झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन पर बवाल, कथित पुलिस कार्रवाई के बाद सियासत तेज

झारखंड (रांची) : झारखंड में हो रहे छात्रों के द्वारा पेपर लीक पर आंदोलन काफी हाई वोल्टेज का रफ्तार पकड़ चुका है। छात्रों ने जो सरकार से मांग की थी उसे पर सरकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई ऊपर से सरकार के द्वारा छात्रों को रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम कर दिया गया जिससे छात्रा संसद तक मार्च ना निकल सके लेकिन छात्रों ने भी अलग ही तरकीब अपना ली

छात्रों के द्वारा संसद तक मार्च निकालने का ऐलान किया गया जिस वजह से झारखंड सरकार ने छात्रों को रोकने के लिए रास्ते पर लोहे के नुकीले नुकीले तारों से घेराबंदी करवा दी और यह घेराबंदी हर 100 मीटर पर की गई जीसस से छात्रों को रोका जा सके लेकिन छात्रों ने भी घेराबंदी वाले रास्ते को छोड़कर खेतों से जाना शुरू कर दिया और संसद की तरफ भारी संख्या में पहुंचना शुरू कर दिए

सरकार और छात्रों के बीच बातचीत पर नजर

प्रदर्शन के बीच सरकार की ओर से छात्रों से बातचीत की कोशिश भी की गई है। हालांकि रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारी सरकारी पैनल के साथ बातचीत से संतुष्ट नहीं हैं और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे संवाद की मांग कर रहे हैं। हेमंत सोरेन ने तो पहले छात्रों से बात करने के लिए कहा लेकिन बाद में उन्होंने छात्रा की एक भी बात ना सुनी और ना ही उसको लेकर कोई अपनी प्रतिक्रिया दी

हेमंत सोरेन ने छात्रों से कहा कि पेपर लीक पर कड़ी कार्रवाई होगी और इसको सीआईडी को सौंप दिया गया है। जिससे सीआईडी अपने स्तर से इसकी जांच करेगी और इसके पीछे जो कोई भी है। जो कोई भी गिरोह इसके लिए काम कर रहा है उसका पर्दाफाश किया जाएगा

छात्रों ने किया सरकार से मांग

18 दिन से लगातार धरना पर बैठे छात्रों ने झारखंड सरकार से बस कुछ बातों का डिमांड किया जिससे इस पेपर लीक को रोका जा सके और फिर से री पेपर कराया जा सके

  • छात्रों की मांग 13 पेरो को किया जाए रद
  • निष्पक्ष परीक्षा, पारदर्शी और जवाब देही की मांग
  • छात्रों ने किया कांग्रेस से सवाल दिल्ली के छात्रों के साथ इतनी हमदर्दी और हमारे लिए कुछ भी नहीं
  • छात्रों ने राहुल गांधी से पूछा कि क्या राज्य देखकर लोकतंत्र बदल जाता है? और क्या सत्ता देखकर छात्रों का दर्द बदल जाता है?

छात्रों सरकार से शांतिपूर्ण बात करने के प्रस्ताव राखी और कहा कि बस परीक्षा लीक पर सरकार कड़ी कार्रवाई करें और इसको सीबीआई के हाथों सौंप दे तो हमें तसल्ली मिलेगी

सरकार का आंदोलन पर जवाब

हेमंत सोरेन ने कहा कि हमने छात्रों की अधिकतम बात मान ली है और पेपर लीक की जांच के लिए पूरा मामला सीआईडी को सौंप दिया गया है। हेमंत सोरेन ने कहा कि परीक्षा का निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होगा और भविष्य में ऐसी कोई घटना ना हो इस पर हम कड़ी कार्रवाई करने का व्यवस्था करने वाले हैं छात्रों ने जो मांग की है उसे पर हम पूरी तरह से अमल करते हैं।

हालांकि इस पर छात्रों ने जवाब दिया कि सरकार की ओर से ऐसा कोई भी बात नहीं हुआ है ऊपर से सरकार अपने पुलिस कर्मचारियों को हमारे पास भेज कर धमकाने और डरने की कोशिश कर रही है लेकिन हम चाहते हैं कि हेमंत सोरेन हमसे रूबरू बात करें और हमारी बातों को सुने जब तक हेमंत सूर्य ने हमारी बातों को नहीं सुनते हैं तब बता कहां आंदोलन पर बैठे रहेंगे

संसद में उठा पेपर लीक का सवाल

संसद में झारखंड में हुए पेपर लिख को लेकर भाजपा के द्वारा सवाल किया गया जिस पर उन्होंने कहा कि दिल्ली में जंतर मंतर पर जब छात्रों के द्वारा आंदोलन किया जा रहा था तब कांग्रेस और पूरे विपक्ष केंद्र सरकार पर और भाजपा पर निशाना साधते हुए दोषी ठहरने में लगे हुए थे लेकिन जब झारखंड में पेपर लीक हुआ और जब वहां पर छात्र धरने पर बैठे तब यही विपक्ष अपनी मुंह बंद करके बैठा हुआ है।

विपक्ष को लगता है कि झारखंड में पेपर लीक जैसा कोई भी मुद्दा हुआ ही नहीं और इसीलिए इनका केवल दिल्ली के छात्रों के साथ ही हुए अन्य दिखाई दे रहा है और झारखंड में जो छात्र अपनी इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। उसे पर इनका चू तका नहीं निकल रहा भाजपा ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी दिल्ली में छात्रों के लिए लगातार आवाज उठा रहे थे लेकिन जब झारखंड की छात्रों की बात आई तब उसे पर उन्होंने एक शब्द नहीं बोला

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अंततः

झारखंड में छात्रों के द्वारा पेपर लीक पर चल रहे प्रदर्शन का आज 18 दिन है लेकिन अभी तक इनके बातों पर सरकार के द्वारा कोई भी ऐसी प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली जिससे छात्रों को संतुष्टि मिले और इसीलिए छात्र लगातार धरना दे रहे हैं छात्रों को रोकने के लिए सरकार ने कई सारी उपाय कर चुकी है लेकिन छात्र बिना डरे अपनी बात को रखने की मांग कर रहे हैं।

छात्रों ने इसके लिए संसद तक मार्च निकालने के भी कोशिश की जिसके लिए सरकार ने कड़ी बंदोबस्त करते हुए उनको रोकने का पूरा व्यवस्था कर दिया लेकिन इसके बावजूद भी छात्र रास्ते का मार्ग छोड़कर खेतों के द्वारा संसद तक पहुंचने लगे, छात्रों का मांग है कि 13 को 13 पेपर रद्द किया जाए और इस पर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच बैठाया जाए

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