धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: छात्र आंदोलन के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम, आगे क्या?

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा
जंतर मंतर पर आंदोलन के बीच खबर आई, भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

The Ashirvad के द्वारा प्रस्तुत:

नई दिल्ली: भारत में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के द्वारा धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफा के लेकर आंदोलन जिसके बीच एक बहुत बड़ा अपडेट आया है और का रिपोर्ट और खुद ऑफिशल हैंडलूम से यह पुष्टि की गई है कि भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है।

धर्मेंद्र प्रधान की स्थिति को लेकर कई दिनों से जंतर मंतर पर आंदोलन चल रहा था कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों के द्वारा चल रहे इस आंदोलन में धर्मेंद्र प्रधान की स्थिति पर को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही थी। नीट पेपर लीक मुद्दे के बाद छात्रों का कहना था कि धर्मेंद्र प्रधान को अपने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए यह उसे लायक नहीं है।

हालांकि 30 32 दिन चल रहे आंदोलन के बाद अब जाकर आधिकारिक तौर पर धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देते हुए छात्रों के बात और उनके हित में अपनी संवेदना प्रकट की है।

क्या है पूरा मामला?

नीट पेपर लीक मुद्दे के बाद से कॉकरोच जनता पार्टी छात्रों के साथ मिलकर दिल्ली के जंतर मंतर पर कई दिनों से आंदोलन कर रही थी आंदोलन का कारण था कि भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपनी पद से इस्तीफा दें क्योंकि उनके नेतृत्व में नीट का पेपर कराया गया और वह पेपर लीक हो गया जिसके वजह से लगभग 22 लाख बच्चों का भविष्य चंद्राकर में चला गया कई बच्चों ने अपने जान गवा दिए जिसके वजह से छात्रों के बीच आक्रोश का माहौल भर गया और जंतर मंतर पर आंदोलन करते हुए धर्मेंद्र प्रधान की स्थिति की मांग करने लगे

लगातार 3032 दिन से आंदोलन करने के बाद और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की कई बार सरकार से गुहार लगाने के बाद फाइनली अब जाकर धर्मेंद्र प्रधान ने लिखित तौर पर अपने पद शिक्षा मंत्री से इस्तीफा दे दिया उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर इस्तीफा का प्रमाण उपलब्ध किया और उन्होंने लिखा कि उनकी संवेदना हमेशा छात्रों के साथ रहेगी छात्रों की मांग और उनके सम्मान के हित में यह पद कुछ भी नहीं है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के बाद कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों के बीच जीत का जश्न देखने को मिल रहा है छात्रों का कहना है कि यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत है धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न केवल एक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा है। बल्कि आने वाले भारत के उज्जवल भविष्य की एक बहुत बड़ी बदलाव है जिसमें हमेशा लोकतंत्र की जीत होगी

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा देकर लिखा कि?

मेरे युवा साथियों,मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।

मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूँ। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं प्रधानमंत्री जी का आभार प्रकट करता हूं।

किंतु 3 मई 2026 को हुई NEET-UG की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया एवं पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (Computer-based-test) मोड में करने का निर्णय लिया गया।

इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए whole of government approach के तहत काम किया गया। इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही, छात्रों, अभिभावक और माता-पिता के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण हुई।

पहले ही दिन से, इसपर मैंने जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। 16 जुलाई को घोषित नीट यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली।

परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ।मैं सदैव हमारे प्रजातंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाला रहा हूँ तथा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता आया हूँ। वे केवल भारत का भविष्य ही नहीं हैं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के वाहक, निर्माता और भविष्य के शिल्पकार भी हैं।

पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुःखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। भारत की युवाशक्ति ही, इस देश की असली ताकत है। देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है।

जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है। मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ।

साथ ही, मंत्रिपरिषद के अपने सभी सम्मानित सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा उन सभी व्यक्तियों का भी आभार व्यक्त करता हूं, जिनके साथ मुझे कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मैं इसके लिए सदैव समर्पित रहूँगा। प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से मैं भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हर संभव रूप में स्वयं को समर्पित रखूँगा।
आपका, धर्मेंद्र प्रधान

राष्ट्रपति ने जताई सहमति

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा पर राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू ने अपनी सहमति जताई धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद से राष्ट्रपति के पास अपना इस्तीफा पत्र जिस पर प्रधानमंत्री और उनके कैबिनेट के सहमति के बाद राष्ट्रपति ने अपनी सहमति जताते हुए उनका इस्तीफा पत्र स्वीकार किया इसके बाद से आधिकारिक और लिखित तौर पर धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया।

धर्मेंद्र प्रधान जो शिक्षा मंत्री के पास इस्तीफा देने के बाद अपने ट्विटर हैंडल और तमाम सोशल मीडिया हैंडल से अपना प्रोफाइल फोटो चेंज कर दिया साथ में उन्होंने लिखा कि उनकी संवेदना और प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से मैं भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हर संभव रूप में स्वयं को समर्पित रखूँगा।

विपक्ष ने भी जताई सहमति

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के बाद से विपक्ष ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत है और इसके लिए मैं प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करता हूं हालांकि विपक्ष के राजनेता राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के बाद दो मांगे अभी भी बाकी है

राहुल गांधी ने कहा:

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है। सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।

2 मांगें अभी भी बाकी हैं – प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो। ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है – अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है। इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है। डरो मत !

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अंततः

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देना केवल एक शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना नहीं है बल्कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत है यह जीत उन छात्रों की है जिनके साथ वाकई में गलत हुआ था। और जिनको न्याय मिलना जरूरी था। वह छात्र जो पेपर लीक के कारण अपना भविष्य अंधकार में जाते समय नहीं रोक पाए वह छात्र जो पेपर लेकर के कारण अपना जान गवा दिए उन सभी छात्रों के लिए सबसे बड़ी जीत है।

धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफा पर विपक्ष के साथ छात्रों ने भी इसका जश्न मनाया उनका कहना है कि यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत है और साथ में देश के प्रधानमंत्री मोदी ने जो छात्रों से वादा किया था उसको निभाया साथ में छात्रों ने सोनम वांगचुक का भी आभार प्रकट किया जिनमें बदौलत पर आज धर्मेंद्र प्रधान ने अपने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।

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