दिल्ली: इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के भड़काऊ बयान को सुनकर अपनी आखिरी चेतावनी पाकिस्तान को दे डालें जिसको सुनकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की सांस अटक गई है।
नेतन्याहू ने स्पष्ट रूप से बोला कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री एक तरफ खुद को शांति का समझौता करने वाले शांतिदूत बता रहे हैं और दूसरी तरफ पाकिस्तान के रक्षा मंत्री अपने ही मुंह से इजरायल की विनाश की बात करते हैं। ऐसे में आप कैसे शांतिदूत हुई जिसकी रक्षा मंत्री का ही बयान भड़काऊ है
क्यों भड़क गए नेतन्याहू ?
पाकिस्तान भले ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति का प्रस्ताव रखने वाला बिचोलिया बनकर काम कर रहा है और भले ही पाकिस्तान अमेरिका का इस समय खास बना है। मगर इसका मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान को जो मन करेगा वह किसी को भी बोल देगा यह सब इसराइल बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। पाकिस्तान की रक्षा मंत्री ख्वाजा आरिफ का भड़काऊ बयान जिसमें उन्होंने इजरायल की तुलना “कैंसर” से की उसको सुनकर इजरायल के प्रधानमंत्री भड़क गए।
नेतन्याहू ने कहा कि पाकिस्तान भले ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता का मध्यस्थ बना है। मगर इससे इजरायल को कोई मतलब नहीं है इजरायल को इससे कुछ नहीं करना कि आप अभी किसके पक्ष में शांतिदूत बनकर काम कर रहे हैं।
नेतन्याहू कि आखिरी चेतावनी पाकिस्तान को
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आरिफ ने जो भड़काऊ बयान में इजरायल की तुलना कैंसर से की है उसे पर ख्वाजा आरिफ अपने ही जाल में बुरी तरह फस गए हैं। और नेतन्याहू ने इस बात पर बोला कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री द्वारा बोला गया भड़काऊ बयान बिल्कुल ही बर्दाश्त नहीं किया जाएगा इन्होंने जो इजरायल की तुलना कैंसर से की है, वह ठीक नहीं है इनके द्वारा इजराइल की विनाश की जो बात बोली गई है वह निंदायोग्य है।
और इसके लिए इनको माफ नहीं किया जाएगा नेतन्याहू ने बोला कि आप खुद को एक तरफ शांति का मुरत बताते हैं। और वहीं दूसरी तरफ दूसरे देश के लिए ऐसी भावना लोगों के सामने प्रकट करते हैं, तो फिर आप कैसे शांति दूत हुए, फिर आप कैसे शांति का कार्य कर रहे हैं जब आपके मन में ही ऐसी भावना छिपी हुई है।
इजरायल पर क्या बोले ख्वाजा आरिफ ?
दरअसल पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आरिफ इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए हमले पर एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कुछ ऐसे शब्द का उपयोग किया जो काफी भड़काऊ था। और इसी बात को सुनकर नेतन्याहू पाकिस्तान को आखरी चेतावनी दे डाले। ख्वाजा आरिफ अपने पोस्ट में लिखा कि इजरायल दुष्ट और बुराई का प्रतीक है और यह मानवता के लिए एक अभिशाप है। जहां एक तरफ इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रहा है
वहीं दूसरी ओर इजरायल द्वारा लेबनान में मासूमों पर नरसंहार किया जा रहा है। इजरायल अपने हमलों से निर्दोष की हत्या कर रहा है पहले गाजा फिर ईरान और अब लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या की जा रही है। ख्वाजा ने कहा कि मैं आशा और प्रार्थना करता हूं, कि जिन लोगों ने यूरोपी यहूदियों से छुटकारा पाने के लिए फिलिस्तीन जमीन पर इस कैंसर रूपी राष्ट्र का निर्माण किया वह नरक की आग में जलेंगे।

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नेतन्याहू का आखिरी चेतावनी
ख्वाजा आरिफ ने जिस प्रकार इजरायल का अपमान किया है, और जिस प्रकार का भड़काऊ बयान दिया है उसको सुनकर नेतन्याहू भड़के हुए हैं और इसी पर उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए बोला कि आप एक तरफ खुद की निष्पक्ष और शांति का दूत बता रहे हैं, और ईरान अमेरिका और इजरायल की तनाव को खत्म करना चाहते हैं और दूसरी तरफ आप खुद ऐसे भड़काऊ बयान देकर और बात को गर्म कर रहे हैं।
नेतन्याहू ने बोला कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का यह बयान इजरायल के प्रति आपत्तिजनक है। यह कोई सीधा बयान नहीं है जिसको की बर्दाश्त कर ले, चाहे किसी भी सरकार से बर्दाश्त किया जा सके खासकर उस सरकार से तो और नहीं जो खुद को शांति समझौते के लिए निष्पक्ष मध्यस्थ होने का दावा करता है।
इससे क्या असर पड़ेगा शांति समझौते में ?
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का ऐसा भड़काऊ बयान इस शांति समझौते में रुकावट का कारण बन सकता है। इजरायल का पहले ही दावा था कि ईरान और अमेरिका के शांति समझौते का बिचोलिया पाकिस्तान बना हुआ है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके द्वारा इजरायल को ऐसे बयान से भड़काया जाए नेतन्याहू की यह बोलना है, कि पाकिस्तान इसराइल के कार्यों में दखलअंदाजी ना करें और ना समझाएं की इसराइल को क्या करना चाहिए।
पाकिस्तान का बयान फिलहाल केवल बातचीत पर ही अटका है लेकिन पाकिस्तानी मंत्री का यही हाल रहा तो फिर से शांति समझौते में भंग हो सकता है।
अंततः
सारे बयान बाजी का एक ही सीधा निशाना है ख्वाजा आरिफ का भड़काऊ बयान। जिस प्रकार ने ख्वाजा ने इजरायल को ऐसे शब्दों से संबोधित किया है वह इजरायल तो क्या किसी भी देश के गरिमा का उल्लंघन करता है। एक रक्षा मंत्री का इस तरह का भड़काऊ बयान साफ जाया करता है कि उनकी समझौता दूसरे देश के प्रति कितनी झुकाउकार है।
ख्वाजा को इस बात पर इजरायल से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि एक देश की गरिमा को ठेस पहुंचाना किसी भी रक्षा मंत्री का अधिकार नहीं है। इनका काम है शांति समझौते पर बात करना न कि ऐसा भड़काऊ बयान देकर और काम में बांधा उत्पन्न करना।
— समाप्त — (The Ashirvad)
