इस्लामाबाद में 21 घंटे का बातचीत फेल क्या दूसरी बैठक हो सकती है भारत के प्रधानमंत्री के साथ ?

US और Iran के नेताओं के साथ news thumbnail जिसमें “US–IRAN TALKS FAIL” लिखा है और background में explosion दिख रहा है, जो failed peace talks को दर्शाता है।
21 घंटे चली शांति वार्ता… लेकिन कोई समझौता नहीं! क्या अब Middle East में बढ़ेगा तनाव?

दिल्ली: 11 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति संवाद का कोई हल नहीं निकला 21 घंटे लगातार चली मीटिंग के बाद भी इन दोनों देशों के बीच कोई शांति का निवारण नहीं निकला दोनों देश अपने-अपने शर्तों पर अड़े रहे। पाकिस्तान जो इन दोनों देशों के बीच शांति वार्तालाप करने वाला मीडिएटर बना हुआ था उसका हाल बहुत बुरा हो गया है।

पाकिस्तान जो कुछ दिन पहले सीजफायर का ढोल पीट रहा था कि मैं ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर करा दिया और बहुत जल्द इन दोनों के बीच शांति संवाद कराकर मिडिल ईस्ट में हो रहे तनाव को भी खत्म कर दूंगा वह सपना पाकिस्तान का अधूरा रह गया। और अब पाकिस्तान का हाल एक फटे हुए ढोलक की तरह हो गया है, जब मन करता है जिसको वह पाकिस्तान को ठोक के चला जाता है।

लंबी बातचीत लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं

सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के वरिष्ठ पदाधिकारी के बीच बातचीत शुरू हुआ 21 घंटे के लगातार बातचीत के दौरान ऐसे ऐसे मुद्दे उठाए गए जिसको मानने से दोनों देश इनकार कर दिए और यही नतीजा हुआ की 21 घंटे के लगातार बातचीत के बाद भी दोनों देशों के बीच कोई शांति निष्कर्ष नहीं निकला और दोनों ही देश अपने-अपने शर्त पर अड़े रहने के कारण वहां से वापस चले गए।

ईरान और अमेरिका के बीच कई ऐसे अहम मुद्दे रखे गए जिनको मानना दोनों देशों के बस की बात नहीं थी अमेरिका ईरान पर कोई ऐसे मुद्दों को रोकने और उनको सुधारने की बात की जिसको ईरान करने से मना कर दिया। अमेरिका ईरान से न्यूक्लियर कार्यक्रम और हार्मोन जैसे बड़े मुद्दों पर बात किया हालांकि इन मुद्दों पर ईरान का कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला ईरान इन मुद्दों को नकारते हुए अमेरिका से कहा कि उस पर लगने वाले सारे पाबंदियों को हटा दिया जाए और ईरान को उसके न्यूक्लियर कार्यक्रम के लिए रोका न जाए। हालांकि अमेरिका भी ईरान के इन बातों को नहीं माना जिसका नतीजा यह निकला कि इन दोनों देशों के बीच शांति वार्तालाप पर कोई निवारण नहीं निकला।

बातचीत खत्म होने पर दोनों देशों कि ओर से कड़ी प्रतिक्रिया।

बातचीत खत्म होने पर दोनों देशों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका जानबूझकर ईरान के ऊपर ऐसे मुद्दा थोपना चाहता है जो उसके राष्ट्र के हित के खिलाफ है। ईरान ने अमेरिका के इन नियम कानून पर बोला कि अमेरिका चाहता है कि ईरान उसके पाबंदियों में घिरा रहे जो कि ईरान ऐसा कभी नहीं करेगा।

वहीं अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के ऊपर आरोप लगाते हुए कहा कि ईरान अपने अकड़न से बाहर नहीं आया वह अपना रुख व्यवहार प्रस्तुत किया उसके लिए हमने अच्छे प्रस्ताव रखे थे। जिसको ईरान ने ठुकरा दिया वेंस ने कहा कि अभी सीजफायर खत्म होने 10 दिन बाकी है ऐसे में मैं ईरान के लिए एक प्रपोजल रखा हूं जिसको ईरान स्वीकार करता है तो यह एक अहम पहल माना जाएगा।

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भारत में वार्तालाप के लिए दोनों देश राजी

