दिल्ली: 11 अप्रैल को पाकिस्तान के राजधानी इस्लामाबाद में हुई ईरान और अमेरिका के बीच मीटिंग क्यों फेल हो गई और क्यों अमेरिका अब ईरान को लगातार धमकियां दे रहा है इस पर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी प्रतिक्रिया साझा किए हैं
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुई 21 घंटे की मीटिंग में ज्यादातर बातों पर दोनों देशों के बीच सहमति बन गई थी। दोनों देश अपने-अपने बातों से एक दूसरे के शर्तो पर विचार करके अपनी सहमति भी दिखाई लेकिन, ट्रंप ने कहा कि सारा बाद एक जगह जाकर अटक गया जिस पर ईरान नहीं माना और सारा प्रस्ताव दोनों पक्षदारो का धारा का धरा रह गया।
अमेरिका ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को रोक लगाने की बात बोली जिस पर ईरान ने तुरंत ना कर दिया। साथ में ट्रंप ने स्ट्रेट आफ होर्मुज पर पूरी तरह से पाबंदी हटाने का कहा जिस पर भी ईरान ना बोल दिया।
अमेरिका ने ईरान को खत्म करने की दी धमकी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि अमेरिका की सेना तुरंत होर्मुज से गुजरने वाली जहाज पर रोक लगाएगी और इसको अपने कब्जे में लेगी ट्रंप ने बोला कि इस पर ईरान की मनमानी हम नहीं चलने देंगे ईरान से पूरी तरह से होर्मुज का कंट्रोल छीन लेंगे। ट्रंप एक पोस्ट के जरिए बताया कि उनका 21 घंटे की मीटिंग के बारे में पूरी जानकारी दी गई ट्रंप ने बोला कि ईरान परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं करना चाहता है तो उसके पास भविष्य में कोई परमाणु हथियार नहीं होगा इसका आश्वासन में देता हूं।
ट्रंप ईरान को धमकी देते हुए कहे कि ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है तो अमरीकी सैनिक पूरी तरह तैयार है और ईरान जो थोड़ा बहुत बचा हुआ है उसकी पूरी तरह से खत्म कर देंगे।
” ट्रंप ने बताया कि क्यों होर्मुज पर पूरा कंट्रोल बनाना चाहता है ईरान ? ईरान को इससे सबसे ज्यादा फायदा है ”
ईरान क्यों चाहता है होर्मुज पर पूरा कंट्रोल (ट्रंप)
ईरान ने इस्लामाबाद में हुए अमेरिका के साथ 21 घंटे की शांति संवाद में अपनी शर्तो में से एक शर्त यह भी रखा कि अमेरिका और इजरायल के द्वारा जितनी भी ईरान को उसके इमारत को, फैक्ट्री को, अस्पतालों को, जितनी भी ईरान के कोने-कोने को क्षतिग्रस्त किया गया है, उन सबका भरपाई इन देशों को करना होगा। जिस पर अमेरिका ने ना बोल दिया क्योंकि अमेरिका का बोलना था कि नुकसान तो अमेरिका और इजरायल का भी हुआ है तो ऐसे में ईरान का भरपाया यह लोग क्यों करें ?
ट्रंप ने बताया इसी बात पर ईरान होर्मुज पर पूरा कंट्रोल पाना चाहता है। ताकि उनसे गुजरने वाले जितने भी देशों के जहाज हैं उन पर टोल टैक्स लगाकर वशुली करेगा ताकि उससे वह अपने देश की हालत सुधर सके। ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी सैनिक होर्मुज को अपने कंट्रोल में लेकर ईरान जितने भी माइनस बिछाया है उन सब को हटा देंगे।
इसी बीच US सेंट्रल कमांड ने अपनी एक ट्वीट में यह भी लिखा कि अमेरिकी सैनिक सोमवार यानी 13 अप्रैल को 10:00 a.m से ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी जहाज पर पाबंदी लगा देंगे।
किन-किन देशों के जहाज पर होगी पाबंदी ?
US Central Command ( CENTCOM ) के सेना की घोषणा के अनुसार यह पाबंदी ईरान बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने या वहां से जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर निष्पक्ष रूप से बिना किसी भेदभाव की जाएगी। इसमें अरब की खाड़ी से और ओमान की खाड़ी में स्थित सभी ईरानी बंदरगाह शामिल हैं।
CENTCOM की सीन उन जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता में कोई बाधा नहीं डालेंगे जो होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए गैर ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं या वहां से आ रहे हैं। इन्होंने यह भी बोला की नाकाबंदी शुरू होने से पहले एक औपचारिक सूचना के माध्यम से व्यावसायिक नावीकों को अतिरिक्त जानकारी प्रदान की जाएगी।
ट्रंप को इससे फर्क नहीं पड़ता।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए बोला कि ईरान के साथ इस्लामाबाद में हुए मीटिंग का नतीजा भले ही कुछ नहीं निकला हो और चाहे फिर दोबारा ईरान बात करने के लिए आगे आए या ना आए उससे मुझे कोई फर्क ( ट्रंप ) नहीं पड़ता है। India today में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप पत्रकारों से बात करते हुए बोले कि
” मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि ईरान वापस बात करने आए या नहीं आए वह अगर आते भी है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है “
इसके अलावा ट्रंप ने बोला कि इस्लामाबाद में हुई बातचीत के दौरान ईरान अपने परमाणु हथियार को हासिल करने और उसे सफल बनाने की ओर इशारा किया है।
” ट्रंप ने कहा कि ईरान उसे हासिल करना अभी चाहता है और पिछली रात मैंने यह साफ बात बोल दिया था कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे “
ईरान का बयान ?
अलजजीरा के रिपोर्ट के मुताबिक ईरान 12 अप्रैल को अमेरिका की दावों को खारिज करते हुए बोला कि अमेरिका जो माइंस हटाने की बात कर रहा है, दरअसल वह सब झूठ है ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। ईरान ने यह भी बोला कि आम जहाज को कुछ नियमों के तहत होर्मुज से गुजरने की इजाजत है लेकिन किसी सैन्य जहाज आने और जाने की गलती की तो उसको सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा और उसको बिना किसी रूकावट के शक्ति से उसे तुरंत निपटा दिया जाएगा।
अंततः
ईरान और अमेरिका के बीच हुए इस्लामाबाद में 21 घंटे की बातचीत दो बातों की वजह से अपने जगह पर वापस आ गई अमेरिका जहां ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाना चाहता है और होर्मुज से ईरान का कंट्रोल हटाना चाहता है वहीं ईरान अमेरिका का इन दोनों बातों को खारिज करते हुए उसके विपरीत कार्य करना चाहता है।
“ईरान चाहता है कि उसके परमाणु हथियार में अमेरिका या कोई भी देश हस्तक्षेप ना करें और वहीं दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान को पूरा कंट्रोल दिया जाए”
ईरान होर्मुज पर पूरा कंट्रोल लेकर उससे गुजरने वाले जहाजों से टैक्स लेकर अपनी जर्जर स्थिति को सही करने की कोशिश में है।
— समाप्त — (The Ashirvad)













