The Ashirvad के द्वारा प्रस्तुत:
नई दिल्ली: भारत में बड़ा प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी की फाइनल जीत हो गई लेकिन यह जीत उन कॉकरोच जनता पार्टी की उन छात्रों की जीत है। जिनके साथ वाकई में गलत हुआ था जिनका असली मायने में इंसाफ की जरूरत थी। क्योंकि नीट पेपर लीक का मुद्दा केवल एक छात्रा के लिए नहीं था बल्कि इससे 22 लाख बच्चों का भविष्य जुड़ा हुआ था और इसीलिए भारत में इतना बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला
छात्रों का जो मांग था धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा उसको केंद्र सरकार ने स्वीकार किया और शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर अगला शिक्षा मंत्री भी नियुक्त कर दिया जो की भारत के जैन जी के लिए सबसे बड़ा क्रांति और सच्चाई की जीत मानी जा रही है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा पर छात्रों ने बोला?
धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद के इस्तीफा के बाद छात्रों ने खुशी का जश्न मनाते हुए कहा कि यह भारत में डेमोक्रेसी की जीत है यह उसे सच्चाई की जीत है जिसके लिए कई दिनों से भारत के जंतर मंतर पर छात्र बिना किसी बात का परवाह किए धरना प्रदर्शन दे रहे थे यह जीत केवल एक व्यक्ति की और एक विशेष समुदाय की जितनी है बल्कि यह जीत उन पूरे छात्रों का जीत है जिन्होंने नीट पेपर लीक की वजह से अपनी जान गवा दी
छात्रों ने बीजेपी के बातों पर सहमति जताते हुए कहा कि बीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिलाकर साबित कर दिया है कि भाजपा छात्रों के हित में है। और छात्र की प्राथमिकता सबसे पहले है यहां तक की विपक्ष ने भी बीजेपी के इस कार्य को सराहना दी और कहा कि यह जीत डेमोक्रेसी की जीत है और इस जीत का जश्न पूरे बच्चों के अंदर दिख रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी का क्या था मांग?
कॉकरोच जनता पार्टी जो अपने धरना के बीच सरकार से तीन मांगे पूरा करने के लिए बात रखी थी जी मांग को सरकार ने स्वीकार किया और कॉकरोच जनता पार्टी और पूरे छात्रों के साथ सहमति जताते हुए कहा कि छात्रों के प्राथमिकता सबसे पहली प्राथमिकता है और उनके उज्जवल भविष्य के साथ कोई भी राजनीतिक मुद्दा नहीं बनना चाहिए छात्रों के लिए हमेशा सरकार आगे रहेगी और उनके हर बातों पर विचार करेगी
क्या थी कॉकरोचेस की मांग?
- कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार से पहले मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा का रखा था।
- वही दूसरा मांग कॉकरोच ने नीट पेपर लिख की वजह से जितने भी बच्चों ने अपनी जान गवा दी उनको मुआवजा के तौर पर एक करोड रुपए का मांग किया जिसको सरकार ने स्वीकार किया और देने का बात भी रखा
- तीसरा मांग था कि आंदोलन में शामिल हुए किसी भी बच्चों के ऊपर कोई भी कार्रवाई न हो
- चौथा और सबसे अहम कॉकरोच जनता पार्टी का जो मांग था वह था दिल्ली पुलिस और RAF के जवान बच्चों से सार्वजनिक माफी मांगे
हालांकि इन सारे शर्तों में से केंद्र सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी का पहला शर्त पूरा किया धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिलाकर लेकिन कॉकरोच का कहना है कि अभी भी तीन शर्ते बाकी है जिसके लिए हम सरकार पर बार-बार दबाव बनाएंगे जब तक यह मांगे पूरी नहीं हो जाती और उसके लिए हो सके तो फिर से हम आंदोलन भी करेंगे।
कौन बना भारत का अगला शिक्षा मंत्री?
धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद शिक्षा मंत्री का पद खाली हो गया जिसके बाद केंद्र सरकार ने नई शिक्षा मंत्री का चयनित किया और नई शिक्षा मंत्री के रूप में प्रह्लाद जोशी को भारत के नए शिक्षा मंत्री बनाया। प्रहलाद जोशी के शिक्षा मंत्री के पद का भार संभालने के बाद छात्रों के अंदर उम्मीद का एक नया किरण जाग उठा है।
छात्रों उम्मीद कर रहे हैं कि जो गलती धर्मेंद्र प्रधान ने की उसे गलती को प्रहलाद वेंकटेश जोशी ना दोहराएं छात्रों ने प्रहलाद जोशी के शिक्षा मंत्री पद पर भारत संभालने में अपनी सहमति जताई और उनका खुलकर समर्थन किया।
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल देखने को मिलीं। इनमें प्रमुख हैं:
- कौशल विकास और रोजगार आधारित शिक्षा पर जोर।
- उच्च शिक्षा संस्थानों में सुधार से जुड़े प्रयास।
- तकनीकी शिक्षा और शोध को प्रोत्साहन।
- नई शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने की दिशा में कई कदम।
- डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा
धर्मेंद्र प्रधान की इन उपलब्धियां को लेकर कई बार लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया भी सामने आ चुकी है जब धर्मेंद्र प्रधान ने अपने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया तो कई लोगों ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने कार्यकाल में शिक्षा की दिशा को बदल के रख दिया है उन्होंने शिक्षक को नया जीवन दान दिया है और उनके कार्यकाल में शिक्षा में काफी बदलाव भी देखने को मिला है।
लोगों ने बताया कि धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में शिक्षा में सबकी बराबरी और बेटियों को उच्चतम शिक्षा साथ में उन लोगों को भी शिक्षा से अवगत कराया गया जिनका शिक्षा से काफी वंचित रखा गया है। और इसी के कारण कई लोगों ने धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने पर अपनी नाराजगी जताई लोगों ने बताया कि धर्मेंद्र प्रधान ने अगर नीट पेपर लीक पर पहले ही कोई बड़ा कदम उठाया होता तो शायद आज वह भारत के शिक्षा मंत्री रहते
सरकार का बच्चों के हित में प्राथमिकता
केंद्र सरकार लगातार यह कहती रही है कि युवाओं का भविष्य और शिक्षा उसकी प्राथमिकता है। ऐसे में मंत्रालय में बदलाव के बाद भी शिक्षा से जुड़ी योजनाओं, छात्रवृत्ति, डिजिटल लर्निंग और उच्च शिक्षा परियोजनाओं पर काम जारी रहने की उम्मीद है। बच्चों के उज्जवल भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होगा उनकी शिक्षा की प्राथमिकता सबसे पहले है।
केंद्र सरकार ने बच्चों को आश्वासन देते हुए कहा कि उनके साथ जो अन्याय हुआ है उसे पर सरकार कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगी दोषियों को 10 करोड रुपए का जुर्माना और 10 साल की सजा भी होगी और भविष्य में ऐसी कोई भी बड़ी दुर्घटना ना हो और बच्चों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ ना हो इस पर सरकार कड़ी नजर रखेगी
प्रधानमंत्री मोदी ने किया बच्चों से बात
प्रधानमंत्री मोदी इंस्टाग्राम पर वीडियो बनाते हुए बच्चों से बात की उन्होंने कहा कि मेरी प्राथमिकता और मेरा साथ बच्चों के भविष्य के साथ में है। और मैं बच्चों के साथ हुए अन्याय के लिए हर संभवतः कदम उठाऊंगा छात्रों के साथ हुए इस दुर्घटना को मैं निंदा करता हूं और इसके लिए मैं फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन का ऐलान करता हूं।
NTA ने भी लिया कड़ा एक्शन
NTA नीट पेपर लिखकर मुद्दे पर कड़ा एक्शन लेते हुए अपने विभाग से 57 लोगों को हटाए NTA ने 57 लोगों को रेजिग्नेशन के बाद बच्चों के साथ अपनी सहमति जताई एनडीए पर बड़ा एक्शन और जवाब देही के बाद NTA ने भी बच्चों के आक्रोश और आंदोलन के सामने हार मान ली।
अंततः
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। सरकार ने प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर मंत्रालय के कामकाज को जारी रखने का निर्णय लिया है। आने वाले समय में शिक्षा नीति, प्रतियोगी परीक्षाओं, डिजिटल शिक्षा और छात्रों से जुड़े विषयों पर सरकार के अगले कदम महत्वपूर्ण रहेंगे।
कॉकरोच जनता पार्टी का जो मांगता धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उसे पर सरकार ने पूरी तरह सहमति जताते हुए छात्रों के पक्ष में फैसला किया और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिकर यह साबित कर दिया कि केंद्र सरकार हमेशा बच्चों के साथ खड़ी है उनके भविष्य के साथ कोई भी खिलवाड़ नहीं होने देगी।
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