झारखंड छात्र आंदोलन: 22 भर्ती परीक्षाओं पर बड़ा फैसला, हाईकोर्ट के स्टे से मामला फिर गरम

झारखंड छात्र आंदोलन में 22 भर्ती परीक्षाओं पर हाईकोर्ट की रोक
Jharkhand Student Protest: 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द, हाईकोर्ट की रोक से मचा हड़कंप; जानें पूरा मामला

रांची: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच झारखंड सरकार का एक बड़ा फैसला सामने आया जहां पर झारखंड सरकार के द्वारा टीडीपीएल के द्वारा जितने भी परीक्षा कराए गए या फिर जितने भी प्रकाशित रिजल्ट है या फिर जो भी छात्र ट्रिटीकेल के द्वारा चयनित किए गए उन सबको रद्द करने का सरकार की ओर से बड़ा फैसला आया

इसके बाद चल रहे छात्र आंदोलन कुछ समय के लिए रुक गया और छात्रों के अंदर झारखंड सरकार के प्रति एक विश्वास का नजरिया देखने को मिला जिससे झारखंड सरकार बच्चों को आश्वासित करते हुए कहा कि पेपर लीक का मुद्दा सीआईडी को सौंपते हुए सारे पेरो को रद्द किया जाता है।

लेकिन झारखंड सरकार ने रद्द करने से पहले या फिर रद्द करने की घोषणा करने से पहले उन छात्रों के बारे में नहीं सोचा जो छात्र परीक्षा देकर पहले से ही अपने कम पर लगा चुके हैं जिनको चयनित भी कर लिया गया है जिनका रिजल्ट भी आ चुका है उन छात्रों के बारे में झारखंड सरकार ने थोड़ा भी नहीं सोचा इसके बाद एक आंदोलन खत्म होते ही झारखंड में दूसरा आंदोलन शुरू हो गया

और यह आंदोलन पेपर रद्द करने के लिए नहीं बल्कि पेपर रद्द हुआ है उसके विपक्ष में छात्रों ने आवाज उठाना शुरू कर दिया है छात्रों का कहना है कि सरकार हम लोगों के बारे में थोड़ा भी नहीं सोची जो हम लोग सालों मेहनत करके परीक्षा को निकले हैं और अपने मेहनत के दम पर इस मुकाम तक पहुंचे हैं लेकिन सरकार ने एक झटके में हमारी सारी मेहनत पर पानी फेर दी और पेपर को रद्द करते हुए हमारे जिंदगी को भी रद्द कर दिया

छात्रों का आंदोलन तेजी से बढ़ रहा है।

एक छात्र आंदोलन जो पेपर रद्द करने के लिए हो रहा था उस पर सरकार ने जैसी अपनी प्रतिक्रिया दी और जैसे ही उन छात्रों की बातों को मानते हुए टीडीपीएल के कराए गए परीक्षा प्रकाशित रिजल्ट और जितने भी छात्र चयनित हुए उनको रद्द करने का फैसला लिया, वैसे ही इन छात्रों के अंदर अपनी आंदोलन को सफलतापुर्वक देखकर खुशी का उमंग उठ गया

लेकिन शायद यह छात्र इस बात से अनजान थे कि जिस पेपर रद्द करने के लिए यह लोग आंदोलन कर रहे हैं इस पेपर को बचाने के लिए फिर एक बहुत बड़ा आंदोलन होने वाला है और जैसे ही पहले छात्र आंदोलन खत्म हुआ जो की पेपर रद्द करने के पक्ष में था और सरकार ने जैसे ही इनकी बातों पर सहमति जताते हुए पेपर रद्द करने का ऐलान किया तुरंत दूसरा पक्ष दूसरा छात्र आंदोलन शुरू हो गया जहां पर छात्रों ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि

हम लोगों ने जो सालों से मेहनत करके परीक्षा दी और उसमें उत्तीर्ण होकर अपने मुकाम तक पहुंचा सरकार ने हम सब के बारे में एक बार भी नहीं सोचा और कुछ छात्रों के वजह से हमारी जिंदगी के साथ भी खेल गए, छात्रों ने सरकार पर और आंदोलन कर रहे छात्रों पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कर छात्र हैं जो अपने बलबूते पर कुछ कर नहीं सकते और जिनको केवल आंदोलन करके ही पेपर रद्द करने का प्रक्रिया पता है।

उन छात्रों की बात सरकार मान ली और हम लोगों के बारे में एक बार भी नहीं सोचा सरकार ने यह नहीं सोचा कि अगर हम सब का नौकरी चल जाएगा जो कि हम लोग मेहनत से पाए हैं तो फिर हमारा घर परिवार कैसे चलेगा हमारा जीवन कैसे अपन होगा हम लोगों ने सालों मेहनत करके इस नौकरी पर पहुंचे इस मुकाम हासिल किए हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रतिक्रिया

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जैसे ही टीडीपीएल के द्वारा कराए गए परीक्षा और प्रकाशित रिजल्ट और चयनित छात्रों को रद्द करने की बात किया वैसे ही कुछ छात्रों के अंदर खुशी का लहर दौड़ उठा यह वही छात्र थे जो परीक्षा को रद्द करने और पेपर लीक जैसे समस्या को सीआईडी को सौंपने के लिए 20 दिन से लगातार आंदोलन कर रहे थे जिसके बाद हेमंत सूर्य ने उनके बातों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं छात्रों की मेहनत बर्बाद नहीं होने दूंगा

