Epstein File को लेकर आए दिन एक बड़ा खुलासा हो रहा है, अमेरिका के राष्ट्रपति से लेकर देश के बड़े-बाद ए उद्योगपतियों के नाम भी शामिल है अब ऐसा कहा जा रहा है कि इसमें अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम जुड़ चुका है अब इस बात में कितना सच्चाई है लिए आज के इस न्यूज़ के सिलसिले में जानने की कोशिश करते हैं।

Epstein File से जुड़ा आए दिन नया-नया खबर आ रहा है इस फाइल में पहले तो बड़े-बड़े बिजनेसमैन का नाम आया उसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम आया और यह मामला आगे चलकर इतना बेचीदा हो गया कि अब इसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम शामिल हो चुका है अब यह पूरी घटना क्या है और क्या सच में नरेंद्र मोदी इस घटना में शामिल थे या फिर उनके छवि को जानबूझकर खराब किया जा रहा है।
Epstein Files क्या है और क्यों ए इतना चर्चा में है?
Epstein Files – हाल ही में “Epstein Files” शब्द सोशल मीडिया और ऑनलाइन चर्चाओं में बार-बार सामने आ रहा है। जेफ़्री एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंसर था, जिस पर नाबालिगों के यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगे थे। उसकी मौत के बाद कई अदालती दस्तावेज़, संपर्क सूचियाँ और मीडिया रिपोर्ट्स सामने आईं, जिसमें उसके सारे काले और घिनैने काम सामने आने लगे और तभी से इसको लोग “Epstein Files” कहने लगे।
सोसल मीडिया एक ऐसा गिरोह है कि, जैसे-जैसे ये दस्तावेज़ चर्चा में आए, सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे फैलने लगे। कुछ पोस्ट्स और वीडियो में अलग-अलग देशों के बड़े नेताओं और मशहूर हस्तियों के नाम जोड़े गए। इन्हीं अफ़वाहों के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी कुछ जगहों पर लिया गया, लेकिन इसका मतलब ऐ नहीं कि बिना किसी ठोस साबुत और बिना किसी जांच पड़ताल के सिधे देश के उस नेता पर आरोप लगाया जाए जो आज इतनी बड़ी आबादी वाले देश का बागडोर अपने हाथ में सम्भाल रहा हो।
अब तक जितने भी साबुत कानून के हाथ में लगे हैं या उपलब्ध हुए हैं उस में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जेफ़्री एपस्टीन या उसके अपराधों से जोड़ता हो। न किसी अदालत के फैसले में, न ही किसी प्रामाणिक जांच रिपोर्ट में ऐसा कोई निष्कर्ष सामने आया है। कई बार बिना संदर्भ के नाम जोड़ देना, फोटो या सूचियों को गलत तरीके से पेश करना, या विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा भ्रामक कंटेंट फैलाना—ये सब अफ़वाहों को जन्म देते हैं, और इससे यह स्पष्ट भी नहीं होता कि इस गुनाह का हिस्सा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रहे हैं।
क्योंकि कि आज के डिजिटल दौर में जानकारी जितनी तेज़ी से फैलती है, उतनी ही तेज़ी से गलत जानकारी भी फैलती है, कुछ लोग होते हैं जिन्को फेमस होने कि चुल मची होती है, जींस वजह से वो लोग उन्हीं लोगों का नाम भी लेते हैं, जो भले ही कोई आरोप ना किए हों मगर उनके वज़ह से ऐ लोग पब्लिक के नज़र में फेमस हो। इस लिए आप जितना हो सके हर दावे का स्रोत देखें विश्वसनीय समाचार संस्थानों की पुष्टि खोजें विश्वसनीय तथ्य देखे ऐसे हीं किसी भी पोस्ट पर तुरंत भरोसा न करें।
Epstein मामला गंभीर और दुखद है, लेकिन बिना सबूत किसी का नाम जोड़ना न तो सही है और ना ही एक बुद्धिमान व्यक्ति कि महानता है। लोकतंत्र और समाज की मजबूती इसी में है कि हम सच और अफ़वाह के बीच फर्क करें।

इस मामले में आपको सवाल करना उचित है मगर तब जब आपको ऐ भरोसा हो जाएं कि ऐ घटना सत्य है, या फिर इस घटना से जुड़ा आपके पास कोई ठोस साबुत हो, वरना आपकों या मुझे कोई भी इजाजत नहीं देता कि हम लोग किसी के उपर भी कोई आरोप लगा सके, सवाल पूछना ज़रूरी है, लेकिन तथ्यों के साथ।
_____ समाप्त ___ (The Ashirvad)
