दिल्ली: पश्चिम एशिया में युद्ध का तनाव दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है जिसका सीधा और सबसे गहरा असर दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है। और इन सब में जो सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले जो देश हैं उनमें भारत भी शामिल है, बाकी देशों की तरह भारत का भी ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ता दिख रहा है जैसे-जैसे hormuz पर रुकावट बनी हुई है, उस हिसाब से भारत चौकन्ना होकर न केवल अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर काम कर रहा है, बल्कि भविष्य की बिगड़ी हालातो से लड़ने के लिए भी पूरी तैयारी में लगा है।
इस तैयारी को मत नजर रखते हुए भारतीय नौसेना कई स्थानों पर अपनी तैनाती बढ़ा रही है। दस दिन पहले उत्तर अरब सागर से भारतीय बंदरगाहों तक जहाजों को यह एस्कॉर्ट करने के लिए दो टास्क फोर्स तैनात किए गए थे। अब भारतीय नौसेना अरब सागर और ओमान की खाड़ी में अतिरिक्त युद्धपोत तैनात कर रही है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में लगभग सात जहाज और लॉजिस्टिक स्पॉट वेसल्स की तैनाती कर रही है। 2019 से चल रहे ऑपरेशन संकल्प के तहत नौसेना के जहाज पहले से ही ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी में मौजूद है, इन तैनातो का मकसद न केवल एलपीजी और ईंधन ले जाने वाले जहाज की सुरक्षा आवाजाही सुनिश्चित करना है। बल्कि भविष्य में किसी भी तैनाती के लिए पारस की खाड़ी के नजदीक रहना भी है।
होर्मुज संकट से भारत को बहुत बड़ा सबक मिला।
होर्मुज संकट से भारत को बड़ा सबक मिला और भारत इससे और खुद को मजबूत करने की तैयारी में है, भारत और नए-नए विकल्प पर काम करना शुरू कर रहा है जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं से पहले ही राहत मिल सके। भारत को पता है कि समुद्री रास्ते की सुरक्षा कितनी जरूरी है भारत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेश से आयात किया जाता है और इसका बड़ा हिस्सा समुद्री रास्तों से ही देश तक पहुंचता है। ऐसे में अगर यह रास्ते किसी कारण से बंद हो जाए या जहाजों पर खतरा बढ़ जाए तो भारत की तेल आपूर्ति, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इस घटना ने यह भी दिखाया है कि भारत को अपने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा पूर्ति को और मजबूत बनाना बहुत जरूरी है।
Strait of Hormuz के पास अभी भी मौजूद है 20 से अधिक भारतीय जहाज
Strait of Hormuz के पास बढ़ते तनाव के बीच भारत के 20 से अधिक व्यापारिक जहाज़ अभी भी उस क्षेत्र में मौजूद बताए जा रहे हैं, जिससे स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। भारत सरकार लगातार Ministry of External Affairs (India) के जरिए Tehran से संपर्क में है और भारतीय जहाज़ों की सुरक्षा को लेकर बातचीत कर रही है। इस दौरान एलपीजी लेकर जा रहे तीन भारतीय जहाज़ों को Indian Navy ने उत्तर अरब सागर से भारतीय बंदरगाहों तक सुरक्षित एस्कॉर्ट भी किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान में जारी तनाव की वजह से इस अहम समुद्री मार्ग से जहाज़ों की आवाजाही कुछ हद तक सीमित हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर देश तक पहुँचता है। ऐसे में अगर होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण मार्ग में बाधा आती है तो भारत में तेल और एलपीजी की आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने और ऊर्जा संकट की स्थिति भी बन सकती है। इसी कारण भारत सरकार लगातार हालात पर नजर बनाई हुए है और जरूरत पड़ने पर भारतीय जहाज़ों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त नौसैनिक तैनाती और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों पर भी विचार कर रही है, ताकि देश की ऊर्जा और व्यापारिक सप्लाई पर किसी तरह का बड़ा असर न पड़े।
समुद्री सुरक्षा के लिए दुनिया के कई क्षेत्रों में तैनात है भारतीय नौसेना।
Indian Navy समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दुनिया के कई अहम समुद्री क्षेत्रों में लगातार तैनात रहती है। ‘मिशन-बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ रणनीति के तहत 2017 से भारतीय नौसेना अलग-अलग इलाकों में अपने युद्धपोत और जहाज़ तैनात कर रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग सुरक्षित बने रहें और व्यापारिक जहाज़ों की रक्षा की जा सके। इसी रणनीति के तहत Gulf of Oman और Gulf of Aden जैसे क्षेत्रों में विशेष ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं, जहां समुद्री डकैती और सुरक्षा चुनौतियों पर नजर रखी जाती है।
इसके अलावा भारतीय नौसेना की तैनाती Seychelles, Maldives, Andaman and Nicobar Islands और Bay of Bengal जैसे रणनीतिक इलाकों के पास भी रहती है। इन क्षेत्रों में तैनाती का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना, जहाज़ों को सुरक्षित रास्ता देना और समुद्री डकैती जैसी घटनाओं को रोकना है। इससे भारत न केवल अपने व्यापारिक हितों की रक्षा करता है बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।
— समाप्त — (The Ashirvad)
