ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की हत्या पर सामने आई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों ने दावा किया कि इजरायल और अमेरिका ने वर्षों तक तेहरान के ट्रैफिक कैमरे, मोबाइल नेटवर्क और सुरक्षा पैटर्न हैक कर निगरानी की। और साइबर इंटेलिजेंस और मानव स्रोतों की मदद से उनकी सटीक लोकेशन तय कर हमला को अंजाम दिया।
दिल्ली: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत ने दुनिया भर में एक ही सवाल खड़ा कर दिया है. इतना सटीक, और एकदम सटीक टु सटीक किया गया हमला आखिर हुआ कैसे? किसी भी देश के लिए किसी दूसरे राष्ट्र के सर्वोच्च नेता की मूवमेंट, सुरक्षा पैटर्न और हर पल हर सेकेण्ड का मोमेंट लोकेशन तक पहुंचना असाधारण ही नहीं, लगभग असंभव माना जाता है. फिर भी अमेरिका और इजरायल ने खामेनेई पर वो वार किया, जो असंभव की परिभाषा को ही बदलता दिया अब अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें बता रही हैं कि इस ऑपरेशन की कहानी सिर्फ मिसाइलों की नहीं, बल्कि वर्षों से चल रहे एक गुप्त साइबर‑नेटवर्क, हाई‑एंड एल्गोरिदम और मानव स्रोतों की है- जिसने तेहरान की गलियों से लेकर खामेनेइ कि हर गतिविधि को महीनों नहीं, सालों तक चुपचाप रिकॉर्ड किया।
एक बड़े अंतरराष्ट्रीय खुलासे में सामने आया है कि तेहरान की लगभग पूरी ट्रैफिक कैमरा स्रोत वर्षों तक हैक रखी गई थी, और इन कैमरों की लाइव फीड कथित तौर पर एन्क्रिप्टेड रूप में तेल अवीव और दक्षिणी इज़रायल स्थित सर्वर पर भेजी जा रही थी. यह दावा Financial Times और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में सामने आया है.
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए कंबाइंड स्ट्राइक, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हुई, किसी अचानक लिए गए निर्णय का परिणाम नहीं थे. बल्कि यह कई वर्षों की साइबर पैठ, सिग्नल इंटेलिजेंस और मानव स्रोतों पर आधारित अभियान का हिस्सा था।
कैमरों से लेकर फोन नेटवर्क तक सब थे हैक।
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरे कथित रूप से वर्षों पहले से कंप्रोमाइज थे. फुटेज को एन्क्रिप्ट कर नियमित रूप से इजरायल भेजा जाता था। एक विशेष कैमरे ने आसपास खामेनेई की सुरक्षा टीम की गाड़ियों, पार्किंग पैटर्न और दैनिक गतिविधियों का विवरण दिया। ऐ कब बाहर निकलता है कब अपने रैली में जाता था, कब-कब काहा काहा जाता है सब मोमेंट पर इजरायल और अमेरिका ने निगरानी दिया जिस वजह से ऐ एक सटीक निशाना साधा और खामेनेइ को मार डाला। इजरायल और अमेरिका इस काम में वर्षों से निगरानी कर रहे थे, इन्होंने ने इसके हर छोटे से छोटे गतिविधियों पर नजर रखा और साथ में खामेनेइ के साथ काम करने वाले हर कर्मचारियों पर भी नजर रखा और अपने मिशन को अंजाम दिया।
मोबाइल फोन नेटवर्क को भी हैक।
रिपोर्ट के अनुसार इसके आस पास के सारे मोबाइल सिग्नल को भी हैक कर उसको व्यस्त कर दिया गया, ताकी फोन लगातार व्यस्त मोड में रहें और ए लोग किसी से कनेक्ट भी ना कर सके।
फाइनल अपडेट मिलते ही अटैक।
Financial Times के अनुसार, अमेरिकी CIA के पास एक मानव स्रोत था जिसने बैठक के समय और स्थान की अंतिम पुष्टि करके अपडेट दिया, जिससे ऑपरेशन के लिए जरूरी ‘रीयल‑टाइम सर्टेनिटी’ मिली. इस दोतरफा इंटेलिजेंस- कैमरा नेटवर्क, मोबाइल डेटा, संकेत आधारित ट्रैकिंग और मानव स्रोत के संयोजन ने कथित रूप से यह सुनिश्चित किया कि लक्ष्य ठीक उसी समय स्थान पर मौजूद था जब स्ट्राइक की गई, और खबर को हर एंगल से सही व पुष्टी करते हीं धमाका कर दिया गया।
जब पुछा गया कि आप लोकेशन को इतना सटीक कैसे जानते थे, तब एक इजरायली खुफिया अधिकारी ने FT से कहा, ‘हम तेहरान को ऐसे जानते थे जैसे येरूशलम को’. यानी कई वर्षों की निगरानी ने शहर के सुरक्षा पैटर्न की अत्यंत सूक्ष्म जानकारी उपलब्ध करा दी थी।
वर्षों तक चलने वाला ऑपरेशन और एक 60‑सेकंड की स्ट्राइक। रिपोर्टों का कहना है कि यह अभियान लगभग दो दशकों पुरानी उस खुफिया रणनीति का हिस्सा था, जो 2001 के बाद ईरान को शीर्ष प्राथमिकता मानकर आगे बढ़ाई गई थी. जांच रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली विमान कई घंटों से हवा में तैनात थे. स्ट्राइक के लिए 30 तक प्रिसिजन‑म्यूनिशन इस्तेमाल किए गए. ऑपरेशन को ’60‑सेकंड विंडो’ के भीतर अंजाम दिया गया और यह सब ईरान की बढ़ी हुई सतर्कता के बावजूद हुआ।
नतीजा- खामेनेई ढेर: इस घटना ने सिर्फ सैन्य संतुलन नहीं बदला बल्कि ईरान के राजनीतिक परिदृश्य को भी नया रूप दिया 60 सेकंड के हमले में खामेनेई का मारा जाना इजरायल और अमेरिका के लिए बड़ी जीत है। और इनके सैन्य ताकत का ए परिचय भी दिया है कि जिस कार्य को पुरी दुनिया असंभव बात रही थी, इसको इजरायल और अमेरिका ने मिलकर बस एक मिनट में निपटा दिया।
— समाप्त — ( The Ashirvad)
