दिल्ली: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ अपने ही हाथों से अपनी और अपने मुल्क पाकिस्तान की इज्जत को खुशी-खुशी अमेरिका और इजरायल के लिए नीलाम कर दिए और उसके बाद भी यह खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मसला सुलझाने वाले मसीहा बनकर घूमता फिर रहे हैं।
पाकिस्तान का नाम अचानक सुर्खियों में क्यों आने लगा ?
8 मार्च 2026 की सुबह पाकिस्तान के लिए गौरवशाली दिन था इस दिन दुनिया भर में पाकिस्तान को एक बड़ा मसीह के रूप में देखा जा रहा था जिसने अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम का दीवार बनकर खड़ा होने वाला था। लेकिन अचानक चंद घंटो में ही पाकिस्तान का गौरवमई दिन मातम में बदल गया और जहां पाकिस्तान की तारीफ हो रही थी वहीं अब पाकिस्तान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की थु-थु सुरु होगई।
दरअसल जब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान किया तब उसके बाद इजरायल ने ईरान के सहयोगी लेबनान पर हमला कर दिया जिसमें सैकड़ो लोग मारे गए और इसी चक्कर में पाकिस्तान के ऊपर काले बादल मंडराने लगे और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का हाल फटे हुए ढोलक की तरह होने हो गया जिसको कोई भी ठोक के चला जा रहा है।
पाकिस्तान को कैसे फसाया अमेरिका ने ?
जब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच शांति का प्रस्ताव लेकर सीजफायर का ऐलान किया और अपने ट्विटर हैंडल पर साफ बड़े अक्षरों में लिखा कि यह नियम हर जगह लागू होगा जिसमें लेबनान भी शामिल है और इस प्रस्ताव पर ईरान और US अपने सहयोगियों के साथ इस सीजफायर पर तुरंत सहमत हो गए जिसमें लेबनान भी शामिल था जो सीजफायर अभी से प्रस्तावित है।
पाकिस्तान के सीजफायर पर दोनों पकक्षों का शांति दूत बनता देख कई देशों को यह हजम नहीं हो रहा था। क्योंकि सबके मन में एक ही प्रश्न था कि आखिर अमेरिका पाकिस्तान का ही बात पर तुरंत राजी कैसे हो गया और ईरान इस प्रस्ताव को स्वीकार किया था कि नहीं
तो जब शाहबाज शरीफ का ट्वीट देखा गया और कुछ मीडिया रिपोर्ट की छपी खबरों को देखा गया तब पता चला कि ऐ ट्वीट पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के अकाउंट से भले ही किया गया है लेकिन इसको करवाने वाला कोई और नहीं बल्कि खुद अमेरिका है। क्योंकि पाकिस्तानी नेता इतने पढ़े लिखे हैं कि बिना इस ट्वीट को पढ़े ही की क्या लिखा गया है? इसको तुरंत सिधा प्रधानमंत्री के ट्विटर से पोस्ट कर दिए जिसको पाकिस्तान की तरफ से करेक्शन करके ट्वीट करना था जबकि इसको ऐसे ही पोस्ट कर दिया गया।
इजरायल ने क्यों नहीं मानी बात ?
इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बताया कि लेबनान इस संघर्ष में शामिल था और इसपर सीजफायर लागू नहीं होता जिससे उसका युद्ध लेबनान के साथ जारी रहेगा नेतन्याहू का बोलना था कि युद्ध को विराम केवल ईरान के साथ दिया गया है ना कि लेबनान के साथ। जो दो हफ्तों का सीजफायर हुआ है वह लेबनान पर लागू नहीं होगा
इस संघर्ष ने तब भयानक मोड़ लिया जब एक शास्त्र समूह हिजबुल्ला ने इसराइल पर अचानक हमला कर दिया इसके जवाब में इजरायल ने बेरुत और लेबनान के प्रमुख शहरों पर बमबारी करके जवाबी कार्रवाई किया जिसमें अभी तक करीब करीब 1500 लोग मारे जा चुके हैं यह हमारा 2 मार्च से शुरू है।
विवाद क्यों हुआ ?
विवाद का पूरा जड़ वहां से शुरू हुआ जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और कुछ नेताओं ने कहा था कि सीजफायर पूरे क्षेत्र पर लागू होगा जिसमें लेबनान भी शामिल है लेकिन नेतन्याहू ने इस दावे को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया और लेबनान पर हमला करना शुरू कर दिया और इसी कारण से इस हमले का जिम्मा पाकिस्तान के कंधों पर आ गया और अब पाकिस्तान इससे खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है।
अंततः
इस हमले और पाकिस्तान के द्वारा किए गए सीजफायर के ऐलान से अभी कई सवाल के जवाब मिलना बाकी है। कथित तौर पर अभी स्पष्ट नहीं है कि यह हमला जानबूझकर किया गया और क्या जानबूझकर लेबनान को इस सीजफायर से दूर रखा गया।
या फिर इस चीज फायर में शहबाज शरीफ की कोई भारी चूक हुई है और यह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम करने वाले मसीहा बनने के चक्कर में खुद को और मुश्किल में धकेल दिए हैं। इस घटनाक्रम से एक बात की पुष्टि हो गई है कि चाहे हमला ईरान और अमेरिका के बीच रुक हो मगर जो माहौल अभी इजरायल और ईरान के बीच बना है उसे मिडिल ईस्ट में और भी संवेदनशील राजनीति होने वाली है।
— समाप्त — (The Ashirvad)