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में जब से इन दोनों देशों के बीच हुए वार्ता पर कोई निवारण नहीं निकला तब अब पूरी दुनिया की नजर बस भारत पर ही टिकी हुई है विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ही एक ऐसा देश है जो इन दोनों देशों के बीच शांति का प्रस्ताव दोनों से स्वीकार करवा सकता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही एक मात्र जरिया है जिनके द्वारा इन दोनों देशों के बीच शांति आ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन दोनों देशों के बीच बातचीत होती है तो यह बातचीत प्रधानमंत्री के लेवल पर होगी जिस वजह से इन दोनों देशों के बीच हल निकालना निश्चित रहेगा। हालांकि अभी तक कोई ऑफिशियल पुष्टिकरण नहीं आई है कि यह दोनों देश भारत को ही मिडीएटर बनाकर बातचीत करना चाहते हैं। ‌

हालांकि ईरान की कुछ ऐसे दावे हैं जिसमें यह पाकिस्तान के ऊपर तनंज कसते हुए दूसरी बैठक के लिए भारत और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ इशारा करता है। ईरान का मानना है कि भारत एक शांति दूत के रूप में बहुत ही जिम्मेदारी पूर्वक भूमिका निभाता है ऐसे में हो सकता है कि दूसरी बैठक भारत के प्रधानमंत्री के बीच हो जिससे इन दोनों देशों को मिडिल ईस्ट में तनाव दूर करने का और दोनों देशों के बीच शांति संवाद करने का जिम्मेदारी भारत पर आए।

क्या दूसरी बैठक संभव है ?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मने तो ईरान और अमेरिका के बीच दूसरी बैठक अवश्य होगा पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई बातचीत को लेकर विशेषज्ञों का बोलना है कि 40 दिन की लगातार युद्ध के बाद इन दोनों देशों के बीच आमने-सामने बैठकर बात करना ही सबसे बड़ी बात है। अगर 40 दिन के लगातार युद्ध के बाद 21 घंटे का बातचीत संभव है तो दूसरा बैठक अवश्य होगा हालांकि विशेषज्ञों का यह भी बोलना है कि यह बैठक सीजफायर खत्म होते-होते नहीं हुआ तो मिडल ईस्ट में तनाव और बढ़ाने की आकांक्षा बढ़ जाएगी।

विशेषज्ञों का बोलना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत तभी संभव होगी और तभी इन दोनों के बातों का कोई हल निकलेगा जब यह दोनों देश एक दूसरे के बीच रखे हुए शर्तो पर विचार करेंगे और उसको ठंडे दिमाग से सोच कर अमल करने की कोशिश करेंगे क्योंकि दोनों देशों का व्यवहार काफी रूखापन है, ऐसे में दोनों देशों के बीच बन्ते हुए काम भी बिगड़ने की संभावना बढ़ जाती है।

क्या इस संवाद से होर्मुज पर टेंशन बढ़ेगा ?

देखिए दोनों देशों के बीच हुए बात का कोई हल नहीं निकला ऐसे में लोगों के दिमाग में एक सवाल उठ रहा है कि क्या होर्मुज में फिर से टेंशन बढ़ता रहेगा या ईरान कि तरफ़ से उसपर ढिलापन देखने को मिलेगा। तो देखी अभी होर्मुज जलडमरूमध्य जो है ईरान के ही कब्जे में है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच हुए बातचीत में जब तक कोई हल नहीं निकल जाता तब तक ईरान अपनी मनमानी इस एरिया में दिखाता रहेगा।

ईरान का साफ बोलना है कि उसका देश अभी तक इस युद्ध में जितना क्षतिग्रस्त हुआ है और जितना नुकसान झेल रहा है उन सब का भर पाया इसी होर्मुज से जाने वाले जहाज से किया जाएगा यानी इन जहाजों के ऊपर टोल टैक्स लगाकर अपने देश का आर्थिक स्थिति को ईरान सुधारना चाहता है।

अंततः

11 अप्रैल को हुए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति संवाद का बातचीत जिसका कोई हल नहीं निकला इस पर अब विशेषज्ञों का बोलना है कि इन दोनों देशों के बीच शांति संवाद का वार्तालाप भारत और भारत के प्रधानमंत्री ही करा सकते हैं। और ईरान का मन भी यही बनता दिख रहा है की दूसरी बैठक भारत में हो और भारत के प्रधानमंत्री के साथ हो।

21 घंटे की बैठक में इन दोनों देशों के बीच कोई भी हल नहीं निकला अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस लगातार 21 घंटे के अंदर 10 बार से अधिक राष्ट्रपति ट्रंप से बात किया इसके बावजूद भी इन दोनों देशों के बीच कोई शांति वार्तालाप का निवारण नहीं निकला। हालांकि अगर दूसरी बैठक भारत में भारत के प्रधानमंत्री के साथ होती है तो यह सुनिश्चित बोला जा सकता है कि दूसरी बैठक में इन दोनों देशों के बीच शांति का प्रस्ताव अवश्य स्वीकार किया जा सकता है।

          — समाप्त —     (The Ashirvad)

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