इस्लामाबाद में शाहबाज और आसिफ की भारी बेज्जती, अमेरिका को खुश करने के चक्कर में खुद की नीलामी।

Iran America peace talks failed in Islamabad 2026 thumbnail showing tension between US and Iran
Islamabad में Iran और America के बीच 21 घंटे की शांति वार्ता बेनतीजा रही, जिससे Middle East में तनाव बढ़ गया।

दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत से कोई समाधान नहीं निकला या फिर यू बोले तो इन दोनों के बीच जो शांति का संवाद होने की कार्य पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो रही थी वह धारी की धरी रह गई।

21 घंटे की बातचीत का नतीजा केवल शून्य रहा पाकिस्तान जो दोनों देशों के बीच शांति का वार्तालाप कराने का ठेका ले रखा था। उसे उसकी का हरजाना भुगतना पड़ गया पाकिस्तान जो पूरी दुनिया को यह दिखाना चाह रहा था, कि वह एक शांति दूत है और इसके दम पर ही अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर हुआ है। और बहुत जल्द मिडिल ईस्ट में शांति भी होगा। वह सब कुछ पाकिस्तान का बस एक अधूरा ख्वाब बनकर रह गया।

इस्लामाबाद में हुई बातचीत का रिजल्ट

कल यानी 11 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति का वार्ता हुआ और शांति का वार्ता में अमेरिका की ओर से जेड वेंस आए थे वहीं ईरान की ओर से मोहम्मद बघेर घालीबाफ ( Mohammad Bagher Ghalibaf ) आए हुए थे इन दोनों देशों के बीच शांति का बातचीत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अगवाई में हुई शाहबाज शरीफ इन दोनों के बीच मिडिएटर बनाकर कमान संभाल रहे थे।

इन दोनों देशों के बीच हो रहे शांति वार्ता में नतीजा कुछ नहीं निकला इनके बीच पाकिस्तान जो अपना सीना चौड़ा करके यह बोल रहा था कि हमने इन लोगों के बीच शांति बातचीत करवा कर इस संकट को टालने का कार्य कर रहे हैं अफसोस की पाकिस्तान का यह सपना बस सपना बनकर रह गया। दोनों देश अपने-अपने शर्तों पर अड़े रहे और इसका नतीजा यह हुआ कि इन दोनों देशों के बीच बिना किसी समाधान के ही वापस लौट गए।

हालांकि उनके वापस जाने पर और बातचीत का कोई समाधान न निकलने पर कुछ विशेषज्ञों का बोलना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति का वार्ता का ऐ कोई दि एंड नहीं है। हमेशा से इन दोनों देशों के बीच बातचीत पहले राउंड में ही सफल नहीं होता है आगे और भी बैठक इन दोनों देशों के बीच होगी जिसमें समाधान निकालने के चांस हैं।

ईरान के सामने एक प्रपोजल छोड़कर गए जेड वेंस

NDTV से बात करते हुए रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल जसिंदर सिंह सोढ़ी ने कहा कि किसी पर दो बार से ज्यादा भरोसा मत करो पहली बार भरोसा चेतावनी और दूसरी बार भरोसा सब्र होता है। और ईरान ने इस बातचीत में साफ कर दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं करेगा और वह इस बात से नीचे भी नहीं आएगा। कर्नल सोढ़ी ने बताया कि अमेरिका दो बार ईरान के साथ धोखा किया है दोनों बार ऐसा हुआ है जब अमेरिका ईरान पर हमला बोल दिया है।

लेकिन इस बातचीत को अमेरिका और ईरान के बीच दि एंड नहीं माना जाएगा इन दोनों के बीच फिर से दूसरा राउंड बैठक होगा क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच टकराव 47 साल पुराना है ऐसे में पहले राउंड में ही सफलता पा लेना थोड़ा मुश्किल था।

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राजनीतिक विश्लेषकों का क्या बोलना है ?

राजनीतिक विशेषज्ञों का बोलना है कि ईरान अमेरिका के बीच हुए इस बातचीत का दि एंड नहीं माना जाएगा इन दोनों देश के बीच फिर दूसरा राउंड होगा जिसमें कोई निवारण अवश्य निकल सकता है। राजनीतिकारों का बोलना है कि 40 दिन के महायुद्ध के बाद इन दोनों देशों के बीच शांति का बातचीत करना अपने आप में ही बहुत बड़ी बात है।

इन दोनों के बीच भले ही पहले राउंड में कोई बातचीत ना हुआ हो मगर जेडी वेंस ने एक प्रपोजल छोड़कर गया है, ईरान के लिए जिस पर एक बार फिर बात चीत होगा और हो सकता है कि दूसरे राउंड में इन दोनों देशों के बीच कोई समझौता आवश्यक हो जाए जेडी वेंस ने बोला है कि 10 दिन के सीजफायर के अंदर ही इस मुद्दे को बातचीत में सुलझाया जा सकता है। क्योंकि ईरान के पास 10 दिन का ही समय है।

अंततः

11 अप्रैल को हुए इस शांति वार्ता में भले ही कोई निवारण ना निकला हो मगर इसके बावजूद भी इस दोनों देशों के बीच शांति का एक दीपक जल गया है। और हो सकता है कि यह दोनों देशों के बीच दूसरी बैठक में उजाला फैलाने का कार्य भी करें पाकिस्तान का यह शांति वार्ता इसके लिए भले ही कलंक का कारण बन गया हो मगर इसके बावजूद भी इन दोनों के बीच पाकिस्तान शांति का वार्तालाप करने के लिए पूरी ताकत लगा दिया है।

अब देखना होगा कि दूसरे राउंड में क्या निवारण निकलता है क्या दोनों देशों के बीच कोई शांति समझौता होगा या फिर से युद्ध का रफ्तार और बढ़ेगा।

          — समाप्त —     ( The Ashirvad )

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