कच्चे तेल की कीमतों में राहत के बावजूद पेट्रोल-डीजल सस्ता क्यों नहीं? जानिए पूरी वजह

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बड़ी अपडेट, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद ईंधन के दाम और तेल कंपनियों की स्थिति।
तेल कंपनियां काम रही है ₹11 प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल पर

The Ashirvad के द्वारा प्रस्तुत:

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते हुए तनाव को देखकर कच्चे तेल की कीमतों में राहत के बावजूद पेट्रोल-डीजल सस्ता क्यों नहीं? जानिए पूरी वजह, जिस प्रकार से पेट्रोल और डीजल का भाव बढ़ाया गया था उससे आम आदमी को काफी परेशानी हुआ धीरे-धीरे 11 से 12 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल का भाव बढ़ गया जिससे आम आदमी को लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था इसके बावजूद भी लोग देश का ही साथ दे रहे थे और पेट्रोल कंपनियों के बयानों के आधार पर लोग चुपचाप पेट्रोल और डीजल खरीद रहे थे।

लेकिन जब कंपनियां 11 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल पर मुनाफा कमा रही है तब देश में पेट्रोल और डीजल का दम अपने पुराने दर पर वापस क्यों नहीं आ रहा क्यों लोगों को अभी भी नई दर पर ही पेट्रोल और डीजल दिया जा रहा है क्या इसके पीछे सरकार की कोई रणनीति है और क्या जानबूझकर तेल कंपनियां अब पेट्रोल और डीजल का भाव कम करना नहीं चाहती है क्योंकि अब तो पेट्रोल और डीजल का आवाज चाहिए सामान्य हो चुका है इसके बावजूद भी तेल कंपनियां अपने भाव को कम क्यों नहीं कर रही

क्या है पूरा मामला?

मिडिल ईस्ट के बढ़ते हुए तनाव को देखते हुए पेट्रोल और डीजल का भाव केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के पूरे देश में बढ़ चुका था अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिस पर जिस प्रकार से कच्चे तेलों के भाव को महंगे दामों पर खरीदा जा रहा था उसे हिसाब से पेट्रोल और डीजल के दामों में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिली हालांकि यह दिक्कत केवल भारत ने ही नहीं बल्कि दुनिया के पूरे देश को उठाना पड़ रहा था।

ना चाहते हुए भी अपने जरूरत की पूर्ति के लिए महंगे दामों में अपने देश में कच्चे तेल का अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से आयात करके पेट्रोल और डीजल लोगों तक कुछ बढ़े हुए दामों पर पहुंचा जा रहा था। लेकिन जब धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में नमी देखने को मिली और जब धीरे-धीरे उसके दाम वापस से नीचे आने लगे तब लोगों का सवाल है, कि आखिर तेल कंपनियां अपने पुराने दर पर वापस क्यों नहीं आ रही क्यों अभी भी नए रेट पर ही पेट्रोल और डीजल को आम जनता को दिया जा रहा है?

क्या तेल कंपनियां बड़ा मुनाफा कमा रही हैं?

दैनिक भास्कर के छपी रिपोर्ट के मुताबिक तेल कंपनियों और सरकार पिछले कुछ महीनो में जो नुकसान उठाई है उसको भर पाया करने के लिए पेट्रोल और डीजल का भाव कम नहीं कर रही है क्योंकि सरकार और तेल कंपनियां आम आदमी के जब से ज्यादा अपने बैलेंस शीट को ध्यान देती है और इसीलिए इस समय भी तेल कंपनियां डीजल और पेट्रोल पर लगभग ₹11 प्रति लीटर का मुनाफा कमा रही है इसके बावजूद भी वह चाह कर भी पेट्रोल और डीजल के भाव कम नहीं कर रही जिससे खुदरा लेने वाले आम लोगों के जिंदगी में गहरा प्रभाव पड़ रहा है।

मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण तेल कंपनियां 6 महीने की निकली स्तर पर पहुंच चुकी हैं और उसको रिकवरी करने के लिए यह लोग तेल के नए रेटों पर ही पेट्रोल और डीजल आम लोगों को बेच रही है हालांकि मिड लिस्ट के तनाव कम होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 89 से 90 डॉलर का रेट कच्चे तेलों पर गिरा हुआ है, जिस कंपनी ना तो घाट में है और ना ही मुनाफा में है लेकिन इसके बावजूद भी यह पेट्रोल और डीजल पर पुराने रेट से भी अधिक कमाई कर रही है।

तेल कंपनियों के चौथी तिमाही में भी फायदा हुआ।

कच्चे तेल की सबसे तेज बढ़ोतरी के दिनों में भी तेल कंपनियों के चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च 2026) के नतीजे नकारात्मक नहीं आए। देश की चार बड़ी तेल कंपनियों का मुनाफा पिछले साल 2024-25 की चौथी तिमाही की तुलना में 22% तक ज्यादा रहा। सबसे तेज युद्ध के 33 दिन इसी तिमाही में शामिल थे। इस दौरान इंडियन बास्केट में कच्चे तेल के दाम 157 डॉलर/बैरल तक पहुंचे थे। मार्च में कच्चे तेल के औसत दाम 125.7 डॉलर/बैरल थे।

दैनिक भास्कर के द्वारा प्रस्तुत।

इसमें सरकार के भी हो रहे मुनाफे

ईंधन की कीमत केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करती। इसके पीछे कई अन्य कारण भी होते हैं।

केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स।

केंद्र और राज्य सरकार अपने अलग-अलग टैक्सों के माध्यम से तेल के कीमतों को बढ़ा देती है और इन्हीं कुछ कारणों की वजह से तेल ना चाहते हुए भी अपने पुराने रेट पर वापस नहीं आता। तेल कंपनियां इनको अपने पुराने दर पर वापस तो लाना चाहती हैं लेकिन पिछले दर के मुताबिक नए दर में केंद्र और राज्य सरकार टैक्स की बढ़ोतरी कर देती है जिस कारण से पुराने दर से भी ज्यादा नया दर का भाव बड़ा होता है।

वहीं कुछ कारणों में तेल इंपोर्ट करने का कॉस्ट भी बढ़ जाता है और जब तेल की खरीदारी की जाती है तो उसका मूल्य डॉलर में चुकाया जाता है और डॉलर का बढ़ता भाव और रुपए का भाव गिरता हुआ भी तेल के भावों को बढ़ाकर रखता है। डॉलर और रुपए भी तेल के दामों में एक अहम भूमिका निभाते हैं, और इसी कारण से पेट्रोल और डीजल के भावना चाह कर भी काम नहीं हो पता। 

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव सामान्य रूप से पहले तरह चलता रहे तो आने वाले कुछ समय में तेल कंपनियां अपने स्थिरता को मजबूत करके खुदरा तेल के भाव में गिरावट ला सकती है। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर का भाव बढ़ता रहेगा और पैसे का भाव लगातार गिरता रहेगा तब इन पेट्रोल और डीजल के कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।

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अंततः

फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि तेल कंपनियां हर लीटर पर ₹11 का मुनाफा कमा रही हैं। उपलब्ध रिपोर्टें बताती हैं कि हाल के महीनों में कंपनियों को अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा, हालांकि अब कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से स्थिति बेहतर हो सकती है। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो भविष्य में आम उपभोक्ताओं को भी कुछ राहत मिल सकती है।

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