और छात्रों का जो मांग है, कि पेपर रद्द किया जाए और सीआईडी को इसका जांच सौंप दिया जाए तो मैं टीडीपीएल के द्वारा जितने भी प्रकार की परीक्षा हुई जो छात्र चयनित हुए और साथ में जो रिजल्ट प्रकाशित हुए मैं उनको रद्द करता हूं साथ में मैं जांच के लिए एक नए गठन का निर्माण करूंगा और इसके जड़ तक तहकीकात कर आऊंगा यह जांच पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से किया जाएगा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर उठा बवाल

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जो टीडीपीएल के द्वारा कुछ परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की तो इनको पता नहीं था कि यह कितनी बड़ी मुसीबत को बढ़ावा दे रहे हैं इनके घोषणा के तुरंत बाद रांची में एक बहुत बड़ा आंदोलन उम्दा जहां पर इस आंदोलन में वह छात्र भाग लिए जिनको पहले ही चयनित करके उनके नौकरी के साथ उनके स्थान पर भेज दिया गया है लेकिन जब छात्रों को पता चला कि टीडीपीएल के द्वारा सारे भी परीक्षा को रद्द किया जाता है तो वहीं छात्र फिर से आंदोलन करना शुरू कर दिए

छात्रों ने आंदोलन में सरकार से सवाल करते हुए कहा कि सरकार एक बार भी हमारे बारे में नहीं सोची और कुछ छात्रों के कारण हमारे भी जिंदगी को बर्बाद कर दिया शायद सरकार को पता नहीं है कि हम लोग कई सालों की मेहनत के बाद इस मुकाम तक पहुंचे हैं लेकिन सरकार का एक शब्द से ही हमारे सारे जीवन को अंधेरे में धकेल दिया गया है।

सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द करने का फैसला क्यों लिया?

छात्र आंदोलन के बीच झारखंड सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया। इनमें JSSC-CGL समेत ऐसी परीक्षाएं शामिल थीं जिनकी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।
सरकार ने इसके साथ ही कई दूसरी भर्ती परीक्षाओं की जांच का आदेश भी दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 23 अन्य परीक्षाओं की जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है, जबकि 17 परीक्षाओं को लेकर CID जांच की खबर सामने आई है।

सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में सामने आए आरोपों की जांच करना और भविष्य में परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाना बताया गया है।

हाई कोर्ट ने कुछ पेरो को रद्द करने पर लगाई रोक

20 अगस्त को झारखंड हाई कोर्ट का आदेश आने पर यह मामला और पेचीदा हो गया। अदालत ने सरकार द्वारा कुछ JPSC परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी है। इस आदेश से उन अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जिनकी परीक्षा और नियुक्ति सरकार के रद्दीकरण आदेश से प्रभावित हो रही थी।

यानी एक तरफ छात्र संगठन भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ सफल अभ्यर्थी अपनी नियुक्तियों को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

कोर्ट का आदेश पर उन छात्रों को राहत की कुछ पहले दिखाई दे रही है जिनको अपने मेहनत पर पूरा भरोसा था और इस परीक्षा में उत्तीर्ण होकर अपने मुकाम पर पहुंचे हैं अगर पेपर रद्द होता है तो उनके साथ भी बहुत बड़ा नाइंसाफी होगा ऐसे में कोर्ट के आदेश के अनुसार उन छात्रों को थोड़ा-थोड़ा हाथ मिला है।

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अंततः

टीडीपीएल के द्वारा जितने भी परीक्षा कराए गए जो रिजल्ट प्रकाशित हुई या फिर जो छात्र चयनित किए गए उन पर जब झारखंड सरकार का प्रतिक्रिया आया और पेपर रद्द करने की बात कही गई तब उन छात्रों का भी गुस्सा फूटा जो छात्र पहले से ही इस पेपर के कारण उत्तीर्ण होकर अपने मुकाम पर बैठे थे और अपने कार्यकाल में व्यस्त थे जिनको झारखंड सरकार के द्वारा चयनित करके उनके नौकरी अनुसार कार्य दे दिया गया था

लेकिन सरकार बिना उनके बारे में सोच तुरंत यह ऐलान कर दिया कि टीडीपीएल के द्वारा कराएगी परीक्षाओं को रद्द किया जाता है जिसके बाद इन छात्रों ने भी अपनी आक्रोश सा दिखाते हुए सरकार पर सवाल करना शुरू कर दिया छात्रों का कहना है कि हमारे बारे में सरकार ने एक बार भी नहीं सोचा कि हम लोगों ने लगातार कई साल मेहनत करके इस मुकाम तक पहुंचे हैं लेकिन सरकार ने कुछ छात्रों के बारे में जो कि अपने मेहनत से कुछ हासिल कर नहीं चाहते हैं उनको ध्यान में रखते हुए हमारे भविष्य को भी अंधकार में धकेल दिया

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