ममता बनर्जी ने कहा कि उनका गुट नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देगा और इसे उन्होंने विपक्षी एकता के संदर्भ में बताया।
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी से बढ़ा विवाद
ममता बनर्जी की समर्थन देने का ऐलान करने के कुछ घंटे बाद ही मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गिरफ्तारी पर पुलिस की ओर से बताया गया कि उनके खिलाफ लंबित वारंट से जुड़ी कार्रवाई की गई। The Indian EXPRESS के एक रिपोर्टों के मुताबिक: विपक्ष को एक बड़ा झटका लगा जब कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के एक हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया गया, उसी साल नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण को लेकर आंदोलन हुआ था।
कांग्रेस और ममता बनर्जी के गुट ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए हैं और इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया है। दूसरी तरफ बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पुलिस अपनी कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर रही है। इन आरोपों और जवाबी आरोपों को राजनीतिक दलों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अब नंदीग्राम में मुकाबला में कौन-कौन है?
ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार के नाम वापस लेने और कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने के बाद नंदीग्राम का चुनावी समीकरण बदल गया है। फिलहाल मिलन प्रधान को नाम वापस लेना या चुनाव आयोग से उनके नाम को खारिज करने का कोई भी ऐसा मामला सामने नहीं आया है ऐसे में अभी की स्थिति में नंदीग्राम में उम्मीदवार का नाम देखा जाए तो
बीजेपी की हसीरानी रथ, कांग्रेस के मिलन प्रधान, CPI के शांतिगोपाल गिरी और दूसरे TMC गुट के मोहम्मद एतेशामुल हक शामिल हैं। हालांकि मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद उनकी उम्मीदवारी की स्थिति पर अंतिम चुनावी स्थिति को चुनावी अधिकारियों की ओर से देखना महत्वपूर्ण होगा।
नंदीग्राम मतदान तारीख
नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में 6 अक्टूबर 2026 को वोट डाले जाएंगे। वोटों की गिनती: 9 अक्टूबर 2026 चुनाव प्रक्रिया 11 अक्टूबर 2026 तक पूरी होनी है। मतदान में EVM और VVPAT का इस्तेमाल किया जाएगा।
अंततः
नंदीग्राम सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं है। 2007 के भूमि अधिग्रहण आंदोलन से लेकर 2021 में ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच हुए हाई-प्रोफाइल मुकाबले तक, यह सीट बंगाल की राजनीति में लगातार चर्चा का केंद्र रही है।
सुवेंदु अधिकारी जो अभी मुख्यमंत्री के पद पर कार्यभार संभाला रहे हैं वो नंदीग्राम से ममता बनर्जी को बुरी तरह हराकर जीत हासिल किया था। जिसके बाद उन्होंने इस सीट को छोड़कर भवानीपुर सीट से अपना दायित्व कायम रखा और इस पर उपचुनाव का माहौल बन गया। हालांकि सुवेंदु अधिकारी का आज भी नंदीग्राम में उतना ही चर्चा है ऐसे में लोगों की नजर अब 6 अक्टूबर पर पड़ी हुई है जिस दिन यहां पर मतदान होगा
लोगों का बोलना है कि सुवेंदु अधिकारी जी भी उम्मीदवार को इस इलाके से खड़ा करेंगे उसकी जीत लगभग तय माना जा रहा है। क्योंकि ममता बनर्जी को यहां से पहले ही लोगों ने हराया है। ऐसे में अब देखना होगा कि नंदीग्राम से किसकी पार्टी दोबारा से खड़ी होती है जो इस मैदान को फतह कर अपने विजय का झंडा लहराएगी।
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