नई दिल्ली: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा को लेकर और दिल्ली पुलिस के द्वारा हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी के दो सदस्य को रिहाई के लिए “लहरा दो तिरंगा” मार्च निकालने की बात कही गई।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा को लेकर आंदोलन करने से पहले ही दिल्ली पुलिस के द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के और AISA के संस्थापक नेहा बोरा को पहले ही हिरासत में ले लिया गया था। दिल्ली पुलिस अभिजीत दीपक को घर पर नोटिस भेज कर पहले ही इस तिरंगा मार्च में शामिल न होने के लिए बात कही थी।
लेकिन हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि नेहा बोरा और अभिजीत दीपक को सशर्त सुनवाई के बाद दोनों को रिहाई मिल गई है।
क्या है विवाद का पूरा मामला?
16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में CJP की ओर से ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च आयोजित करने की योजना थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्यों को जेल से छुड़ाने की मांग के लिए यह आंदोलन किया जाने वाला था।
हालांकि पहले ही दिल्ली पुलिस के द्वारा इस आंदोलन में लोगों को न शामिल होने के लिए अपील की गई थी। दिल्ली के ने लोगों से आग्रह करते हुए कहा कि इसमें आम आदमी हिस्सा ना लें और शांति बनाए रखें। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर कोई भी व्यक्ति BNSS की धारा 163 का उल्लंघन करने की कोशिश किया तो उसके साथ कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई भी हो सकती है।
The Indian Express के रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की थी। पुलिस के मुताबिक, निषेधाज्ञा के उल्लंघन और शांति भंग होने की आशंका के मद्देनजर कार्रवाई की गई। प्रदर्शन के दौरान 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई।
लहरा दो तिरंगा मार्च का एक मुख्य उद्देश्य यह भी था। इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने थे।
अभिजीत दिपके को कैसे मिली जमानत?
दिल्ली पुलिस के द्वारा अभिजीत दीपिका को हिरासत में लेने के बाद 17 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत से सशर्त जमानत मिली। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें शांति बनाए रखने से संबंधित बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद रिहा किया गया।
अभिजीत दीपक को साफ तौर पर कहा गया कि उन्हें अभी शांति और संवैधानिक तरीके से पूरे सिचुएशन को संभाल कर रखना है और इन्हीं शर्तों के साथ AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को भी पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया।
प्रदर्शन के पीछे क्या है कारण?
कॉकरोच जनता पार्टी और कुछ विपक्ष नेता के द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के बहाने कोई ऐसे मतदाताओं का नाम मतदान सूची से काटा जा रहा है जो पहले से ही मतदान करते आ रहे हैं। चुनाव आयुक्त मतदान सूची में गड़बड़ी कर रहा है और मनमानी तरीके से नाम को कैट छाट रहा है।
विपक्ष का बस सीधा जवाब है कि मतदान सूची की जितने भी प्रक्रिया है उसको पारदर्शी रखा जाए और नाम काटने से पहले जिस व्यक्ति का नाम मतदान सूची से हटाया जा रहा है उसको पहले सूचित किया जाए ताकि वह अपने बात रखने का उसको मौका मिल सके
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से गलत तरीके से नाम हटाए जाने की स्थिति में पात्र मतदाता दोबारा नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया अपना सकते हैं। इसलिए इन आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
अंततः
अभिजीत दिपके की रिहाई के बाद भी CJP के प्रदर्शन और चुनाव आयोग को लेकर विवाद चर्चा में है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई, विरोध प्रदर्शनों के अधिकार और मतदाता सूची की प्रक्रिया जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं।
इस विरोध प्रदर्शन में लगता ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा का मांग किया जा रहा है और सरकार से कहा जा रहा है कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दे और उनके ऊपर कारवाई बैठाया जाए जिसके तहत यह स्पष्ट हो सके कि ज्ञानेश कुमार किसके कहने पर मतदान सूची में हेर-फेर कर रहे हैं।
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