नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ऊपर वोट चोरी और मतदान सूची से मनमानी तरीके से नाम काटना और अपने हिसाब से नाम जोड़ने का आरोप लगा हुआ है इसी के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ऊपर दो चुनाव आयुक्त का बात ना माने और उनके दिए गए शिकायत को भी इनके द्वारा अनदेखा करने का आरोप है।
ज्ञानेश कुमार के ऊपर लगे इन्हीं आरोपों के कारण 6 अक्टूबर को दिल्ली में भारी संख्या में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के कई नेताओं और सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। विपक्षी नेताओं की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और मतदाता सूची के संशोधन से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टीकरण दिया जाए।
क्या है पूरा मामला?
The Indian Express का एक रिपोर्ट छपता है जिसमें यह दावा किया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ऊपर दो चुनाव आयुक्त के द्वारा आरोप लगाया गया। आरोप इतना गहरा था जिसमें दोनों चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार को 14 बार से ज्यादा लिखित कंप्लेंट दिया जिसमें उन्होंने इनके तौर तरीके और मतदान सूची को लेकर जिस प्रकार से मनमानी किया जा रहा है उसके खिलाफ इन्होंने अपनी असहमति जताई थी।
इसी रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्त सुखवीर सिंह संधू और डॉ विवेक जोशी के द्वारा एक दिन में चार-चार बार लिखित तौर पर कंप्लेंट किया गया जिसमें वही पुराना मुद्दा की मतदान सूची से लोगों का नाम काटना और अपने ही हिसाब से लोगों का नाम जोड़ने का आरोप था।
हालांकि यह केवल एक छुपी हुई रिपोर्ट का खुलासा था दोनों चुनाव आयुक्तो ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया और ना ही ज्ञानेश कुमार ने जो मुख्य चुनाव आयुक्त हैं उन्होंने इस पर कोई स्पष्टीकरण करते हुए इसके विपक्ष में कोई बात कही
विपक्षी दल चुनाव आयोग की मांग?
विपक्षी दल चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों से कई मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग से जवाब मांगने और CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया का उद्देश्य डुप्लीकेट, मृत या अपात्र नामों को हटाना और मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना है। आयोग ने पात्र मतदाताओं के नाम छूट जाने की स्थिति में उन्हें सूची में शामिल करने के लिए भी निर्देश जारी किए हैं।
दिल्ली में क्या हुआ?
6 अक्टूबर के दिन विपक्ष नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA ब्लॉक के अन्य नेता संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़े। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य है मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेना और इसीलिए इन्होंने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर जाने के लिए रोड पर पैदल निकल हालांकि बीच में पुलिस वेरी गेट करके इन लोगों को आगे जाने से रोक दिया
और इसी के साथ कोई विपक्षीय नेता और सांसदों को पुलिस के द्वारा हिरासत में भी लिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी प्रदर्शन जारी रखा। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की मांग उठाई और सवाल किया कि विपक्षी सांसदों से आयोग क्यों नहीं मिल रहा है।
भाजपा ने विपक्ष पर साधा निशाना
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ऊपर लगे आरोपों के बीच भाजपा के नेताओं ने विपक्ष नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त के ऊपर विपक्ष के द्वारा जानबूझकर झूठा आरोप लगाया जा रहा है। ताकि SIR की प्रक्रिया रोक दिया जाए हालांकि विपक्ष को ऐसा नहीं करना चाहिए इससे चुनाव पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है और विपक्ष को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है।
विपक्ष मतदान सूची में फर्जी नाम को हटाने से डर रहा है ताकि इसका सामना उनको चुनाव के दौरान न घटना पड़े
हालांकि विपक्ष ने भाजपा के नेताओं का जवाब देते हुए कहा कि हमें मतदाता सूची में बदलाव और SIR प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंताओं का जवाब चुनाव आयोग को देना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला
Form 6 पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने किसी “modified” Form 6 को मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से रिकॉर्ड मांगा कि Form 6 में बदलाव किसने और किस प्रक्रिया से किया।
कोर्ट ने कहा कि अगर चुनाव आयोग का कोई फैसला कानून के मुताबिक नहीं हुआ, तो उसे रद्द किया जा सकता है। साथ ही CEC ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों से फैसलों की प्रक्रिया को लेकर जवाब मांगा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी SIR को रद्द नहीं किया है। कोर्ट यह जांच रहा है कि SIR से जुड़े फैसले और Form 6 में किए गए बदलाव कानून और चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुए या नहीं।
अंततः
विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखने की बात कही है। वहीं चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि उसे विपक्षी नेताओं की ओर से CEC और चुनाव आयुक्तों से मुलाकात के लिए कोई औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ था।
इस पूरे मामले में अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बातचीत होती है या नहीं और SIR को लेकर उठाए गए सवालों पर आगे क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।
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