
देखिए पिछले कुछ हफ्तों में भारत-रूस के बीच तेल व्यापार को लेकर तेजी से राजनीतिक चर्चा बढ़ गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत अब रुस से तेल खरीदना बंद कर देगा लेकिन क्या यह बात भारत सरकार ने अमेरिका से बोली या फिर क्या ऐसा कोई घोषणा किया गया सरकार की ओर से जिसमें यह स्पष्ट रूप से बोला गया हो कि अब भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। आइए आपको पूरा मुजरा समझते हैं।
क्या भारत रस से पूरी तरह से तेल खरीदना बंद कर दिया है?
____ तो नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने यह साफ रूप से स्पष्ट कहा कि भारत ने ऐसा कभी नहीं बोला कि वह रुस से तेल खरीदना बंद करेगा या ऐसा कोई घोषणा करेगा। यह दवा केवल वह केवल अमेरिका अपनी बातों से बोल रहा है भारत ने अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं करने का सोचा है और ना वह अभी तक कोई फैसला अमेरिका को सुनाया है।
कुछ एनालिस्ट का बोलना है, कि भारत के लिए रूस के तेल खरीदना अचानक से बंद करना आसान नहीं होगा। क्योंकि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर काफी बड़ा असर पड़ेगा साथ में ऊर्जा बाजार और इंधनों के कीमतों पर भी बड़ा झटका का सामना करना पड़ेगा।
क्या अभी भी रुस से तेल खरीदना जारी है, और इसमें कितना कमी या बढ़ोतरी हुई है?
___ देखिए भारत ने जनवरी 2026 में करीब 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन रुसी कच्चा तेल इंपोर्ट किया हालांकि यह पिछले साल के तुलना में काम है क्योंकि कुछ रिफाइनरियों ने खरीद कम की है, 2025 के लास्ट महीने दिसंबर में रूसी तेल के आयात में गिरावट देखी गई इसके बावजूद भी भारत तीसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। हालांकि कुछ निजी रिफाइनरी जैसे कि रिलायंस ने रूस से तेल खरीदना फिलहाल के लिए रोक दिया है जबकि राज्य के नियंत्रित कंपनियों जैसे कि आईओसी (IOC) और बीपीसीएल (BPCL) अभी भी रुस से नियंत्रित तेल ले रहे हैं और यही संकेत दावा करता है कि भारत अभी भी रुस से तेल खरीदना बंद नहीं किया है बस यह एक अफवाह है हालांकि इसके मात्रा और स्रोत में थोड़ा परिवर्तन जरूर हुआ है।
रूस तेल क्यों जरूरी था खरीदना?

___ यूक्रेन के युद्ध के बाद जब पश्चिमी देश रूस से तेल खरीदना कम कर दिए तब भारत ही था जो भारी मात्रा में रूसी कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था जिससे भारत को भी भारी मात्रा में मुनाफा हुआ और इससे रुस को भी भारत का एक बड़ा बाजार मिला पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रूस से 144 अरब यूरो से ज्यादा कीमत का तेल खरीदा है।
वहीं अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाया और इसी बीच अमेरिका ने भारत से ट्रेड डील के हिस्से के रूप में कहा कि वह रुस से तेल खरीदना कम करेगा और इसका असर रिफाइनरीयों के व्यापार निर्णय पर पड़ रहा है।
निष्कर्ष : मतलब भारत और रूस तेल व्यापार में बदलाव तो हो रहा है, लेकिन पूरी तरह से रुस से तेल खरीदना बंद कहना यह सही नहीं है क्योंकि यह राजनीतिक दबाव है ना की आधिकारिक नीति।
_____ समाप्त ____ (The Ashirvad)
