नई दिल्ली: BRICS Summit 2026 जो कि भारत की राजधानी दिल्ली में भारत मंडपम में आयोजित किया गया यह आयोजन दुनिया भर के चर्चाओं का विषय बना हुआ है। BRICS Summit 2026 जो कि भारत के लिए बेहद खास है भारत ने इस आयोजन का कमान संभालते हुए वैश्विक स्तर पर अपना स्थान और मजबूत कर लिया है।
BRICS में शामिल सारे देश जो की BRICS के भागीदार हैं वह देश ने भारत के साथ एकता और प्रवृत्ति का सहमति जाते हैं। 13 सितंबर तक चल रहे इस आयोजन में दुनिया भर के कई देशों के प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और कई बड़े नेता इस आयोजन में हिस्सा लिए हैं। इस आयोजन का मुख्य आधार सारे देशों की एकता और सहमति के साथ एक दूसरे का साथ देना और वैश्विक स्तर पर खुद को मजबूत करना इन देशों की प्राथमिकता बन गई है।
प्रधानमंत्री मोदी का BRICS के देशों से अपील
BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और BRICS देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब समय है कि हम BRICS में हमारी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणाम में बदलें। अगले 20 वर्षों के लिए हमें एक नए और एंबिशियस एजेंडा पर काम करना होगा
इसकी शुरुआत हमें अपने खुद के वर्किंग सिस्टम से करनी होगी BRICS की अध्यक्षता हर वर्ष बदलता है किंतु इसके वजह से हमारा institutional moment नहीं रुकना चाहिए, मैं BRICS Continuity and Implementation Mechanism का प्रस्ताव रखता हूं।
इसके तहत Troika के माध्यम से सभी initiative और Outcome का Follow up हो सकेगा। हमें Secure, Digital, Repository बना सकते हैं। हमें हर निर्णय के साथ nodal Point समय सीमा और implementation status दर्ज किया जा सकता है।
पीएम मोदी ने कहा कि BRICS अपने 20 साल के सफर में अब एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच गया है, जहां उसे अपनी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलना चाहिए। उन्होंने BRICS को किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने वाला मंच बताया।
Global South की बढ़े भागीदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि Global South को केवल वैश्विक नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने वाला पक्ष बनना चाहिए।
मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। BRICS की नई दिल्ली घोषणा में भी विकासशील देशों की वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में अधिक प्रभावी भागीदारी का समर्थन किया गया।
BRICS के फैसलों को जमीन पर उतारने पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि BRICS में हर साल अध्यक्षता बदलती है, लेकिन इससे संगठन की योजनाओं और पहलों की निरंतरता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने BRICS Continuity and Implementation Mechanism का प्रस्ताव रखा, ताकि लिए गए फैसलों और पहलों का लगातार फॉलो-अप हो सके।
समिट के दौरान वैश्विक शांति, आर्थिक सहयोग, तकनीक, AI, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि आज की वैश्विक चुनौतियों का असर किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, इसलिए समाधान के लिए सामूहिक सहयोग जरूरी है।
अंततः
BRICS Summit 2026 सारे देशों ने प्रधानमंत्री मोदी के हर बातों पर सहमति जताई और एकता और विश्वास के साथ आगे बढ़ने का प्रस्ताव दिया सारे देशों ने एकजुट होकर वैश्विक स्तर पर खुद को मजबूत और एक दूसरे का साथ देते हुए आगे बढ़ने का वादा किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सारे देशों के मुख्यमंत्री व राष्ट्रपति से वार्तालाप करते हुए हर बात पर सहमति मरवाती हुई अपने साथ हर देश की एकता और उनके साथ खड़े होकर विकास और वैश्विक मंचों पर मजबूती का प्रस्ताव रखा है।
BRICS Summit 2026 से भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की कि BRICS देशों के बीच सहयोग केवल बैठकों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अब आपसी सहमति और योजनाओं को ऐसे परिणामों में बदलना जरूरी है, जिनका फायदा आम लोगों और विकासशील देशों को मिले।
यही BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश का सबसे अहम हिस्सा रहा—एकता, सहयोग और सहमति को वैश्विक स्तर पर ठोस परिणामों में बदलना।
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