श्रीराम मंदिर अपडेट: अयोध्या में स्थित प्रभु श्री राम के मंदिर में चंदा चोरी को लेकर जो बवाल मचा हुआ था उसके बाद सरकार ने और मंदिर परिसर के ट्रस्ट ने एक बड़ा फैसला लिया और अयोध्या मंदिर के नए CEO को नियुक्त किया। नए सीईओ के तौर पर मार्शल (रिटायर्ड) जीतेन्द्र मिश्रा मंदिर का कार्यभार सोपा गया
जीतेन्द्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और लंबे समय तक देश की सेवा कर चुके हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, CEO पद के लिए हजारों आवेदन आए थे और चयन प्रक्रिया के बाद जीतेन्द्र मिश्रा को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना गया।
हालांकि उनका चयन करने के बाद सोशल मीडिया पर और लोगों के द्वारा अलग-अलग प्रतिक्रिया आना शुरू हो गया जिसमें लोगों ने सरकार पर और सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर बार किसी भी धार्मिक क्षेत्र में सीईओ या मालिक के तौर पर किस स्वर्ण समाज को ही क्यों बैठाया जाता है। राम मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थान के CEO पद के लिए किसी दलित समाज के योग्य उम्मीदवार को मौका क्यों नहीं दिया गया?
अब यह सवाल पूरे सोशल मीडिया पर तेजी से बवाल मचा रहा है?
कौन हैं राम मंदिर के नए CEO जीतेन्द्र मिश्रा?
जितेंद्र मिश्रा जो राम मंदिर के नए सीईओ बने हैं वह पहले भारतीय वायुसेना में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके सैन्य और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें इस महत्वपूर्ण पद के लिए चुना गया है।
कुछ रिपोर्ट के अनुसार इस राम मंदिर पद के लिए लगभग 5585 आवेदन पत्र आए हुए थे जिसमें से काफी सोच समझकर और पूरे जांच पड़ताल करने के बाद कई चरणों में स्क्रीनिंग हुई और अंत में तीन उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया गया। इसके बाद ट्रस्ट ने जीतेन्द्र मिश्रा को CEO के पद के लिए चुना।
राम मंदिर ट्रस्ट के लिए यह नियुक्ति एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखी जा रही है। हाल किसके बावजूद भी सोशल मीडिया पर लोगों के द्वारा लगातार प्रश्न किया जा रहा है जिसमें दलित समाज को मौका क्यों नहीं दिया गया इस पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है
दलित उम्मीदवार को मौका क्यों नहीं मिला?
जितेंद्र मिश्रा को चयनित करने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल खड़ा किया और सरकार से प्रश्न करते हुए कहा कि हर बार दलित समाज को पीछे क्यों छोड़ दिया जाता है। अगर बात सार्वजनिक होती है, सबके साथ लेकर चलने की बात होती है, तो इसमें किसी दलित समाज को मौका क्यों नहीं दिया जाता? क्यों हर बार किसी स्वर्ण समाज को ही मौका दिया जाता है।
अगर सरकार मानती है कि धर्मस्थल सबका अधिकार है और सबके साथ एक समानता का व्यवहार करता है। तो वहां पर भी अपनी काबिलियत और अपनी क्षमता को दिखाने के लिए दलित समाज को क्यों मौका नहीं मिलता। जब श्री राम मंदिर ट्रस्ट ने नए सीईओ का चयन करना शुरू किया तो उसमें दलित समाज का नाम क्यों नहीं चुना क्यों इसमें भी स्वर्ण समाज की ओर से जितेंद्र मिश्रा को ही चयन किया गया
कुछ लोगों का सवाल है कि अगर CEO पद के लिए हजारों आवेदन आए थे, तो क्या दलित समाज से भी योग्य उम्मीदवारों ने आवेदन किया था? यदि किया था तो चयन प्रक्रिया में उन्हें किस आधार पर आगे या पीछे रखा गया?
हाल किस बात को लेकर अभी तक कोई भी राजनेता ने अपने प्रतिक्रिया नहीं दी। किसी ने भी यह नहीं कहा कि सरकार इसमें भी अपनी चाल चलने की कोशिश की है। कोई भी राजनेता संसद में या किसी भी मुख्यमंत्री के साथ बैठकर इस विषय पर चर्चा नहीं किया कि क्यों जितेंद्र शर्मा को ही यह मौका दिया गया यह सवाल केवल सोशल मीडिया के द्वारा और सोशल मीडिया पर लोगों के द्वारा ही किया जा रहा है?
क्या ट्रस्ट ने दलित उम्मीदवार को मौका न देने पर कोई आधिकारिक बयान दिया?
अगर बात करें कि ट्रस्ट ने दलित उम्मीदवार को मौका न देने पर कोई आधिकारिक बयान दिया हो, तो ऐसा कुछ नहीं है। अभी तक ट्रस्ट की ओर से या किसी भी प्रकार से कोई भी ऐसा आधिकारिक बयान नहीं आया है जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि क्या इतनी आवेदन में किसी योग्य दलित समाज ने आवेदन दिया था? और अगर दिया था तो किस कारण से उसका चयन नहीं किया गया ऐसा कोई भी अभी तक बयान नहीं आया है।
इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही बहस को तथ्य और आरोप के बीच अंतर रखते हुए देखना जरूरी है।
लोकतंत्र में किसी नियुक्ति की प्रक्रिया, प्रतिनिधित्व और पारदर्शिता पर सवाल उठाना लोगों का अधिकार है। वहीं दूसरी तरफ, किसी संस्था या व्यक्ति पर बिना पर्याप्त प्रमाण के जातिगत भेदभाव का आरोप लगाना भी उचित नहीं माना जा सकता।
अंततः
श्री राम मंदिर ट्रस्ट के द्वारा जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का कार्यभार सौंपने पर लोगों ने उनको बधाई दी हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यह सवाल भी करना शुरू कर दिया। कि इसमें भी सरकार ने अपना चल चल दिया है। और राम मंदिर के पूरे कार्यभार का जिम एक स्वर्ण समाज के हाथों में सौंप दिया है। वह अभी तो अब जब राम मंदिर में इन्हीं समाज के द्वारा इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया गया है।
लोगों ने सवाल करते हुए यह भी कहा कि सरकार को जब पता है, कि इन्हीं समाज के द्वारा इतने बड़े चंदा घोटाला को अंजाम दिया गया तो भी सरकार बिना किसी के बातों को ध्यान में रखते हुए फिर से किसी दलित या अन्य समाज के किसी वरिष्ठ और योग्य लोगों को चयन करने की वजह फिर से जितेंद्र मिश्रा को नियुक्त कर लिया है
लोगों ने यह भी कहा कि हमें जितेंद्र मिश्रा जैसे महान और कर्मयोगी लोगों पर कोई संदेह नहीं है। वह अपना काम निष्पक्ष और साफ सुथरा तरीके से ही करेंगे क्योंकि इन्होंने इतने वर्ष भारतीय वायु सेवा में सेव किया है। लेकिन सवाल हमें सरकार से है कि इसमें दलित को मौका कब दिया जाएगा कब किसी दलित को किसी बड़े पैमाने पर खड़ा किया जाएगा
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