ममता बनर्जी का पीएम मोदी पर बड़ा आरोप: देश को गुमराह किया, महिलाओं के नाम पर भाजपा की राजनीति

दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल काफी गर्म है। बीजेपी और त्रिमूल के बीच काफी टकराव चल रहा है, दोनों पक्ष एक दूसरे को पश्चिम..

ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी के बीच महिला आरक्षण और सीमांकन को लेकर राजनीतिक विवाद दिखाता न्यूज़ थंबनेल

दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल काफी गर्म है। बीजेपी और त्रिमूल के बीच काफी टकराव चल रहा है, दोनों पक्ष एक दूसरे को पश्चिम बंगाल से हटाने के लिए काफी प्रयत्न कर रहे हैं और इसी बीच ममता बनर्जी ने पीएम नरेंद्र मोदी और पूरे भाजपा के ऊपर आरोपों का पुल बांध दिया है। ममता बनर्जी का प्रधानमंत्री पर लगाया गया आरोप काफी गंभीर है।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर आरोप लगाया ममता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश को सच्चाई बताने की बजाय उनका गुमराह करने का कार्य कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने साफ कहा कि हमेशा से All India Trinamool Congress महिलाओं के राजनीति का समर्थन रही है और हमेशा से महिलाओं को राजनीति में बढ़ावा देने का कार्य किया है।

महिलाओं की राजनीति में भागीदारी

ममता बनर्जी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में उनकी पार्टी में संसद और राज्य विधानसभा में सबसे ज्यादा महिला प्रतिनिधि हैं।

  • लोकसभा में उनके करीब 37.9% सांसद महिलाएं हैं,
  • जबकि राज्यसभा में यह आंकड़ा 46% तक है।

ममता बनर्जी ने कहा कि वह हमेशा से महिलाओं की पक्ष में रही है और वह हमेशा से महिलाओं को ऊपर उठाने का कार्य किया है उनकी पार्टी हमेशा महिलाओं के हित में ही सोचती है उनकी पार्टी की अधिकतम कार्यकर्ता सांसद महिलाएं ही हैं।

महिला आरक्षण का कोई विरोध नहीं लेकिन डीलिमिटेशन पर रोक

ममता बनर्जी ने क्लियर किया कि उनकी पार्टी या फिर वह महिला आरक्षण बिल 2023 के खिलाफ नहीं है वह हमेशा से उसका समर्थन किया है उनका बोलना है की असली मुद्दा डीलिमिटेशन (सीमांकन) का है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार महिला आरक्षण को एक दल बनाकर उपयोग कर रही है ताकि सीमांकन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। ममता बनर्जी का बोलना है, कि यह एक राजनीतिक फायदा उठाने के लिए कार्य किया जा रहा है ताकि इससे भाजपा खुद को 2029 के चुनाव के लिए और भी मजबूत बना सके।

ममता बनर्जी ने कहा कि उनको आपत्ति नहीं है कि वह महिलाओं के आरक्षण को लेकर आवाज उठा रहे हैं। और महिला आरक्षण बिल 2023 को पास करने की प्रयत्न कर रहे हैं उनको दिक्कत इस बात से है कि इसके आड़ में जो दो बिल जोड़ा गया है उसके खिलाफ हम लोग हमेशा खड़ा रहेंगे।

संविधान के साथ छेड़छाड़।

ममता बनर्जी ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया B. R. Ambedkar के बनाए संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उनका आरोप है कि सीमांकन के जरिए देश के कुछ राज्यों को ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है, जिससे संघीय ढांचे (Federal Structure) को नुकसान पहुंचेगा। ममता बनर्जी का बोलना है कि इस बिल से भाजपा को ज्यादा फायदा होगा।

ममता बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा चाहते हैं कि 2029 के चुनाव से पहले इस नियम को अपने मुताबिक ढांचे में परिवर्तन कर दिया जाए ताकि ज्यादा जनसंख्या वाले जगह पर और जहां उनकी सरकार पहले से ही मौजूद है वहां पर इनका ज्यादा फायदा हो सके और यह 2029 का चुनाव भी आसानी से जीत सके। ‌

ममता बनर्जी का सरकार से सवाल ?

  • ममता बनर्जी ने पूछा कि महिला आरक्षण बिल को पास करने के बाद लागू करने में 3 साल का वक्त क्यों लगेगा?
  • उत्तर – सरकार ने बोला कि वह पहले ही बिल में जोड़ दिया है कि महिला आरक्षण बिल तभी लागू होगा जब डीलिमिटेशन प्रक्रिया पूरा होगा
  • चुनाव के समय ही इसे जल्दबाजी में क्यों लाया जा रहा है?
  • उत्तर – सरकार (Narendra Modi के नेतृत्व में) का कहना है कि, महिला आरक्षण (Women’s Reservation Bill 2023) एक लंबे समय से लंबित सुधार था। इसे पास करना जरूरी था, चाहे चुनाव पास हों या नहीं उनका तर्क है कि यह महिलाओं को सशक्त करने का ऐतिहासिक कदम है, न कि सिर्फ चुनावी रणनीति यानी सरकार इसे “नीति निर्णय” (policy decision) बताती है।

विपक्ष का आरोप

विपक्ष खासकर ममता बनर्जी का कहना है कि इस पॉलिसी को लाकर राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश की जा रही है। ममता बनर्जी ने कहा कि अगर इस्को लागू करने में कोई जल्दी बाजी नहीं है और इसको कोई राजनीतिक ढांचे के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा रहा तो इससे पहले इसको लाने की कोशिश क्यों नहीं की गई।

क्योंकि बिल पास हुआ, लेकिन लागू तुरंत नहीं होगा (Census Delimitation) के बाद इसलिए इसे “इमोशनल इश्यू” बनाकर वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश बताया जा रहा है।

https://svmbharatnews.com/mahila-arakshan-bill-2023-latest-update/

इसे सीमांकन के साथ क्यों जोड़ा गया?

सीमांकन मतलब लोकसभा और विधानसभा सीटों की नई सीमाएं और संख्या तय करना, जो जनसंख्या के आधार पर होती है। इसलिए महिला आरक्षण (Women’s Reservation Bill 2023) में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करनी हैं। लेकिन पहले यह तय होना जरूरी है कि कुल सीटें और उनकी सीमाएं क्या होंगी।

अगर बिना सीमांकन का सीटों का बंटवारा कर दिया जाए तो कुछ जगहों पर बटवारा और सामान्य हो सकता है और जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व गलत हो सकता है।

प्रधानमंत्री पर ममता बनर्जी का सीधा हमला

ममता बनर्जी अपने बयान में बोलती है कि प्रधानमंत्री मोदी को संसद में आकर सारे सवालों का जवाब देना चाहिए अगर वह गलत नहीं है और इस बिल को राजनीतिक मुद्दा बनाकर नहीं ले जाना चाहते हैं। ममता ने कहा कि प्रधानमंत्री अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की बजे सदन में आकर सारे सवालों का जवाब दे दे जिससे यह क्लियर हो जाएगा कि यह बिल महिलाओं के हित के लिए ही है।

अंततः

इन सारे मुद्दों से एक बात पता चलता है कि विपक्ष और ममता बनर्जी महिला आरक्षण बिल 2023 के पक्ष में होने के बाद भी यह लोग डीलिमिटेशन के विरोध में है। विपक्ष का सीधा प्रहार प्रधानमंत्री के द्वारा लाया गया डीलिमिटेशन बिल पर है और विपक्ष बार-बार सफाई दे रहा है कि, वह महिला आरक्षण बिल के विरुद्ध नहीं है।

          — समाप्त —     (The Ashirvad)

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