मिडिल ईस्ट: मिडिल ईस्ट में काफी समय से तनाव बना हुआ था जिस वजह से दुनिया के सारे देश इस तनाव में उलझ चुके थे और सारे देशों की अर्थव्यवस्था भी धीरे-धीरे प्रभावित हो रही थी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस टकराव से पूरी दुनिया हर्जाना भुगत रही थी हालांकि अब इस पर विराम लगाने का समय आ गया है और इससे अब होने वाली कोई देश की बड़ी दिक्कतें भी दूर हो सकती हैं।
ईरान और इजरायल के बीच हो रहे सैन्य टकराव में अमेरिका इजरायल की ओर से शामिल हो चुका था और धीरे-धीरे यह युद्ध एक विश्व स्तर पर बड़ा युद्ध की तरफ बढ़ने लगा मिडिल ईस्ट का तनाव केवल एक दो देशों का टकराव नहीं था बल्कि दुनिया के सारे देशों को प्रभावित करने वाला एक मंजर बन चुका था।
ईरान और इजरायल के बीच टकराव
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ती दूरियां और सैन्य टकराव का कारण था ईरान का न्यूक्लियर पावर होना जिस कारण से इजरायल ईरान के न्यूक्लियर सिस्टम पर रोक लगाने के लिए कई बार प्रयत्न किया हालांकि ईरान हर बार इसराइल और अमेरिका को झांसा देकर अपने सैन्य ताकत को मजबूत करता जा रहा था ईरान जो धीरे-धीरे न्यूक्लियर पावर की तरफ बढ़ रहा था उसको इसराइल ने कई बार रोकने की कोशिश की
और इन्हीं कारण से ईरान और इजरायल के बीच टकराव शुरू हो गया इसराइल जो ईरान के न्यूक्लियर पावर पर अपना बार-बार रोक लगाने का प्रयत्न कर रहा था हालांकि ईरान इसराइल के सामने झुकाने की बजाय लड़ना स्वीकार किया और धीरे-धीरे इस लड़ाई को एक विश्व स्तर पर ले गया, इसराइल जो चाहता था कि ईरान अपने न्यूक्लियर कार्यक्रम पर रोक लगाई और दूसरे देशों के अधीन बन जाए
अमेरिका भी ईरान को दिया धमकी
अमेरिका जो इजरायल के तरफ से ईरान को लगातार धमकी दे रहा था कि अगर वह अपने न्यूक्लियर कार्यक्रम पर रोक नहीं लगता है और इजरायल पर हमला करना बंद नहीं करता है तो उसका नामोनिशान मिटा दिया जाएगा हालांकि ईरान अमेरिका और इजरायल के बातों को अनदेखा करके लगातार इन पर हमले किए जा रहा था जिसके बाद से अमेरिका भी अपने जवाबी हमले देना शुरू कर दिया हालांकि ईरान ने अपने हमले से केवल अमेरिका और इसराइल को ही तबाह नहीं किया
बल्कि इसके हमले से कुवैत, इराक, दुबई, कतर, सऊदी अरब समेत कई देश भी प्रभावित हुए और ईरान ने इन सारे देश पर भी हमला करके इनको क्षतिग्रस्त कर दिया ईरान जो कई हमले में बड़े-बड़े कारखाने को भी ध्वस्त कर दिया तो कई पेट्रोल और डीजल के साधनों को भी बर्बाद कर दिया ईरान के इस हमले से 9 केवल देश प्रभावित हुए बल्कि उनके अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो गया
पेट्रोल डीजल का बढा दाम
ईरान ने अपने हमले में बहुत सारे पेट्रोल और डीजल के संसाधनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया और इसी कारण से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव भी बढ़ने लगा जिसके कारण दुनिया के कई देश प्रभावित हो गया है जो देश पूरी तरह से दूसरे देश से आने वाले कच्चे तेलों पर निर्भर थे उनके अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ने लगा और इन्हीं में से एक देश है भारत जो अपने जरूर का पचासी प्रतिशत तेल दूसरे देशों से लेता है
और जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव बढ़ाना शुरू हुआ तो अब भारत में भी पेट्रोल और डीजल का दाम धीरे-धीरे बढ़ने लगा भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई ऐसे देश हैं जो पूरी तरह से दूसरे देश से आने वाले तेल पर भी निर्भर करते हैं और उनकी अर्थव्यवस्था में तेल का स्रोत एक अहम भूमिका निभाता है
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ भी हुआ प्रभावित
