ईरान ने भारत को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से जहाज लाने की दी अनुमति, PM मोदी ने दिया झुठी खबर फैलाने वाले को करारा जवाब।

दिल्ली: Middle East में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई..

दिल्ली: Middle East में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने भारत के लिए रणनीतिक समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से अपने जहाजों को सुरक्षित रूप से निकालने की अनुमति दे दी है।‌ जिसे अब बिना किसी रुकावट के भारत के जहाजों को ईरान एक विषेश रास्ते से पास करेगी। और ऐ केवल भारत के लिए रोक हटाया गया है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस क्षेत्र में समुद्री भु-भाग तनाव और सैन्य गतिविधियां बढ़ने के कारण कई देशों के जहाजों की आना जाना रूक गया है। ऐसे समय में भारत के लिए यह अनुमति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि देश की बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग से होकर आती है। और भारत भी अपने हिस्से का एक बड़ा भाग इसी रास्ते से लेकर गुजरता है। जिस वजह से इस रास्ते पर रोक लग जाना सारे देशों के लिए एक नया मुश्किलें खडा कर रहा था, लेकिन भारत अपनें कुटनीतिक स्तर पर ईरान से बात-चीत करके अपना रास्ता खुलवा दिया, जिसे अब आसानी से भारत कि जहाजे इस रास्ते से आ सकती है। वीना किसी रुकावट के

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के बिना क्यों सारे देशों कि स्थिति डगमगाने लगती है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। लगभग 21 किमी० में फैला यह समुद्री रास्ता ईरान और ओमान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।

इस मार्ग का इसलिए इतना बड़ा अहमियत:

क्योंकि कि दुनिया का लगभग 20% कच्चे तेल कि सप्लाई इसी रास्ते से होती है।                                                        कइ बड़े बड़े तेल उत्पादक देश इसी रास्ते अपने तेल का निर्यात करते हैं।                                                                     यहां तक कि, एशिया के कइ देशों का उर्जा आपुर्ती इस रास्ते पर निर्भर है।

ऐसे में किसी कारणवश अगर यह रास्ता बंद हो जाता है तो पूरे ग्लोबल तेल मार्केट में उथल-पुथल मच जाता है। साथ में ईंधन और गैसों की कीमत पर भी भारी मात्रा में बढ़ोतरी होने की संभावना बढ़ जाती है।

भारत के जहाज को हीं क्यों मिली अनुमति?

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने कूटनीतिक स्तर पर बातचीत करके अपने जहाजों की सुरक्षित आना-जाना सुनिश्चित करने की कोशिश की। इसके बाद ईरान ने भारतीय जहाजों को विशेष अनुमति देने का फैसला किया। ईरान के राजतुद मोहम्मद फतहाली ने मिडिया से बात करते हुए कहा कि भारत और ईरान का सम्बन्ध काफी अच्छा है, भारत ईरान को मुश्किल समय में काफी मदद कि है, ऐसे में ईरान भारत के जहाजों पर कोई रोक नहीं लगाएगा और इन जहाजों को विशेष रास्ते से जाने कि अनुमति देगा।

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में से एक है। देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा होता है, ऐसे में अगर अचानक से उर्जा का आयात रुक जाता है तो देश में हलचल मच जाएगा और लोगों को एक भारी संकट का सामना करना पड़ा जाएगा, तो एैसे में समय रहते हुए भारत ने जो बातचीत के जरिए अपने रास्ते को खुलवाया है वो बेहद प्रभावित हैं। भारत हर साल बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस आयात करता है, जिनमें से अधिकांश आपूर्ति Middle East के देशों से आती है। ऐसे में अगर समुद्री मार्गों में कोई बाधा आती है तो, पेट्रोल, डिजल और गैस के लागतों पर भी असर पड़ेगा। साथ में उद्योगों की लागत बढ़ सकती है।

इसलिए भारत के लिए समुद्री व्यापार मार्गों का खुला रहना बेहद जरूरी है। और ऐ भारत अपने सुझबुझ से कर दिखाया है।

क्या भारत-ईरान संबंधों पर पड़ेगा असर ?

भारत और ईरान के बीच लंबे समय से व्यापारिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं, दोनों देशों के बिच आपसी सम्बन्ध भी काफी बढ़िया रहा है ऐसे में ईरान के द्वारा भारत के लिए रास्ता खोल देना दोनों देशों के विश्वास को और मजबूत करता है।
दोनों देशों के बीच:‌ ऊर्जा व्यापार, बंदरगाह विकास, क्षेत्रीय, कनेक्टिविटी जैसे कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट चल रहे हैं।


ग्लोबल तेल बाजार पर संभावित असर।

अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में तनाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है, जिसे कई देशों कि अर्थव्यवस्था पर भी सिधा असर पड़ेगा। हालांकि भारत को अनुमति मिलने से फिलहाल ऊर्जा आपूर्ति को लेकर कुछ राहत मिली है, और इस अनुमति को मध्य नजर रखते हुए, और भी देशों का यही विचार होगा कि ईरान इनके लिए भी रास्ता खोल दे, जो कि ईरान के भड़कते गुस्से को देखकर तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगता।

भारत की रणनीति उर्जा स्रोत को लेकर क्या हो सकती है?

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए कई कदम उठा सकता है, जिसे आनेवाले ऐसे कोई भी समास्या से आसानी से मुक्ति मिल जाएं ताकि न भारत को बल्कि भारत के कोई भी लोगों को किसी भी प्रकार का कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े। और इसके लिए भारत सरकार विशेष क़दम उड़ाएगी जैसे:

ऊर्जा आयात के स्रोतों को विविध बनाना, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को बढ़ाना, नवीकरणीय ऊर्जा पर निवेश बढ़ाना
इन कदमों से भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत कर सकता है।

निवारण (निष्कर्ष)

Middle East : में जारी तनाव के बीच ईरान द्वारा भारत को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से जहाज लाने की अनुमति देना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आर्थिक कदम माना जा रहा है।
इस फैसले से भारत की ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिलेगी और क्षेत्रीय व्यापारिक गतिविधियों को भी स्थिरता मिल सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि Middle East (मध्य-पूर्व) की स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है और आने वाले समय में ग्लोबल (वैश्विक) राजनीति और ऊर्जा बाजार पर इसका असर देखने को मिल सकता है, अगर ए तनाव का जल्द ही कोई निवारण निही निकला तो बहुत जल्द पूरी दुनिया को इस युद्ध का खामियाजा भुगतना पड़ा सकता है। और इसके लिए पुरे देशों को अभी से सतर्कता बरतनीं आती आवश्यक है।

    — समाप्त —    ( The Ashirvad )

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