भारत का समर्थन किस देश के साथ में है: मिडल ईस्ट युद्ध संकट में प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन किस देश के साथ?

दिल्ली: मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते युद्ध के बीच दुनिया भर की अब नजर बस भारत के नीति पर टिकी हुई है कई देशों की आपसी मतभेद और चल रही युद्ध के बीच अब सब की नजर इस बात पर टिकी है कि भारत किसके साथ खड़ा है भारत के प्रधानमंत्री किस देश को अपना समर्थन देंगे

और इसी बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया दिए हैं, पीएम मोदी ने अपने भाषण में बोला है कि भारत का रुख हमेशा शांति, संवाद और स्थिरता के पक्ष में रहा है। भारत किसी भी तरह के युद्ध या किसी भी प्रकार के हिंसा का कोई बढ़ावा नहीं देता उसका समर्थन नहीं करता भारत के निष्पक्षता हमेशा शांति का हाथ बढ़ाना रहा है और इस संकट में भी भारत अपनी सूझ-बूझ से ही काम लगा।

मिडिल ईस्ट में क्यों बढ़ रहा है तनाव?

हाल ही के समय में मिड लिस्ट क्षेत्र में कई घटनाओं ने युद्ध को और बढ़ा दिया है अलग-अलग देशों के बीच हो रहे सैन्य टकराव और राजनीतिक विवादों ने पूरे देश को असंतुलित बना दिया है, इस टकराव का असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक, राजनीतिक व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है।

और भारत देश के लिए यह मुद्दा इतना हम है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा स्रोतों को बहुत बड़ा हिस्सा यही से पूरा करता है और साथ में भारतीय नागरिक भरी जनसंख्या में इन क्षेत्रों में काम भी करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का क्या जवाब है?

पीएम मोदी ने अपने बयान में कहा कि भारत की विदेशी नीति हमेशा संतुलन और शांति बनने पर आधारित है और इसलिए पीएम मोदी ने कहा कि भारत किसी एक देश के साथ खड़ा होने की बजाय शांति का संवाद और कूटनीति समाधान का विचार करता है, और समर्थन भी देता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात भी निश्चित किया कि भारत का मुख्य उद्देश्य है क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

भारत की विदेश नीति क्या है?

भारत लंबे समय से रणनीतिक संतुलन की विचारधारा अपनाता चला आ रहा है इसका मतलब साफ है कि भारत सभी देशों के साथ अपना अच्छा संबंध बनाए रखना और सबके साथ संवेदनशील रहना यही भारत की कोशिश रहती है और यही भारत की विदेश नीति भी है।

तभी तो विशेषज्ञों का मानना भी है, कि यही कारण है कि भारत कई अंतरराष्ट्रीय संकटों में अपना सूझबूझ और शांति का अहम भूमिका निभाया है।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर पीएम मोदी का विचार

कल संसद भवन में अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया कि इतने बड़े संकट में भी भारत अपने नागरिकों का सर्वप्रथम प्राथमिकता देता है प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अभी तक जैसे माहौल ईरान और इसराइल समेत कई देशों में बना है वहां से भी हम अपने नागरिकों की सही सलामत अपने देश वापस लाने में सफल रहे हैं।

पीएम मोदी ने बोला कि भारत सरकार अभी तक ईरान से 1000 से ज्यादा नागरिकों को भारत सुरक्षित लाई है जिसमें से 700 से अधिक छात्र हैं और भारत सरकार लगातार प्रयास में है कि बिना किसी रूकावट के जितने भी नागरिक उन टकराव के बीच फंसे हैं उनको सलामत अपने देश वापस लाया जाए

वैश्विक राजनीतिक पर क्या असर होगा?

मिडिल ईस्ट का संकट अगर लंबे समय तक चलता है तो इसका असर तेल के कीमतों ऊर्जा के स्रोतों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ सकता है और भारत जैसे बड़े उपभोक्ता वाले देश के लिए यह स्थिति आर्थिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।

और इसी चीज को मध्य नजर रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमने खाड़ी क्षेत्र से निर्भरता कम करने का प्लान बनाया है और अब हम तेल के लिए नए-नए देशों से भी संपर्क बनेंगे और प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि अब भारत को दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।

निष्कर्ष

भारत का कथन साफ है प्रधानमंत्री मोदी का बोलना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच भारत किसी भी देश के खिलाफ नहीं है बल्कि भारत तो शांति और समझौते के पक्ष में खड़ा है

प्रधानमंत्री मोदी का साफ बोलना है कि मौजूदा हालात में संवाद ही सबसे बड़ा समाधान है।

          — समाप्त —     (The Ashirvad)

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