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) पश्चिम एशिया में स्थित दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक समुद्री मार्ग (जलडमरूमध्य) है और इस पर भी ईरान ने अपना कब्जा जमा लिया जिससे दुनिया भर में इस मार्ग से होकर जाने वाले तेल जहाज पर भी रोक लग गया क्योंकि दुनिया का लगभग 20% तेल इसी मार्ग से होकर जाता है और जब इस मार्ग पर सैन्य दबाव पड़ता है तो कोई देश की अर्थव्यवस्था भी हिल जाती है
और ईरान जो इस एरिया में जबरन कब्जा करके इस मार्ग से होकर जाने वाले सारे तेल जहाज पर रोक लगा दिया और जो भी जहाज इसके बिना परमिशन के इस एरिया से होकर गुजरता था उसको ईरानी सैनिकों के द्वारा क्षतिग्रस्त करके समुद्र में ही डुबो दिया जाता था ईरान जो इस एरिया पर कब्जा करके पूरे दुनिया के देश में तेल चैन को प्रभावित कर दिया था पूरी दुनिया जो अपने देश के अर्थव्यवस्था को संभाल कर आगे बढ़ रही थी वह मिडल ईस्ट में हो रहे इस प्रभाव से धीरे-धीरे पीछे जाने लगी
मिडिल ईस्ट का भारत पर गहरा प्रभाव
भारत जो अपने जरूर का 85% तेल दूसरे देशों से पूर्ति करता है और जब मिडल ईस्ट के टकराव के कारण जब तेल आयात पर रोक लग गया तब भारत में बचे हुए तेल भी धीरे-धीरे खत्म होने लगे और देखते ही देखते भारत जो पहले बढ़ते हुए तेल के दाम को हद तक कंट्रोल का के रखा था अब यहां पर भी धीरे-धीरे पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ना शुरू हो गया भारत जो लंबे समय तक इस तनाव को झेलने में असमर्थ था
वह भी अब मिड लिस्ट के प्रभाव से खुद को बचा नहीं पाया भारत ने लाख कोशिश की दूसरे देश से तेल खरीदने की हालांकि भारत को ईरान ने अपने तेल वाले जहाज को भारत लाने के लिए इजाजत तो दे दिया लेकिन जब मिडल ईस्ट के तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ही कच्चे तेल का भाव आसमान छूने लगा तब भारत में भी तेल के दाम बढ़ने लगे हालांकि धीरे-धीरे दुनिया के सारे तेल सप्लाई चैन भी प्रभावित हो गया
और दो देशों के बीच बढ़ रहे टकराव ने देखते ही देखते पूरे देश को प्रभावित करना शुरू कर दिया पूरा देश इन देश के टकराव को रोकने के लिए कई प्रयत्न किया हालांकि सारे प्रयत्न असफल रहे अमेरिका जो ईरान को बार-बार धमकी दे रहा था और अमेरिका का कहना था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर ईरान जो कब्जा करके बैठा है उसको सारे जहाज के लिए और सारे देशों की चेन सप्लाई को निरंतर रखने के लिए खोल दिया जाए हालांकि ईरान अमेरिका का एक न सुनकर अपना जबरन कब्जा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर जमी रखा
समझौते का प्रस्ताव हुआ असफल
अमेरिका जो ईरान को कई बार समझौते का प्रस्ताव भेजा हालांकि हर बार ईरान अमेरिका द्वारा भेजे गए समझौते प्रस्ताव को पढ़कर चुप हो जाता था इस प्रस्ताव में अमेरिका द्वारा कई ऐसे अहम मुद्दे को दर्शाया गया था जिसको ईरान मानने से इनकार कर दिया इसके बाद कई बार अमेरिका ईरान को अंतिम चेतावनी भी दिया कि अगर इस प्रस्ताव को ईरान नहीं मानता है तब ईरान को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा
हालांकि ईरान बार-बार कह रहा था कि अमेरिका और इजरायल की खोखली धमकियों से ईरान कभी नहीं डरेगा वह वह निडर होकर इन लोगों को इन्हीं की भाषा में समझाएगा अमेरिका जो ईरान के साथ शांति समझौता के लिए पाकिस्तान का भी सहारा लिया लेकिन इसमें पाकिस्तान का ही बेज्जती हुआ और इन दोनों के बीच में कोई शांति समझौता भी नहीं हुआ हालांकि इसी बीच ईरान और अमेरिका के साथ एक सिजफायर का समझौता हुआ जिसमें इन दोनों देशों ने 10 दिन तक एक दूसरे के ऊपर हमला करने का रोक लगाया
10 दिन के बाद फिर से ईरान हथियार उठाया और कई देशों पर हमला करना शुरू कर दिया ईरान जो अमेरिका के बार-बार धमकी देने के बाद भी अमेरिका इजरायल और अन्य देशों पर लगातार हमला कर रहा था हालांकि इसी बीच अमेरिका ने भी ईरान को कई बार लास्ट चेतावनी दिया कि अगर ईरान अमेरिका का बात नहीं मानता है तो उसकी जड़ से मिटा दिया जाएगा इसके बाद ईरान कभी खड़ा नहीं हो पाएगा
ईरान जो अमेरिका और इजरायल को सबक सिखाने के लिए और उनके सैन्य ताकत को बर्बाद करने के लिए दूसरे देशों से भी सहारा लेने लगा ईरान को कई बड़े देश मदद करने लगे जिसमें चीन और रसिया का भी नाम शामिल था हालांकि ईरान और अमेरिका चाहते थे कि इन दोनों के बीच भारत भी आए और इन दोनों के बीच शांति समझौता कराए
अब जाकर हुआ शांति समझौता
G7 सम्मेलन के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच अब जाकर शांति प्रस्ताव स्वीकृत हो गया है जिसमें इन दोनों देशों ने एक दूसरे के ऊपर हमला करने का रोक लगाया है और इन दोनों देशों के शांति समझौते से अब पूरे देश को एक बड़ा फायदा होने वाला है इन दोनों देशों के शांति समझौते के तुरंत बाद ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल देखने को मिला और मिडिल ईस्ट के तनाव से जितने भी सामग्री का डैम इन दोनों देशों के कारण प्रभावित हो गया था वह धीरे-धीरे नीचे आने लगा
इन दोनों देशों के शांति समझौते से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव भी नीचे आ गए और अब दुनिया के पूरे देश में कच्चे तेल के भाव नीचे आने के कारण पेट्रोल और डीजल के भाव भी काम हो जाएंगे क्योंकि अब धीरे-धीरे फिर से तेल चैन सप्लाई शुरू हो जाएगी और इन दोनों देशों के कारण जितने भी देश में पेट्रोल और डीजल के भाव बढ़ गए थे वह फिर से अपने वास्तविक मूल पर आ जाएंगे और फिर से पूरी दुनिया का चैन सप्लाई चालू हो जाएगा
पेट्रोल और डीजल का भाव होगा कम
मेडलिस्ट की तनाव से कुछ तेल का भाव बढ़ने के कारण पेट्रोल और डीजल का भी भाव बढ़ गया था लेकिन इन दोनों देशों के शांति समझौते के बदौलत पर अब मान जा रहा है कि कच्चे तेल का भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में काम हो रहा है जिससे पेट्रोल और डीजल के भाव में भी एक गिरावट देखने को मिलेगा जो देश इन देश के टकराव से प्रभावित हो चुके थे वह धीरे-धीरे अब अपने वास्तविक स्तर पर आ जाएंगे और देखते ही देखते पेट्रोल और डीजल का भी भाव अपने वास्तविक मूल में आ जाएगा
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मिडल ईस्ट का तनाव पूरी तरह रुक नहीं जाता और जब तक तेल चैन सप्लाई का आना-जाना पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता तब तक कुछ भी कहना उचित नहीं है क्योंकि जब तक दुनिया का चैन सप्लाई प्रभावित रहेगा तब तक पूरे दुनिया के देश में पेट्रोल और डीजल के भाव में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा
अंततः
अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे दुनिया के चैन सप्लाई को स्थगित कर दिया था हालांकि अब ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौता ने पूरी दुनिया के देश को एक राहत भरा चैन का सांस दिया है माना जा रहा है कि इन दोनों के बीच शांति समझौता फिर से मिडिल ईस्ट के तनाव को काम करके पूरी तरह से पहले जैसे सब कुछ सही कर सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक इन दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव पूरी तरह रुक नहीं जाता और जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव कम नहीं हो जाता तब तक कुछ भी कहना उचित नहीं है हालांकि इन दोनों देशों के बीच शांति समझौता अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक गहरा प्रभाव तो डाला है मगर जब तक पूरी तरह सब कुछ सही नहीं हो जाता तब तक पूरी दुनिया की नजर इन दोनों देशों के ऊपर बनी रहेगी
— समाप्त — (The Ashirvad)
